शहडोल: गोहपारू के जंगल में बाघ का हमला, चरवाहे की मौत; वन विभाग की भूमिका पर उठे सवाल

शहडोल: बाघ के हमले में चरवाहे की मौत, वन विभाग पर उठे सवाल
शहडोल। मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में बाघ के हमले से एक चरवाहे की मौत हो गई। गोहपारू थाना क्षेत्र के जंगल में मवेशी चराने गए सोनशाह यादव का शव लापता होने के अगले दिन बरामद हुआ। घटना के बाद आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग पर बाघ की मौजूदगी की जानकारी होने के बावजूद पर्याप्त चेतावनी और गश्त नहीं करने का आरोप लगाया है।
मवेशी चराने गया था सोनशाह यादव
जानकारी के अनुसार, सोनशाह यादव अपने एक साथी के साथ गांव के पास स्थित पठारी जंगल में मवेशी चराने गया था। इसी दौरान उसका साथी मवेशियों के साथ एक जगह रुक गया। कुछ समय बाद जंगल की ओर से बाघ की दहाड़ सुनाई दी। इससे घबराकर साथी गांव पहुंचा और ग्रामीणों को घटना की जानकारी दी।
इसके बाद सोनशाह के परिजन और ग्रामीण उसकी तलाश में जंगल की ओर निकले। वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची। अंधेरा और बाघ की मौजूदगी के कारण रात में तलाश के दौरान सफलता नहीं मिली। अगले दिन सुबह जंगल में सोनशाह का शव मिला। घटनास्थल के पास बाघ के पगमार्क भी पाए गए।
ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
घटना के बाद ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वन विभाग को क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी की जानकारी पहले से थी। इसके बावजूद गांव में पर्याप्त मुनादी नहीं कराई गई और प्रभावी गश्त भी नहीं की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते लोगों को सतर्क किया जाता तो हादसे को टाला जा सकता था। उन्होंने वन विभाग की निगरानी और लोगों को चेतावनी देने की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
हालांकि, ये ग्रामीणों की ओर से लगाए गए आरोप हैं। घटना के संबंध में वन विभाग का पक्ष भी सामने आया है।
वन विभाग का दावा—जंगल में जाने से रोका गया था
गोहपारू के रेंजर हेमंत प्रजापति के अनुसार, विभाग को क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी की जानकारी थी। उनका कहना है कि वन विभाग के कर्मचारियों ने सोनशाह को जंगल की ओर जाने से रोकने की कोशिश की थी।
वन विभाग की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, घटनास्थल पर बाघ के पगमार्क मिले हैं। विभाग ने ग्रामीणों से बाघ के विचरण वाले क्षेत्र में नहीं जाने की अपील की है।
पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद परिजनों को सौंप दिया। मृतक की पत्नी को 10 हजार रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है। शेष सहायता राशि देने की प्रक्रिया जारी बताई गई है।
हाथियों के बाद अब बाघ की मौजूदगी से बढ़ी चिंता
शहडोल जिले के कई इलाकों में पहले से जंगली हाथियों की आवाजाही के कारण ग्रामीणों की चिंता बनी हुई है। अब गोहपारू क्षेत्र में बाघ के हमले से हुई मौत ने जंगल के आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा का मुद्दा फिर सामने ला दिया है।
इस घटना के बाद वन विभाग के सामने बाघ की गतिविधियों पर निगरानी रखने, प्रभावित गांवों तक समय पर सूचना पहुंचाने और ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती है। ग्रामीणों के आरोपों और विभाग के पक्ष के बीच अब यह महत्वपूर्ण होगा कि क्षेत्र में निगरानी और चेतावनी व्यवस्था कितनी प्रभावी बनाई जाती है।




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