सिंगरौली में 10 पटवारी निलंबित, फार्मर रजिस्ट्री और ई-केवाईसी में लापरवाही
सिंगरौली। मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में शासकीय कार्यों में लापरवाही और निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप प्रगति नहीं मिलने पर प्रशासन ने 10 पटवारियों को निलंबित कर दिया है। कलेक्टर गौरव बैनल के निर्देश पर संबंधित अनुविभागीय अधिकारियों ने यह कार्रवाई की। इसमें फार्मर रजिस्ट्री, ई-केवाईसी और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों के निराकरण में लापरवाही को प्रमुख आधार बताया गया है।
प्रशासन की इस कार्रवाई को राजस्व विभाग के कामकाज में जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। फार्मर रजिस्ट्री और ई-केवाईसी जैसे काम किसानों को सरकारी योजनाओं तथा सुविधाओं से जोड़ने के लिए जरूरी हैं। वहीं, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों का समय पर निराकरण करना नागरिकों को बेहतर प्रशासनिक सेवाएं उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी से जुड़ा है।
फार्मर रजिस्ट्री और ई-केवाईसी में प्रगति नहीं मिलने पर कार्रवाई
फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से किसानों से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित किया जाता है। सरकारी योजनाओं और कृषि से जुड़ी सुविधाओं का लाभ पात्र किसानों तक पहुंचाने में यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी तरह ई-केवाईसी की प्रक्रिया भी विभिन्न योजनाओं में लाभार्थियों की पहचान और रिकॉर्ड के सत्यापन से जुड़ी होती है।
इन कार्यों में देरी या अपेक्षित प्रगति नहीं होने से किसानों को योजनाओं का लाभ लेने में परेशानी हो सकती है। इसी कारण जिला प्रशासन ने संबंधित कार्यों की समीक्षा के बाद लापरवाही के मामलों को गंभीरता से लिया।
कलेक्टर गौरव बैनल ने स्पष्ट किया कि किसानों और आम नागरिकों से सीधे जुड़े काम निर्धारित समय-सीमा में पूरे किए जाने चाहिए। इन कार्यों में उदासीनता को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन की शिकायतों के निराकरण पर भी जोर
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नागरिकों को अपनी समस्याएं और शिकायतें प्रशासन तक पहुंचाने का माध्यम उपलब्ध कराती है। शिकायत दर्ज होने के बाद उसका समय-सीमा में निराकरण संबंधित विभाग और अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है।
प्रशासन के अनुसार, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन के मामलों में लापरवाही भी पटवारियों के खिलाफ कार्रवाई के आधारों में शामिल रही। शिकायतों के निराकरण में देरी होने पर नागरिकों को अपनी समस्या के समाधान के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं।
जिला प्रशासन ने संकेत दिया है कि सरकारी योजनाओं और जन शिकायतों से संबंधित कार्यों में जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी। अधिकारियों और कर्मचारियों से अपेक्षा की गई है कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन प्राथमिकता के आधार पर करें।
माड़ा से लेकर देवसर और चितरंगी क्षेत्र के पटवारी शामिल
निलंबित किए गए पटवारियों में जिले की अलग-अलग तहसीलों और हलकों में पदस्थ कर्मचारी शामिल हैं। उपलब्ध रिपोर्ट में जिन नामों का उल्लेख है, उनमें राजेश शाह, संदीप अग्रहरी, अहमद सिद्दीकी, विवेक द्विवेदी, विजय सिंह, शिव कुमार लाकरा, धर्मराज गोस्वामी, तीरथ यादव, श्याम लाल सिंह और गूंजेश्वरी प्रसाद जायसवाल शामिल हैं।
इन कर्मचारियों की पदस्थापना माड़ा, सिंगरौली ग्रामीण, चितरंगी, दुधमनिया, देवसर और बरगवां क्षेत्र के विभिन्न हलकों में बताई गई है। संबंधित अनुविभागीय अधिकारियों ने कलेक्टर के निर्देश पर निलंबन की कार्रवाई की।
सरकारी काम समय पर पूरा करने के निर्देश
कलेक्टर गौरव बैनल ने अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि फार्मर रजिस्ट्री, ई-केवाईसी, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से संबंधित कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्धारित लक्ष्यों को पूरा करने में लापरवाही या शासकीय दायित्वों के निर्वहन में उदासीनता पाए जाने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
इस कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग के कर्मचारियों की कार्यप्रणाली और सरकारी योजनाओं से जुड़े लंबित कार्यों की निगरानी महत्वपूर्ण होगी। प्रशासन की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि किसानों और आम नागरिकों से जुड़े काम समय पर पूरे हों तथा शिकायतों के समाधान में अनावश्यक देरी न हो।












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