विघ्नहर्ता, मंगलमूर्ति, गजानन, गणपति, गणेश जैसे नामों से प्रसिद्ध भगवान शिव और माता पार्वती के छोटे पुत्र गणेश जी की पूजा बुधवार को की जाती है। इस दिन विधि विधान से गणेश जी की पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं, उनके कष्ट दूर होते हैं। हमारे देश में भगवान गणेश के ऐसे प्रसिद्ध मंदिर हैं, जिनके दर्शन मात्र से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।
मोहिनी एकादशी व्रत 15 मई 2019 यानी बुधवार को पड़ रहा है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु ने मोहिनी अवतार धारण करके समुद्र मंथन से निकले अमृत कलश को राक्षसों से बचाया था। ऐसी मान्यता है कि मोहिनी एकादशी व्रत करने से व्यक्ति बुद्धिमान होता है, व्यक्तित्व में निखार आता है और उसकी लोकप्रियता बढ़ती है।
रोजा हर किसी के जीवन में महत्व रखता है. इस्लामिक धर्म में ये माह बेहद ही पाक माना जाता है. बता दें, आज रोजे के दूसरा दिन है जिसका और भी खास महत्व होता है. बता दें, रोजा ईमान की कसावट है. रोजा सदाक़त (सच्चाई) की तरावट और दुनियावी ख़्वाहिशों पर रुकावट है. रोजा रखने पर दिल दुनिया की ख़्वाहिश करता है तो रोजा इस पर रुकावट पैदा करता है. इसके अलावा पवित्र रमजान में अल्लाह का फ़रमान है 'या अय्युहल्लज़ीना आमनु कुतेबा अलयकुमुस्स्याम' यानी 'ऐ किताब (क़ुरआन पाक) के मानने वालों रोजा तुम पर फ़र्ज़ है.' इसके मा'नी (मतलब) यह भी है कि किताब और रोज़े को समझो.
आप सभी जानते ही हैं कि इस बार रमजान 7 मई को मनाई जाने वाली है. इसी के साथ इन दिनों रोजा रखा जाता है. आप सभी को बता दें कि रोजा इस्लाम की पांच अहम बातों में से एक है जो सभी बालिग पर वाजिब है. जी हाँ, आपको बता दें कि वाजिब का मतलब करना ही होगा होता है और यह नहीं करने पर गुनाह के भागीदार माने जाते हैं. जी हाँ, कहते हैं हर बालिग़ को रमजान के दौरान रोजे रखने ही होते हैं. वैसे अब आप सोच रहे होंगे कि कोई बीमार हो या फिर कोई मजबूरी हो तो वो क्या करेगा? तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि क्या हों सकता है ऐसी कंडीशन में. जी हाँ, रोजे में छूट दी जाती है. कुछ हालात ऐसे भी होते हैं जिनमे रोजे में छूट मिल जाती है. आइए जानते हैं उनके बारे में.
देवी सरस्वती विद्या की देवी देवी हैं। इन्हें साहित्य, कला और स्वर की देवी भी माना जाता है। शुक्रवार को अन्य शक्ति स्वरूपों के साथ देवी सरस्वती की भी पूजा अर्चना की जाती है। कहते हैं स्वंय श्री कृष्ण ने सर्वप्रथम सरस्वती जी की पूजा अर्चना की थी। मां सरस्वती के पूजन के समय कुछ विषेश श्लोक पढ़ने से उनकी असीम कृपा प्राप्त होती है। मान्यता है कि शक्तिशाली सरस्वती मंत्र के जाप से स्मृति को विकसित करने में सहायता प्राप्त होती है। इन सशक्त मंत्रों में मां सरस्वती के 108 नाम मंत्रों का प्रमुख स्थान है। ये मंत्र छात्रों, डॉक्टर, वकील और सभी बुद्धिजीवियों के लिए बहुत उपयोगी है। देवी के इन चमत्कारी मंत्रों का जाप करने से वे शीघ्र शुभ फल देती हैं। जानिए कौन से हैं मां सरस्वती के 108 नाम मंत्र।
बुधवार का अक्षय तृतीया को भी भगवान विष्णु की पूजा का महत्व है। इसदिन भगवान विष्णु को पीले वस्त्र धारण करा कर स्थापित किए जाते हैं और हल्दी, चावल से विधि पूर्वक पूजन किया जाता है। शेष समय में गुरुवार को भगवान बृहस्पति की पूजा का विधान है। इस दिन गुरू भगवान और विष्णु जी की पूजा और व्रत करने से ऋण मुक्ति, शीघ्र विवाह और संपत्ति प्राप्ति होती है। बृहस्पति देव को बुद्धि का कारक भी माना गया है अत: इस पूजा से ज्ञान में भी वृद्धि होती है। इसके अलावा ऐसा भी कहा जाता है कि विष्णु जी की पूजा से मनाकामनायें पूर्ण होती हैं और अच्छा स्वास्थ भी प्राप्त होता है।
जो लोग हनुमान जी के भक्त है वे मंगलवार को उनके लिए रहते हैं। धर्म शास्त्रों के अनुसार मंगलवार का व्रत करने वालों की कुंडली में मंगल ग्रह के निर्बल होने का प्रभाव बदल जाता है और शुभ फल प्राप्त होता है। मंगलवार के व्रत से हनुमान जी का आशिर्वाद प्राप्त होता है। साथ ही यह व्रत सम्मान, बल, साहस और पुरुषार्थ को बढ़ाने वाला होता है। बहुत से लोग संतान प्राप्ति की इच्छा से भी इस व्रत को रखते हैं। इस व्रत को रखने से पापों से मुक्ति मिलती है और कहा जाता है कि इसे करने से भूत प्रेत, काली शक्तियों के दुष्प्रभाव से भी मुक्ति मिल जाती है।
शनिवार को शनिदेव की पूजा का विधान है। इस दिन यदि पूजा के साथ शनि स्तोत्र का पाठ किया जाए तो शनि की कुद्रष्टि से रक्षा हो सकती है ऐसी मान्यता है। 10 श्लोकों वाला ये स्तोत्र इस प्रकार है।
इस बार दो शुभ नक्षत्रों के संयोग से हनुमान जन्मोत्सव का पर्व मनाया जायेगा। हनुमान जयंती 2019 पर गजकेसरी और चित्रा नक्षत्र का योग बन रहा है। वैसे हनुमान जयंती के संदर्भ को लेकर कुछ मतभेद हैं। कुछ स्थानों पर हनुमान जयंती कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर मनाई जाती है, और कुछ जगह चैत्र शुक्ल पूर्णिमा पर, जबकि धार्मिक ग्रन्थों में दोनों ही तिथियों का जिक्र आता है। इसका कारण ये है कि पहली तिथि यानि कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को बजरंग बली का विजय अभिनंदन महोत्सव होता है वहीं चैत्र शुक्ल पूर्णिमा पर उनका जन्मदिवस माना जाता है। कहते हैं कि इस दिन बजरंग बली को चोला चढ़ाने से हर बिगड़ा काम बन जाता है और हनुमान जी की विशेष कृपा होती है।
गणपति एकदन्त और चतुर्बाहु हैं। उनके चारों हाथ अलग मुद्रा में नजर आते हैं, इनमें से एक वरमुद्रा में है और शेष तीन में वे क्रमश: पाश, अंकुश, और मोदक पात्र धारण करते हैं। वे रक्तवर्ण, लम्बोदर, शूर्पकर्ण तथा पीतवस्त्रधारी हैं। गणपति को रक्त चंदन का तिलक लगा होता है। श्री गणेश हिंदू धर्म में प्रथम पूजनीय देव हैं, उन्हें श्री विष्णु, शिव, सूर्य तथा मां दुर्गा के साथ नित्य वंदनीय पंच देवताओं में सम्मिलित किया गया है। कोई भी पूजा या धार्मिक और सामाजिक संस्कार गणपति पूजन के बिना सफल नहीं होता है। जब वे खुश होते हैं तो समस्त दुखों का नाश कर देते हैं और रुष्ट होते हैं तो हर कार्य में बाधा उत्पन्न हो जाती है। परंतु क्या आपने सोचा है कि समस्त देवी देवताओं के पूजन के पूर्व श्री गणेश वंदना क्यों होती है और उनका स्वरूप बड़े कान, छोटे नेत्र, विशाल पेट और गजमुख जो सूंड़ से युक्त है, ऐसा क्यों है। आज हम आपको समस्त अंगों का विश्लेषण करके बताते हैं कि उनका ये अदभुत रूप ही उनके गुण हैं, और इन्ही अदृश्य गुणों के कारण प्रथम पूजनीय गणपति आदिदेव हैं जिन्होंने हर युग में अलग अवतार लिया।