दुर्गा पूजा 2018: परम ब्रह्म के तुल्य मानी जाती हैं देवी दुर्गा

परम ब्रह्म हैं देवी

 मां दुर्गा हिन्दुओं की प्रमुख देवी हैं जिन्हें आदि देवी और शक्ति भी कहते हैं। शाक्त सम्प्रदाय की ये मुख्य देवी हैं जिनकी तुलना परम ब्रह्म से भी की जाती है। दुर्गा को आदि शक्ति, प्रधान प्रकृति, गुणवती माया, बुद्धितत्व की जननी तथा विकार रहित बताया गया है। वह अंधकार व अज्ञान रुपी राक्षसों से रक्षा करने वाली कल्याणकारी शक्ति हैं। दुर्गा जी के बारे में मान्यता है कि वे शान्ति, समृद्धि तथा धर्म का विनाश करने वाली राक्षसी प्रवृत्तियों का विनाश करतीं हैं। दुर्गा जी की सवारी शेर बतार्इ गइ है।

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Happy Navratri 2018: यहां से हुई थी नवरात्र पर्व मनाने की शुरुआत, जानिए इसका महत्व

Navratri 2018: नवरात्र हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है। 9 दिन चलने वाले इस त्योहार में मां दुर्गा के 9 रूपों की अराधना की जाती है। नवरात्र का शाब्दिक अर्थ नौ रातों का समूह होता है।

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नवरात्रि 2018 : मां शैलपुत्री की साधना से प्रारंभ होगा शक्ति का पर्व, इस पूजन से पूरी होगी मनोकामना

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। शैलपुत्री हिमालय पर्वत की पुत्री हैं। पूर्वजन्म में ये राजा दक्ष की पुत्री और भगवान शिव की पत्नी थीं। तब इनका नाम सती था। एक बार प्रजापति दक्ष ने बहुत विशाल यज्ञ का आयोजन किया। उन्होंने सभी राजा-महाराजा व देवी देवताओं को निमंत्रण दिया, लेकिन भगवान शिव का औघड़ रूप होने के कारण उन्हें निमंत्रण नहीं दिया।

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वर्षफल: जन्‍मदिन 5 अक्‍टूबर, बढ़ेगी आमदनी मिलेगी सफलता

सामान्य फल
काम की व्यस्तता रहेगी। दूसरों की चिंता का बोझ उठायेंगे। मित्रों तथा स्वजनों पर धन व्यय होगा। आय वृद्धि के लिए प्रयत्नशील रहेंगे। परन्तु विरोध और अवरोध से भी परेशान भी होंगे। लापरवाही के कारण परेशानियां हो सकती हैं। मामूली प्रयास भी आर्थिक संकोच मिटाने में सक्षम है। समय का सदुपयोग करें। किसी पुराने काम को निपटा लें तो अच्छा ही है अन्यथा व्यर्थ ही समय नष्ट हो जायेगा। शारीरिक सौन्दर्य का विकास होगा तथा श्रम साध्य सफलता मिलेगी। आपके अपने प्रयास आपको सफलता दिलाएंगे। किस्मत आपका इतना साथ देगी कि बिना उम्मीद कोई बड़ी सफलता आपकी झोली में आ गिरेगी।

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इस विधि से करें माता महालक्ष्मी व्रत का उद्यापन

आज मंगलवार दिनांक 02.10.18 को आश्विन कृष्ण अष्टमी पर सुरैया महालक्ष्मी पर्व का समापन होगा। भाद्रपद राधा अष्टमी से आश्विन कालाष्टमी तक इन 16 दिनों को सुरैया काल कहते हैं क्योंकि ये समय जीवन को सुरों से सजाकर गुप्त रूप से समृद्धि व संपन्नता देता है।

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पितृपक्ष 2018: तिथि नहीं याद, तो इस तिथि को करें पितरों का श्राद्ध

तिथि नहीं याद, तो सर्वपितृ अमावस्या को करें श्राद्ध जिनको अपने-अपने पूर्वजों की तिथि पंचांग के अनुसार याद नहीं है, वे सर्वपितृ अमावस्या 8 अक्तूबर को ही श्राद्ध करें। कम से कम तिल जल दान तो अवश्य करें। 

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