सूर्य ग्रहण उस समय लगता है जब चांद पृथ्वी और सूर्य के बीच में आ जाता है। इस स्थिति को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। विज्ञान के अनुसार जब सूर्य और पृथ्वी के बीच में चांद आ जाता है जिसके कारण चांद सूर्य के प्रकाश को रोक देता है। इस स्थिति में पृथ्वी पर काला साया छा जाता है, जिसे सूर्य ग्रहण के नाम से जाना जाता है। सूर्य ग्रहण अक्सर अमावस्या के दिन होता है।
भारत के बहुत सारे स्थानों पर आज भी भोले बाबा का त्यौहार महाशिवरात्रि शिव भक्तों द्वारा बहुत हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। आज की तिथि अद्भुत और दुर्लभ संयोग लेकर आई है। भारतीय पंचांग और अंग्रेजी कैलेण्डर के अनुसार आज 14 तारीख पड़ रही है। भगवान शंकर का प्यारा नक्षत्र श्रवण भी है। माना जाता है की इसका स्वामी चन्द्र है। भोलेनाथ ने चन्द्रमा को अपनी शीश पर स्थान दिया है।
देवो के देव महादेव को प्रसन्न करने के लिए शिवरात्रि का दिन बेहद ही उचित माना जाता है. मान्यता है कि शिवरात्रि के दिन सच्चे मन से भोलेनाथ को फूल, भांग और प्रसाद अपर्ति करने से वह खुश होते हैं और मन चाहा वर देते हैं. शिवरात्रि के दिन पूजा तो हर कोई करता है कि, लेकिन पूजा के बाद कुछ चीजों का ध्यान रखना अति आवश्यक है.
Maha Shivratri 2018 Vrat Vidhi: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार फाल्गुन कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि में चंद्रमा सूर्य के सबसे समीप माना जाता है। अतः इस चतुर्दशी को शिवपूजा करने से भक्तों को भगवान शिव से मनवांच्छित फल की प्राप्ति होती है। महाशिवरात्रि का पर्व परमात्मा शिव के दिव्य अवतरण का मंगल सूचक पर्व है। स्कंदपुराण के अनुसार फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को उपवास किया जाता है, इस तिथि को सर्वोत्तम माना जाता है।
Chandra Grahan 2018: साल 2018 का पूर्ण चंद्रग्रहण आज बुधवार 31 जनवरी को पड़ रहा है, यह पूर्ण चंद्रग्रहण होगा और पूरे देश में सभी जगह से देखा जा सकेगा। आज चंद्रमा अपने आकार से कुछ बड़ा व चमकदार दिखाई देगा, जिसे सुपर मून कहा जाता है। चन्द्रग्रहण शाम 5.17 से रात्रि 8.42 तक पूरे भारत में दिखेगा। चन्द्रग्रहण बेध (सूतक) सुबह से शुरू हो जाएगा अतः सुबह 8.17 तक भोजन कर लेना ही शुभ माना जा रहा है। रात्रि 8.42 पर ग्रहण समाप्त होने के बाद पहने हुए वस्त्रों सहित स्नान और चन्द्रदर्शन करके भोजन आदि किया जा सकता है।
वर्ष 2018 का पहला चंद्रग्रहण 31 जनवरी को लगेगा. इस चंद्रग्रहण को दुर्लभ पूर्ण चंद्रग्रहण कहा जा रहा है, क्योंकि हर वर्ष का पहला चंद्रग्रहण होगा जो 77 मिनट तक रहेगा. ज्योतिष के मुताबिक चंद्रग्रहण के सूतक सुबह 7 बजे से शाम को 8 बजकर 41 मिनट तक रहेंगे. साल का पहला चंद्रग्रहण मध्य एवं पूर्वी एशिया, इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया में दिखाई देगा.
वसंत पंचमी – 22 जनवरी 2018। वसन्त पंचमी पर सभी को शुभकामनाएं। हिंदू पंचाग के अनुसार हर वर्ष माघ माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को विद्या और बुद्धि की देवी माता सरस्वती की आराधना का दिन होता है। इसी उपासना के दिन को बसंत पंचमी कहा जाता है। इस दिन संगीत कला और आध्यात्म का आशीर्वाद भी लिया जा सकता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कहा जाता है कि यदि किसी की कुंडली में विद्या बुद्धि का योग नहीं है या शिक्षा में बाधा आ रही है तो इस दिन मां शारदा की आराधना अवश्य करनी चाहिए। सरस्वती पूजन के बाद सर्वप्रथम गणेश जी की पूजा और बाद में रति और कामदेव की पूजा करना लाभदायक माना जाता है।
सफला एकादशी के व्रत में देव श्री विष्णु का पूजन किया जाता है. जिस व्यक्ति को सफला एकाद्शी का व्रत करना हो व इस व्रत का संकल्प करके इस व्रत का आरंभ नियम दशमी तिथि से ही प्रारम्भ करे. व्रत के दिन व्रत के सामान्य नियमों का पालन करना चाहिए.
मेष राशि-बुधवार को सफला एकादशी पड़ रही है. अगर घर की दरिद्रता दूर करना चाहते हैं तो आप बस एक आसान सा उपाय करिए. इसके लिये आज के दिन शाम के समय तुलसी के पौधे में गाय के घी का दीपक जलाएं.
श्राद्ध पक्ष में अमावस्या का बड़ा महत्व है। आश्विन मास की अमावस्या पितरों की शांति का सबसे अच्छा मुहूर्त है। पितरों के शाप से मुक्ति और भविष्य में भी इससे पूरी तरह मुक्त रहने के लिए पितृश्राद्ध किया जाता है। सर्वपितृ अमावस्या अर्थात श्राद्ध-पक्ष के आखिरी दिन किया गया श्राद्ध कर्म हर प्रकार के पितृदोषों से मुक्ति दिलाता है।
आज निर्जला एकादशी है इसे भीमसेनी या पांडव एकादशी भी कहते हैं. ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी सबसे अधिक पुण्यफल दायिनी है, क्योंकि इस व्रत के करने से साल भर की सभी एकादशियों के व्रत के समान पुण्यफल की प्राप्ति होती है. इस बार यह एकादशी 5 जून यानि की आज है, इस व्रत में जल का सेवन न करने के कारण ही यह निर्जला एकादशी कहलाती है. पाण्डवों के भाई भीमसेन ने इस एकादशी का व्रत किया था इसलिए यह भीमसैनी एवं पाण्डवा एकादशी के नाम से भी प्रसिद्ध है.