बैतूल जिला अस्पताल में फर्जी डॉक्टर बनकर ठगी, डिलीवरी के नाम पर हजारों रुपये वसूले; आरोपी गिरफ्तार

बैतूल जिला अस्पताल में फर्जी डॉक्टर बनकर ठगी, आरोपी गिरफ्तार
बैतूल। मध्यप्रदेश के बैतूल जिला अस्पताल में प्रसव और सीजर डिलीवरी के नाम पर मरीजों के परिजनों से ऑनलाइन ठगी का मामला सामने आया है। खुद को डॉक्टर बताकर बेहतर इलाज का भरोसा देने वाले आरोपी को कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह परिजनों को फोन करके ऑपरेशन अच्छी तरह कराने और भविष्य में परेशानी नहीं होने का भरोसा देता था। इसके बाद QR कोड भेजकर UPI के माध्यम से पैसे ट्रांसफर करवाता था।
पुलिस ने आरोपी की पहचान जितेंद्र खाकरे (30), निवासी ग्राम खापा, जिला बैतूल के रूप में की है। जांच के दौरान भोपाल और इंदौर में भी इसी तरह की धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं।
सीजर डिलीवरी के नाम पर मांगे 5 हजार रुपये
पुलिस के मुताबिक, 19 अक्टूबर 2026 को मंडई खुर्द निवासी विजय नागले ने अपनी पत्नी को प्रसव के लिए बैतूल जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। चिकित्सकीय जांच के बाद उन्हें सीजर डिलीवरी के लिए ऑपरेशन वार्ड ले जाया गया। इसी दौरान एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन करके खुद को डॉक्टर बताया और ऑपरेशन बेहतर तरीके से कराने का भरोसा दिया।
आरोप है कि व्यक्ति ने इसके बदले 5 हजार रुपये मांगे और भुगतान के लिए QR कोड भेजा। विजय नागले के पास कीपैड मोबाइल होने के कारण उनके भाई संजय नागले ने आरोपी से बातचीत की और उसके भेजे गए QR कोड पर 5 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।
इसी तरह अस्पताल में भर्ती एक अन्य महिला के परिजनों से भी बेहतर डिलीवरी कराने के नाम पर 5 हजार रुपये मांगे गए। इनमें से 3 हजार रुपये ऑनलाइन भेजे गए।
एक अन्य परिवार से भी की गई ठगी
पुलिस जांच में 14 अक्टूबर की एक अन्य घटना भी सामने आई। आरोप है कि कविता पिपरदे के परिजनों से सीजर डिलीवरी अच्छी तरह कराने के नाम पर 6 हजार रुपये मांगे गए थे, जिनमें से 3 हजार रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर किए गए।
इसके अलावा, एक अन्य मामले में बच्चे को हमीदिया अस्पताल, भोपाल रेफर किए जाने के दौरान इलाज के नाम पर 24 हजार रुपये की ठगी किए जाने की शिकायत भी सामने आई है। पुलिस इस मामले की अलग से जांच कर रही है।
अस्पताल में घूमकर मरीजों के परिजनों की पहचान करता था आरोपी
पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, आरोपी अस्पताल परिसर में घूमता था। वह कैंटीन, प्रसूति कक्ष और ऑपरेशन थिएटर के आसपास जाकर ऐसे परिवारों की पहचान करता था, जिनके मरीजों को सीजर डिलीवरी या बेहतर इलाज की जरूरत होती थी।
इसके बाद वह फोन पर संपर्क करके खुद को डॉक्टर बताता और इलाज में मदद करने का भरोसा देकर पैसे मांगता था। भुगतान के लिए QR कोड भेजा जाता था, जिससे रकम सीधे ऑनलाइन ट्रांसफर हो जाती थी।
पुलिस के मुताबिक, भुगतान से जुड़े विवरणों की जांच में कुछ रकम लुधियाना और नोएडा के बैंक खातों में जाने की जानकारी मिली है। आरोपी के पास से फोन करने में इस्तेमाल किया गया सिम कार्ड और ऑनलाइन बेटिंग से जुड़ी आईडी जब्त किए जाने की बात भी सामने आई है।
भोपाल और इंदौर में भी दर्ज हैं मामले
बैतूल पुलिस की जांच में आरोपी के खिलाफ भोपाल और इंदौर में भी इसी तरह की धोखाधड़ी के मामले दर्ज होने की जानकारी मिली है। पुलिस के अनुसार, इंदौर के संयोगितागंज थाने में वर्ष 2025 में ऑपरेशन और बेहतर इलाज के नाम पर पैसे लेने का मामला दर्ज हुआ था।
वहीं, भोपाल के कोहेफिजा थाने में वर्ष 2026 में खुद को हमीदिया अस्पताल का डॉक्टर बताकर इलाज के नाम पर ऑनलाइन रकम लेने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था।
इन मामलों में आरोपी की भूमिका और अन्य संभावित पीड़ितों के संबंध में पुलिस जांच कर रही है। आरोपी को 27 अक्टूबर 2026 को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया।
पुलिस ने अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों से की सतर्क रहने की अपील
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजन किसी अनजान व्यक्ति के फोन पर भरोसा करके इलाज या ऑपरेशन के नाम पर पैसे ट्रांसफर न करें। यदि कोई खुद को डॉक्टर या अस्पताल का कर्मचारी बताकर अतिरिक्त भुगतान मांगता है, तो पहले अस्पताल प्रबंधन या संबंधित चिकित्सक से इसकी पुष्टि करें।
किसी अनजान व्यक्ति की ओर से भेजे गए QR कोड पर बिना जांच के भुगतान करने से बचें। यदि ऑनलाइन ठगी होती है, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें और नजदीकी पुलिस थाने को भी सूचना दें।
फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस तरह की ठगी में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।




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