MP शराब ठेका विवाद: 2.75 करोड़ की FDR और कथित रिश्वत पर कांग्रेस के सवाल
भोपाल। मध्य प्रदेश में शराब दुकानों के ठेकों से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। प्रदेश कांग्रेस ने 2.75 करोड़ रुपये से अधिक की ई-एफडीआर, 76 लाख रुपये की सिक्योरिटी और एक करोड़ रुपये की कथित रिश्वत के आरोपों को लेकर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की है।
एफडीआर और सिक्योरिटी जमा करने पर सवाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर एक मीडिया रिपोर्ट साझा करते हुए शराब ठेकों की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर सात सवाल उठाए। रिपोर्ट के मुताबिक, मामला भोपाल की दो शराब दुकानों के ठेकों और उनके हस्तांतरण से जुड़ा है।
विवाद का प्रमुख बिंदु 2 करोड़ 75 लाख 53 हजार 535 रुपये की ई-एफडीआर है। आरोप है कि एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने इस एफडीआर को जारी करने से इनकार किया था। इसी आधार पर सवाल उठाया गया कि यदि बैंक ने एफडीआर जारी नहीं की, तो उसे ठेके की प्रक्रिया में स्वीकार कैसे किया गया।
कांग्रेस ने यह भी पूछा कि निर्धारित समय से 22 दिन की देरी से जमा की गई सिक्योरिटी को मंजूरी क्यों दी गई। इसके अलावा, बैंक गारंटी के बिना 76 लाख रुपये की सिक्योरिटी स्वीकार किए जाने के मामले में भी जवाबदेही तय करने की मांग की गई है।
एक करोड़ रुपये की कथित रिश्वत का आरोप
शराब ठेकों को हासिल करने के लिए एक करोड़ रुपये की कथित रिश्वत दिए जाने का आरोप भी इस विवाद का हिस्सा है। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि यदि इस मामले में अनियमितताएं हुई हैं, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।
पार्टी ने कथित वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच करने और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस महासचिव एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश ने भी जीतू पटवारी की पोस्ट साझा करते हुए प्रधानमंत्री से मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग की।
सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग
कांग्रेस ने मुख्यमंत्री की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय से भी जवाब मांगा है। पार्टी का कहना है कि शराब ठेकों से संबंधित सभी दस्तावेजों, एफडीआर, सिक्योरिटी जमा करने की प्रक्रिया और कथित वित्तीय लेन-देन की जांच होनी चाहिए।
अमर उजाला की 14 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, इन आरोपों पर भाजपा और मध्य प्रदेश सरकार की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। मामले में लगाए गए रिश्वत संबंधी आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।











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