हिंदू धर्म में मान्यता है कि जब सूर्य ग्रहण (Surya Grahan 2022) लगता है तो इस दौरान भोजन नहीं करना चाहिए। देवी भागवत् 9/35 के अनुसार सूर्य ग्रहण या चन्द्र ग्रहण के समय भोजन करने वाला मनुष्य जितना अन्न का दाना खाता है, उतने वर्षो तक 'अरन्तुद' नरक में रहता है। पूर्वजों की बरसी ग्रहण काल में आती हो तो भोजन करने की व्यवस्था भी अलग होती है। सनातन धर्म में सूर्य और चंद्र ग्रहण के विषय पर जितना अधिक शोध हुआ है वैसा किसी अन्य धर्म व सभ्यता में नहीं किया गया है।
ग्रहण के दौरान भोजन करना क्यों है अशुभ
हिंदू धार्मिक पुराणों में बताया गया है कि ना सिर्फ सूर्य ग्रहण बल्कि चंद्र ग्रहण के समय भी भोजन नहीं करना चाहिए. इसके अलावा ऐसा भी उल्लेख मिलता है कि ग्रहण लगने के कुछ समय पहले खाद्य पदार्थों में कुश या तुलसी के पत्ते डाल देना चाहिए और ग्रहण के समाप्त हो जाने के बाद इसे घर से बाहर फेंक दें। स्नान करने के बाद ही भोजन ग्रहण करें। ऐसा इसलिए क्योंकि ग्रहण के दौरान जो जीवाणु वातावरण में होते हैं वह आपके शरीर में चिपक जाते हैं। इसलिए स्नान करने से यह जीवाणु आपके शरीर से निकल जाएंगे।
-वैसे तो ग्रहण के दौरान भोजन करने की मनाही होती है, लेकिन कुछ अवस्थाओं में कुछ लोगों को भोजन करने की रियायत दी जा सकती है। जैसे बुजुर्ग, छोटा बालक, गर्भवती महिला या रोगी भोजन कर सकते हैं. मान्यताओं के अनुसार यदि आवश्यकता हो तो यह सभी लोग सूर्य ग्रहण से एक घंटा पहले भोजन कर सकते हैं।
निर्णय सिन्धु में 'ग्रहण निर्णय' के बारे में उल्लेख
तत्र चन्द्र ग्रहणे यस्मिन्याये ग्रहणं तस्मात्पूर्व ।
प्रहरत्रयं न भुञ्जीत् । सूर्य ग्रहे तु प्रहर चतुष्टयं न भुञ्जीत्॥"
इसका अर्थ है कि सूर्य ग्रहण के समय शकवात के 4 प्रहर एवं चंद्र ग्रहण के समय प्रारंभिक 3 प्रहरों में पका हुआ भोजन नहीं करना चाहिए। इसके अलावा देवी भागवत् 9/35 के अनुसार सूर्य ग्रहण या चन्द्र ग्रहण के समय भोजन करने वाला मनुष्य जितना अन्न का दाना खाता है, उतने वर्षो तक 'अरन्तुद' नरक में रहता है। इसके अलावा सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के दौरान खाना खाने से उदररोग से पीड़ित होकर गुल्मरोगी, काना एवं दन्तहीन हो जाता है।
वैज्ञानिक शोध में मिले प्रमाण
वैज्ञानिक परीक्षणों से भी यह सिद्ध हो चुका है कि सूर्य चंद्र ग्रहण के समय पड़ने वाली पराबैंगनी (Ultra Violet rays) किरणों से भोजन विषैला हो जाता है, इसलिए हिन्दू लोग पके हुए भोजन पर कुशा एवं तुलसी की पत्तियां औषधि के रूप में रखते हैं तथा आमतौर पर उपवास रखते हैं।
यदि किसी के पूर्वजों की बरसी ग्रहण काल में आती हो तो भोजन करने की व्यवस्था भी अलग होती है। पौराणिक मान्यता है कि यदि पूर्वजों की बरसी ग्रहण काल में पड़ती है तो उसे खास माना जाता है। उस दिन अन्य बरसी की तरह ब्राह्मणों को भोजन नहीं कराया जाता। ग्रहण श्राद्ध में साधारण या अनपका भोजन दिया जाता है। साथ ही उस दिन पंडित को सोने का दान करने की भी प्रथा है। यह रस्म रात को भी पूरी की जा सकती है।
25 अक्टूबर को लगेगा सूर्य ग्रहण
बता दें कि इस साल दिवाली के अगले दिन शाम को साल का दूसरा सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर का लगेगा, जो भारत में भी देखा जा सकता है। सूर्य ग्रहण शाम 4:22 बजे से 5:42 बजे तक रहेगा। इससे 12 घंटे पहले ग्रहण का सूतक काल शुरू हो जाएगा। सूर्य ग्रहण का स्पर्श भारत में दिन के 11.28 बजे हो जाएगा और करीब 07:05 घंटा बाद शाम 5.42 बजे मोक्ष होगा।
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