भोपाल में पंचायत कर्मचारियों का भूख हड़ताल आंदोलन, न्यूनतम वेतन और सेवा सुरक्षा समेत कई मांगें

भोपाल। ग्राम पंचायतों में काम करने वाले चौकीदार, सफाईकर्मी, पंप ऑपरेटर और अन्य अंशकालीन कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर राजधानी भोपाल में आंदोलन शुरू कर दिया है। कर्मचारियों ने बोर्ड ऑफिस चौराहे पर भूख हड़ताल शुरू की है। इससे पहले वे भाजपा कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे थे, जहां से पुलिस ने उन्हें हटाया।

आंदोलनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से पंचायतों और अलग-अलग सरकारी विभागों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा और तय न्यूनतम वेतन जैसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

भाजपा कार्यालय से बोर्ड ऑफिस चौराहे तक पहुंचा आंदोलन

कर्मचारियों का दो दिवसीय आंदोलन सोमवार से शुरू हुआ। शुरुआत में बड़ी संख्या में कर्मचारी भाजपा कार्यालय के बाहर एकत्र हुए और अपनी मांगों को लेकर धरना दिया।

पुलिस द्वारा वहां से हटाए जाने के बाद प्रदर्शनकारी बोर्ड ऑफिस चौराहे पर पहुंचे। इसके बाद उन्होंने वहीं उपवास और भूख हड़ताल शुरू कर दी।

चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग

आंदोलन कर रहे कर्मचारियों की प्रमुख मांग है कि ग्राम पंचायतों में लंबे समय से काम कर रहे चौकीदार, भृत्य, सफाईकर्मी और पंप ऑपरेटरों को शासकीय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।

कर्मचारियों का कहना है कि वे पंचायतों में सुरक्षा, साफ-सफाई, पेयजल व्यवस्था और रोजमर्रा के कई जरूरी कार्य संभालते हैं। इसके बावजूद उनकी सेवा शर्तें स्पष्ट नहीं हैं और रोजगार की स्थिरता भी नहीं है।

कई कर्मचारियों को बेहद कम मानदेय मिलने का दावा

कर्मचारी नेता वासुदेव शर्मा ने दावा किया कि कुछ पंचायत कर्मचारियों को हर महीने केवल 2 से 4 हजार रुपये तक मानदेय मिल रहा है। उनके मुताबिक इतनी कम राशि में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता है।

आंदोलनकारियों ने न्यूनतम वेतन लागू करने के साथ पिछले वर्षों का बकाया एरियर भी देने की मांग उठाई है।

PF, ESI और पेंशन जैसी सुविधाएं भी मांगीं

वेतन के अलावा कर्मचारियों ने सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाओं की भी मांग की है। इनमें PF, ESI, चिकित्सा सुविधा, पेंशन या बीमा, वार्षिक वेतन वृद्धि और लंबित भुगतान शामिल हैं।

कर्मचारियों का कहना है कि वर्षों तक काम करने के बावजूद उन्हें इन सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

अलग-अलग विभागों के कर्मचारी भी आंदोलन में शामिल

यह आंदोलन सिर्फ पंचायत कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। इसमें स्कूलों और छात्रावासों में काम करने वाले अंशकालीन कर्मचारी, लोकल यूथ सर्वेयर, पेसा मोबिलाइजर, कोटवार, मध्याह्न भोजन कार्यकर्ता, मनरेगा मेट और योग सहायक सहित विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारी भी शामिल बताए गए हैं।

आंदोलनकारियों के अनुसार कई श्रेणियों में कर्मचारियों को कुछ हजार रुपये का ही मासिक मानदेय मिलता है, जबकि उनसे नियमित रूप से लंबे समय तक काम लिया जाता है।

सेवा सुरक्षा को लेकर भी नाराजगी

कर्मचारियों का कहना है कि कम मानदेय के साथ उनकी सबसे बड़ी चिंता नौकरी की सुरक्षा को लेकर है। लंबे समय से काम करने के बावजूद उन्हें स्थायी व्यवस्था का लाभ नहीं मिल रहा है।

उनकी मांग है कि सरकार उनकी सेवा शर्तों को स्पष्ट करे और वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों के लिए रोजगार की स्थिर व्यवस्था बनाए।

सरकार तक मांग पहुंचाने की कोशिश

आंदोलनकारी कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को पत्र भी भेज चुके हैं। पत्र में अस्थायी और आउटसोर्स व्यवस्था के बढ़ने तथा स्थायी रोजगार के अवसर कम होने का मुद्दा उठाया गया है।

कर्मचारियों ने कहा है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक बोर्ड ऑफिस चौराहे पर आंदोलन जारी रखा जाएगा।

आगे बढ़ सकता है आंदोलन

दो दिवसीय आंदोलन और भूख हड़ताल के जरिए कर्मचारी सरकार का ध्यान अपनी समस्याओं की ओर आकर्षित करना चाहते हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन और सरकार की ओर से इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया आती है।

फिलहाल बोर्ड ऑफिस चौराहे पर कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी है और उनकी प्रमुख मांगें न्यूनतम वेतन, सेवा सुरक्षा तथा सरकारी कर्मचारी का दर्जा हैं।

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