MP में 34.25 लाख मतदाता कम होने पर सियासत तेज, कांग्रेस करेगी निर्वाचन सदन का घेराव
भोपाल। मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। प्रदेश कांग्रेस ने अंतिम मतदाता सूची में SIR से पहले की तुलना में 34 लाख 25 हजार 78 नाम कम होने को लेकर निर्वाचन आयोग से विस्तृत जानकारी मांगी है। कांग्रेस ने सोमवार को भोपाल स्थित निर्वाचन सदन के घेराव का भी ऐलान किया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मांग की है कि मतदाता सूची से बाहर हुए नामों का विधानसभा, जिला और कारणवार विवरण सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात भी कही है।
ड्राफ्ट सूची में 42.74 लाख नाम थे बाहर
रिपोर्ट के अनुसार SIR प्रक्रिया शुरू होने से पहले मध्य प्रदेश में 5 करोड़ 74 लाख 6 हजार 143 मतदाता दर्ज थे। पुनरीक्षण के दौरान 5 करोड़ 31 लाख 31 हजार 983 गणना प्रपत्र प्राप्त हुए और उनका डिजिटलीकरण किया गया।
दिसंबर 2025 में जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में पहले की सूची के मुकाबले 42 लाख 74 हजार 160 नाम बाहर थे। इनमें करीब 31.51 लाख को स्थानांतरित या अनुपस्थित, 8.46 लाख को मृत और 2.77 लाख को एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत बताया गया था। ये ड्राफ्ट चरण के आंकड़े थे, अंतिम सूची के नहीं।
अंतिम सूची में दर्ज हुए 5.39 करोड़ मतदाता
दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद आंकड़ों में बदलाव हुआ। 21 फरवरी 2026 को जारी अंतिम मतदाता सूची में प्रदेश में 5 करोड़ 39 लाख 81 हजार 65 मतदाता दर्ज हुए।
कांग्रेस के मुताबिक SIR से पहले की संख्या की तुलना में अंतिम सूची में 34 लाख 25 हजार 78 मतदाता कम रहे। वहीं ड्राफ्ट सूची के मुकाबले अंतिम सूची में 8 लाख 49 हजार 82 मतदाताओं की शुद्ध बढ़ोतरी हुई।
कांग्रेस ने मांगा नाम हटाने का पूरा ब्योरा
जीतू पटवारी ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि अंतिम सूची में कम हुए 34.25 लाख मतदाताओं का विधानसभा और जिला स्तर पर कारणवार विवरण जारी किया जाए।
कांग्रेस यह जानकारी भी मांग रही है कि ड्राफ्ट सूची में बाहर हुए 42.74 लाख नामों में से दावे-आपत्तियों के बाद कितने नाम वापस शामिल किए गए और नाम बहाली के कितने आवेदन स्वीकार या अस्वीकार हुए।
7.17 लाख लोगों ने नाम जोड़ने के लिए किया आवेदन
कांग्रेस की ओर से प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक दावे और आपत्तियों की अवधि में करीब 7.17 लाख लोगों ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया, जबकि करीब 83 हजार आपत्तियां नाम हटाने से संबंधित थीं।
पटवारी ने सवाल उठाया कि नाम जोड़ने के लिए प्राप्त आवेदनों में से कितने स्वीकार हुए और कितने खारिज किए गए। पार्टी ने इस प्रक्रिया का विस्तृत डेटा सार्वजनिक करने की मांग की है।
चुनाव आयोग के भीतर आपत्तियों का भी उठाया मुद्दा
पटवारी ने एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले दस महीनों में कम से कम 14 लिखित आपत्तियां या सुझाव दर्ज किए थे। इनमें नए मतदाताओं का पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने तथा चुनावी आईटी सिस्टम से जुड़े विषय शामिल बताए गए।
रिपोर्ट के मुताबिक आयोग ने इन नोट्स के अस्तित्व और तारीखों पर विवाद नहीं किया, लेकिन उन्हें सुझाव बताते हुए कहा कि पिछले एक वर्ष में फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
Form-6 में SIR से जुड़े सवाल पर कांग्रेस ने मांगा जवाब
कांग्रेस ने नए मतदाता के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form-6 में SIR से संबंधित जानकारी मांगे जाने को लेकर भी सवाल उठाया है। पटवारी ने पूछा कि यदि इस बदलाव पर आयोग के भीतर आपत्ति थी तो इसे किस प्रक्रिया के तहत लागू किया गया।
कांग्रेस ने मतदाता सूची से जुड़े डिजिटल सिस्टम में निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी और बूथ लेवल अधिकारी की भूमिका के साथ डिजिटल रिकॉर्ड का ऑडिट ट्रेल भी सार्वजनिक करने की मांग की है।
सोमवार को निर्वाचन सदन का घेराव
कांग्रेस ने घोषणा की है कि सोमवार को भोपाल में निर्वाचन सदन का घेराव किया जाएगा। इसके बाद प्रदेश के जिलों में जिला निर्वाचन अधिकारियों के कार्यालयों पर भी प्रदर्शन करने की योजना है।
पटवारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और कार्रवाई की मांग भी दोहराई है। ये कांग्रेस और पटवारी की राजनीतिक मांगें और आरोप हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।





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