टीकमगढ़ जिला अस्पताल के नाम से फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी होने का मामला, डाटा ऑपरेटर की सेवा समाप्त

टीकमगढ़ जिला अस्पताल के नाम से फर्जी जन्म प्रमाण पत्र, डाटा ऑपरेटर की सेवा समाप्त

टीकमगढ़। मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिला अस्पताल के नाम से एक नवजात का कथित तौर पर गलत जन्म प्रमाण पत्र जारी किए जाने का मामला सामने आया है। प्रारंभिक जांच के बाद जिला प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए अस्पताल में पदस्थ डाटा एंट्री ऑपरेटर की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। वहीं, जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में नोडल अधिकारी की भूमिका की भी जांच के निर्देश दिए गए हैं।

निजी अस्पताल में हुआ था बच्चे का जन्म

मामला खरगापुर निवासी काजल नायक से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्हें 8 अगस्त को प्रसव के लिए खरगापुर स्थित निजी जीवन हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था, जहां बच्चे का जन्म हुआ। इसके बाद 11 अगस्त को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

हालांकि, दो दिन बाद यानी 13 अगस्त को नवजात का जन्म प्रमाण पत्र जारी किया गया, जिसमें जन्म स्थान के तौर पर जिला अस्पताल, टीकमगढ़ दर्ज था।

आशा कार्यकर्ता की पड़ताल में सामने आया मामला

मामले का पता उस समय चला जब संबंधित आशा कार्यकर्ता नवजात के जन्म से जुड़ी जानकारी की एंट्री कराने जिला अस्पताल पहुंचीं। अस्पताल के रिकॉर्ड में बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र पहले से जारी पाया गया।

जब जन्म स्थान की जानकारी की वास्तविकता से मिलान किया गया तो दोनों में अंतर सामने आया। इसके बाद मामला अधिकारियों के संज्ञान में पहुंचा और जांच शुरू की गई।

कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश

मामले की गंभीरता को देखते हुए टीकमगढ़ कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने जांच के निर्देश दिए। प्रशासनिक जांच की जिम्मेदारी एसडीएम संस्कृति लिटोरिया को सौंपी गई है।

जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि जन्म प्रमाण पत्र किस प्रक्रिया के तहत तैयार किया गया, रिकॉर्ड में बच्चे का जन्म स्थान जिला अस्पताल कैसे दर्ज हुआ और प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही।

डाटा एंट्री ऑपरेटर की सेवाएं समाप्त

प्रारंभिक जांच के आधार पर जिला अस्पताल में आउटसोर्स व्यवस्था के तहत कार्यरत डाटा एंट्री ऑपरेटर के खिलाफ कार्रवाई की गई है। प्रशासन ने उसकी सेवाएं समाप्त करने का निर्णय लिया है।

वहीं, जन्म प्रमाण पत्र शाखा के नोडल अधिकारी की भूमिका को लेकर भी जांच जारी है। प्रशासन के अनुसार, जांच में यदि अन्य लोगों की जिम्मेदारी सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया पर भी सवाल

इस मामले के सामने आने के बाद जिला अस्पताल में जन्म प्रमाण पत्र जारी करने और रिकॉर्ड दर्ज करने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मध्य प्रदेश सरकार के नियमों के अनुसार जन्म का पंजीकरण सामान्यतः जन्म होने वाले स्थान के आधार पर किया जाता है।

फिलहाल प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि रिकॉर्ड में गलत जानकारी कैसे दर्ज हुई और इस प्रक्रिया में किस स्तर पर लापरवाही हुई।

नोट: यह खबर उपलब्ध प्रारंभिक प्रशासनिक जानकारी पर आधारित है। जांच पूरी होने के बाद मामले में नए तथ्य सामने आने पर खबर को अपडेट किया जा सकता है।

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