कोई कहता है छह कहीं बताये गए चौबीस, जानें भगवान विष्‍णु के अवतारों के बारे में

भगवत गीता के चतुर्थ अध्याय के सातवें और आठवें श्लोक में भगवान् ने स्वयं अवतार का प्रयोजन बताते हुए कहा है कि जब-जब धर्म की हानि और अधर्म का उत्थान हो जाता है, तब-तब सज्जनों के परित्राण और दुष्टों के विनाश के लिए मैं विभिन्न युगों में, माया का आश्रय लेकर उत्पन्न होता हूं। इसके अतिरिक्त भागवत महापुराण में भी कहा गया है कि भगवान् तो प्रकृति सम्बन्धी वृद्धि-विनाश आदि से परे अचिन्त्य, अनन्त, निर्गुण हैं, तो यदि वे अवतार रूप में अपनी लीला को प्रकट नहीं करते तो जीव उनके अशेष गुणों को कैसे समझते? अतः प्रेरणा देने और मानव कल्याण के लिए उन्होंने अवतार रूप में अपने को प्रकट किया। 

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यहाँ जानिए शीतला सप्तमी की पौराणिक कथा और महत्व

आप सभी को बता दें कि कल यानी 27 मार्च को शीतला सप्तमी है. ऐसे में इस दिन बहुत से भक्त माँ की पूजा करते हैं और आरती भी. ऐसे में शीतला सप्तमी की कथा सुनने से बहुत बड़ा लाभ होता है. जानिए कथा के बारे में की वह किस प्रकार है. आइए जानते हैं.

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सोम प्रदोष व्रत की यह कथा सुनने से मिलता है मोक्ष

आज प्रदोष व्रत है. ऐसे में आज सोमवार को प्रदोष व्रत होने के कारण इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जा रहा है. तो आइए जानते हैं आज की यानी सोम प्रदोष व्रत की कथा. इस कथा को सुनने से बहुत लाभ होता है और व्रत सफल हो जाता है. आइए जानते हैं.

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बृहस्पतिवार की पूजा से मिलता है सुख शांति और विवाह का आर्शिवाद

गुरूवार को भगवान विष्‍णु और बृहस्पति देव की पूजा की जाती है। बृहस्पति देवताओं के गुरू हैं और उनकी आराधना से ज्ञान की प्राप्‍ति होती है। जाहिर है कि ज्ञान से सुख और समृद्धि की प्राप्‍ति होती है। वहीं ऐसा भी माना जाता है कि जिन का शादी विवाह होने में कठिनाई हो रही है वे यदि बृहस्‍पतिवार को विष्‍णु जी की आराधना एवम् व्रत करें तो उन्‍हें योग्‍य जीवनसाथी की प्राप्‍ति होती है। इस दिन विधि विधान से बृहस्‍पतिदेव और विष्‍णु जी की पूजा करनी चाहिए।

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होलिका दहन से दो दिन पहले है प्रदोष व्रत, जानिए क्या है विधि

आप सभी जानते ही हैं कि भगवान शिव को सर्वोच्च प्रिय कोई व्रत है तो वह है प्रदोष व्रत और इसमें भी सोमवार और शनिवार का संयोग आना बड़े महत्व का होता है. ऐसे में इस बार प्रदोष व्रत सोमवार 18 मार्च को आ रहा है, जो सोम प्रदोष का शुभ संयोग बना रहा है और इस दिन व्रत रखने वालों की किस्मत खुलने वाली है. जी हाँ, फाल्गुन पूर्णिमा यानी होलिका दहन से ठीक पहने आने वाले इस प्रदोष व्रत का सर्वाधिक महत्व बताया जाता है क्योंकि इस संयोग में की जाने वाली शिव की आराधना अनंत गुना फलदायी होती है. ऐसे में शास्त्रों में कहा गया है कि प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है और वे साधक को समस्त प्रकार की सुख-समृद्धि, भोग, ऐश्यर्वशाली जीवन, सुखी वैवाहिक जीवन, श्रेष्ठ आयु और उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करते हैं. इसी के साथ अगर किसी विशेष कामना की पूर्ति के निमित्त प्रदोष व्रत किए जाए तो वह कामना भी सौ फीसदी पूरी हो जाती है.

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सफलता आैर शांति के लिए के लिए स्कंद षष्ठी पर करें पूजन

मंगलवार 12 मार्च को स्कन्द षष्ठी है। इसे कुमार षष्ठी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की उनके पुत्र कार्तिकेय के साथ पूजन का विधान है। नवरात्रि में नवदुर्गा के पांचवें रूप की पूजा भी कुमार कार्तिकेय की माता के रूप में ही होती है, इसीलिए वह देवी स्कंदमाता कहलाती हैं। कहते हैं कि स्कंदमाता कुमार कार्तिकेय के पूजन से जितनी प्रसन्न होती हैं उतनी स्वयं के पूजन से भी नहीं होती। स्कंद शक्ति के अधिदेव हैं। देवताओं ने इन्हें अपना सेनापतित्व प्रदान किया है।

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