अशोकनगर में नवजात बच्ची की हत्या का खुलासा, मां ने गला दबाने की बात कबूली
अशोकनगर। मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिला अस्पताल में एक दिन की नवजात बच्ची की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस के अनुसार नवजात बच्ची की मौत सामान्य कारणों से नहीं हुई थी, बल्कि उसका गला दबाया गया था। जांच के दौरान बच्ची की मां भावना विश्वकर्मा ने पुलिस पूछताछ में बच्ची का गला दबाने की बात स्वीकार की है।
पुलिस के मुताबिक, महिला दूसरी संतान के रूप में बेटे की उम्मीद कर रही थी। बेटी पैदा होने के बाद वह परेशान थी और उसे परिवार की ओर से तानों का डर भी था। इसी मानसिक दबाव और परिस्थितियों के बीच उसने अपनी एक दिन की नवजात बेटी की हत्या कर दी। घटना अस्पताल के ही बिस्तर पर हुई थी। पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पूछताछ और अस्पताल में उपलब्ध CCTV फुटेज समेत अन्य तथ्यों को जांच में शामिल किया है।
रात करीब 11 बजे हुआ था बच्ची का जन्म
पुलिस के अनुसार चंदेरी क्षेत्र के सकर्रा गांव निवासी भावना पत्नी केदार विश्वकर्मा ने शुक्रवार और शनिवार की दरमियानी रात करीब 11 बजे अशोकनगर जिला अस्पताल में बच्ची को जन्म दिया था।
जन्म के बाद नवजात को अस्पताल में निगरानी के लिए रखा गया था। अगले दिन अस्पताल के बिस्तर पर ही बच्ची की मौत हो गई। शुरुआत में मामला संदिग्ध नजर आया, क्योंकि बच्ची के गले पर दबाव के निशान दिखाई दे रहे थे और उसके मुंह से खून भी निकल रहा था।
घटना की जानकारी मिलने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दी और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
पोस्टमार्टम में गला दबाने से मौत की पुष्टि
नवजात की मौत की परिस्थितियां संदिग्ध होने के कारण पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची की मौत गला दबाने के कारण होने की पुष्टि हुई।
रिपोर्ट सामने आने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बच्ची के माता-पिता, दादी और परिवार के अन्य सदस्यों से पूछताछ शुरू की। चूंकि महिला की डिलीवरी को कुछ ही समय हुआ था, इसलिए पुलिस ने उससे सामान्य तरीके से पूछताछ की और घटना से जुड़े तथ्यों को समझने का प्रयास किया।
मां ने पूछताछ में स्वीकार की वारदात
पुलिस के अनुसार पूछताछ के दौरान बच्ची की मां भावना विश्वकर्मा ने नवजात का गला दबाने की बात स्वीकार की।
पुलिस के मुताबिक महिला ने बताया कि उसकी पहले से करीब दो वर्ष की एक बेटी है। दूसरी डिलीवरी में उसे बेटे की उम्मीद थी, लेकिन दोबारा बेटी होने के बाद वह परेशान हो गई थी।
महिला ने पुलिस को यह भी बताया कि उसे दोनों बच्चों की जिम्मेदारी को लेकर चिंता थी और परिवार की ओर से ताने मिलने का डर था। पुलिस का कहना है कि इन्हीं परिस्थितियों के बीच उसने बच्ची की हत्या करने का फैसला किया।
बच्ची को दो से तीन मिनट तक दबाए रखा गला
पुलिस के अनुसार पूछताछ में सामने आया कि घटना के समय नवजात बच्ची अपनी मां के पास कंबल में सो रही थी। महिला की सास भी उसी समय अस्पताल के बिस्तर पर सो रही थी।
पुलिस के मुताबिक महिला ने बच्ची का गला करीब दो से तीन मिनट तक हाथ से दबाए रखा। जब उसे लगा कि बच्ची की मौत हो गई है, तब उसने गला छोड़ दिया।
इसके करीब आधे घंटे बाद बच्ची के मुंह से खून निकलता दिखाई दिया। इसके बाद महिला ने अपनी सास को इसकी जानकारी दी। सास बच्ची को लेकर डॉक्टर के पास पहुंची, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
पहले संदिग्ध मौत मानकर शुरू हुई थी जांच
घटना सामने आने के शुरुआती दौर में पुलिस के सामने यह स्पष्ट नहीं था कि नवजात की मौत कैसे हुई। बच्ची के गले पर निशान और मुंह से खून निकलने की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने हत्या की आशंका से जांच शुरू की थी।
उस समय पुलिस ने मां, दादी और अस्पताल में मौजूद अन्य लोगों से पूछताछ की थी। पुलिस यह पता लगाने में जुटी थी कि घटना के समय बच्ची के पास कौन मौजूद था और अस्पताल के वार्ड में किसी बाहरी व्यक्ति की आवाजाही हुई थी या नहीं।
बाद में पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पूछताछ से जांच को दिशा मिली।
अस्पताल में CCTV भी बना जांच की चुनौती
मामले की जांच में अस्पताल के CCTV कैमरों की फुटेज भी खंगाली गई। हालांकि, जिस स्थान पर महिला अपनी नवजात बच्ची के साथ मौजूद थी, वहां सीधे CCTV कैमरा नहीं लगा था।
ऐसे में पुलिस ने अस्पताल के अन्य हिस्सों और आसपास लगे कैमरों की फुटेज की जांच की, ताकि यह पता लगाया जा सके कि घटना के समय कौन-कौन लोग वहां मौजूद थे और उनकी आवाजाही कैसी रही।
CCTV फुटेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पूछताछ में सामने आए तथ्यों को पुलिस ने जांच के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में इस्तेमाल किया।
दूसरी बार भी बेटी होने से परेशान थी महिला
पुलिस की पूछताछ के मुताबिक भावना की पहले से एक बेटी है। दूसरी डिलीवरी में उसे बेटे की उम्मीद थी। लेकिन दूसरी संतान के रूप में भी बेटी पैदा होने के बाद वह परेशान हो गई।
पुलिस के अनुसार महिला ने परिवार और सामाजिक दबाव को लेकर भी चिंता जताई। दोनों बच्चों की जिम्मेदारी और परिवार की ओर से ताने मिलने की आशंका उसके लिए परेशानी का कारण बनी हुई थी।
यह पहलू इस मामले को केवल एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रखता, बल्कि समाज में बेटे को प्राथमिकता देने वाली मानसिकता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
परिवार और समाज के लिए गंभीर सवाल
नवजात बच्ची की हत्या का यह मामला बेटा-बेटी के बीच भेदभाव की उस मानसिकता की ओर भी ध्यान खींचता है, जिसमें बेटी के जन्म को लेकर परिवारों पर सामाजिक दबाव देखने को मिलता है।
हालांकि, पुलिस जांच में सामने आए आरोपी के कथन को ही घटना का अंतिम सामाजिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। मामले में कानून के तहत आगे की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया होगी।
बच्ची की मौत के मामले में पुलिस ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई है और आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
पुलिस जांच के बाद सामने आया पूरा घटनाक्रम
अशोकनगर जिला अस्पताल में हुई इस घटना ने शुरुआत में अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े किए थे। नवजात की संदिग्ध मौत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत का कारण स्पष्ट हुआ।
इसके बाद परिवार के सदस्यों से पूछताछ की गई। पुलिस के अनुसार पूछताछ में बच्ची की मां ने घटना में अपनी भूमिका स्वीकार की। पुलिस ने अस्पताल के CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों को भी जांच में शामिल किया।
अब मामले में पुलिस की आगे की कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। नवजात बच्ची की मौत ने एक ओर जहां परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है, वहीं यह घटना समाज में बेटा-बेटी को लेकर मौजूद सोच पर भी गंभीर सवाल छोड़ गई है।












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