मानसून की विदाई के बाद भी मध्यप्रदेश में बारिश, नौ जिलों में बादल बरसने के आसार; भोपाल-इंदौर में निकलेगी धूप

एमपी में मानसून की विदाई के बाद भी बारिश, 9 जिलों में अलर्ट जैसे हालात

भोपाल। मध्यप्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई के बाद भी प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का दौर जारी है। पूर्वी मध्यप्रदेश में सक्रिय मौसमी परिस्थितियों के कारण बादलों की आवाजाही बनी हुई है। शुक्रवार, 9 अक्टूबर को प्रदेश के नौ जिलों में बारिश होने की संभावना जताई गई है, जबकि राजधानी भोपाल और इंदौर में मौसम मुख्य रूप से साफ रहने और धूप निकलने का अनुमान है।

मौसम में इस बदलाव के बीच प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में दिन और रात के तापमान का अंतर भी महसूस किया जा रहा है। दिन में तेज धूप के कारण गर्मी बनी हुई है, जबकि रात के समय अपेक्षाकृत ठंडक महसूस होने लगी है। मौसम के इस उतार-चढ़ाव के बीच पूर्वी जिलों में अगले कुछ दिनों तक बारिश की संभावना बनी रह सकती है।

इन नौ जिलों में बारिश के आसार

मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, शुक्रवार को पूर्वी मध्यप्रदेश के नौ जिलों में बारिश हो सकती है। इनमें पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, शहडोल और अनूपपुर शामिल हैं।

इन जिलों में स्थानीय मौसमी परिस्थितियों के कारण बादल छाने और बारिश होने की संभावना जताई गई है। पिछले कुछ दिनों से पूर्वी मध्यप्रदेश के कई इलाकों में आंधी और बारिश का असर देखने को मिला है। आगामी दिनों में भी मौसम पूरी तरह साफ होने से पहले कुछ क्षेत्रों में वर्षा हो सकती है।

हालांकि, बारिश की संभावना का मतलब यह नहीं है कि सभी नौ जिलों में एक समान वर्षा होगी। वास्तविक स्थिति स्थानीय मौसम और बादलों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी।

भोपाल और इंदौर में निकलेगी धूप

राजधानी भोपाल और इंदौर में शुक्रवार को बारिश की तुलना में धूप निकलने की संभावना अधिक बताई गई है। पश्चिमी मध्यप्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम अपेक्षाकृत साफ रहने का अनुमान है।

दिन में धूप रहने से तापमान में गर्मी महसूस हो सकती है, जबकि शाम और रात के समय मौसम कुछ ठंडा रह सकता है। अक्टूबर के दौरान प्रदेश में इस तरह का मिला-जुला मौसम सामान्य तौर पर देखने को मिलता है।

भोपाल और इंदौर सहित पश्चिमी मध्यप्रदेश के लोगों को फिलहाल मौसम में अचानक बड़े बदलाव के बजाय धूप और तापमान में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ सकता है। मौसम संबंधी किसी नए अलर्ट या स्थानीय चेतावनी के लिए भारत मौसम विज्ञान विभाग की ताजा जानकारी पर नजर रखना जरूरी है।

3 अक्टूबर को मध्यप्रदेश से विदा हो चुका है मानसून

मध्यप्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर 2026 को पूरी तरह विदा हो गया था। इसके बावजूद प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में बारिश जारी है। इसकी वजह मानसून की सामान्य बारिश व्यवस्था के समाप्त होने के बाद भी स्थानीय मौसमी प्रणालियों का सक्रिय रहना है।

मौसम संबंधी रिपोर्ट के अनुसार, चक्रवाती परिसंचरण और ट्रफ के प्रभाव से पूर्वी मध्यप्रदेश में बादल बन रहे हैं। इसी कारण मानसून की विदाई के बाद भी कुछ जिलों में बारिश की स्थिति बनी हुई है।

मानसून की विदाई का अर्थ यह नहीं होता कि इसके बाद बारिश बिल्कुल बंद हो जाएगी। अक्टूबर में स्थानीय मौसमी प्रणालियों के कारण कुछ क्षेत्रों में वर्षा हो सकती है। हालांकि, इस अवधि में बारिश का वितरण मानसून के सक्रिय महीनों की तुलना में अलग रहता है।

11 अक्टूबर तक पूर्वी जिलों में बारिश की संभावना

मौसम पूर्वानुमान के मुताबिक, पूर्वी मध्यप्रदेश के कुछ हिस्सों में 11 अक्टूबर तक बारिश की गतिविधियां जारी रह सकती हैं। इसके बाद 12 अक्टूबर से प्रदेश में मौसम के साफ होने का अनुमान जताया गया है।

इस दौरान पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, शहडोल और अनूपपुर सहित पूर्वी हिस्से के जिलों में मौसम पर नजर रखने की जरूरत होगी। बारिश की तीव्रता और समय में स्थानीय स्तर पर अंतर हो सकता है।

दूसरी ओर, पश्चिमी मध्यप्रदेश में धूप और शुष्क मौसम का प्रभाव अधिक रहने की संभावना है। मौसम साफ होने के साथ दिन में गर्मी और रात में हल्की ठंडक का अंतर आगे भी महसूस किया जा सकता है।

इस मानसून सीजन में सामान्य से चार प्रतिशत कम बारिश

मध्यप्रदेश में इस वर्ष मानसून के दौरान कुल बारिश सामान्य आंकड़े से लगभग चार प्रतिशत कम दर्ज की गई। मौसम संबंधी रिपोर्ट के अनुसार, पूरे सीजन में करीब 35.8 इंच बारिश हुई।

इस बार मानसून 24 जून को प्रदेश पहुंचा था और 3 अक्टूबर को विदा हुआ। जून में बारिश की कमी ने पूरे सीजन के आंकड़े को प्रभावित किया। बाद के महीनों में बारिश होने के बावजूद शुरुआती कमी पूरी तरह दूर नहीं हो सकी।

जुलाई, अगस्त और सितंबर के दौरान हुई बारिश से स्थिति में सुधार हुआ, लेकिन पूरे सीजन का कुल आंकड़ा सामान्य से थोड़ा नीचे रहा। अलग-अलग जिलों में बारिश का वितरण भी एक जैसा नहीं रहा। कुछ जिलों में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई, जबकि कई जिले अपने सामान्य आंकड़े से पीछे रह गए।

25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा, 30 जिले पीछे

मानसून सीजन के दौरान प्रदेश के 25 जिलों में सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा हो गया था। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।

इसके विपरीत, 30 जिले ऐसे रहे जहां मानसून के दौरान सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई। इनमें इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सीहोर, रायसेन, विदिशा, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, धार, झाबुआ, आलीराजपुर और अन्य जिले शामिल हैं।

इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि प्रदेश में बारिश का वितरण असमान रहा। कुछ क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा हुई, जबकि कई जिलों में कमी बनी रही। यही वजह है कि मानसून की विदाई के बाद होने वाली बारिश पर भी उन इलाकों में नजर रखी जा रही है, जहां वर्षा सामान्य से कम रही।

किसानों और आम लोगों को मौसम पर रखनी होगी नजर

अक्टूबर में होने वाली बारिश का असर स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। किसानों को फसल की स्थिति, कटाई और खेतों में चल रहे कार्यों को ध्यान में रखते हुए मौसम पूर्वानुमान देखना चाहिए। बारिश की संभावना के आधार पर ही खेती से जुड़े बड़े फैसले लेने के बजाय स्थानीय कृषि सलाह और मौसम विभाग की जानकारी को प्राथमिकता देना बेहतर है।

आम लोगों के लिए भी बदलते मौसम के बीच दिन और रात के तापमान पर ध्यान देना जरूरी है। दिन में तेज धूप और रात में ठंडक के कारण मौसम का अनुभव अलग हो सकता है।

फिलहाल मध्यप्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी पूर्वी जिलों में बारिश की संभावना बनी हुई है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, 11 अक्टूबर तक कुछ इलाकों में वर्षा हो सकती है, जबकि 12 अक्टूबर से मौसम साफ होने की उम्मीद है।

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