उज्जैन का गयाकोठा तीर्थ बदहाल, 7 साल बाद भी अधूरा विकास कार्य; पितृपक्ष में श्रद्धालुओं की बढ़ेगी परेशानी

उज्जैन का गयाकोठा तीर्थ बदहाल, 7 साल बाद भी अधूरा विकास कार्य; पितृपक्ष में श्रद्धालु परेशान

उज्जैन। पितृपक्ष के दौरान देश-विदेश से श्रद्धालु तर्पण और पिंडदान के लिए उज्जैन पहुंचते हैं, लेकिन मंगलनाथ मार्ग स्थित प्रसिद्ध गयाकोठा तीर्थ पर अधूरे विकास कार्य और अव्यवस्थाएं श्रद्धालुओं के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। वर्ष 2018 में शुरू हुई विकास योजना को सात साल से अधिक समय बीतने के बाद भी कई प्रमुख काम पूरे नहीं हो पाए हैं।

₹10.63 करोड़ की योजना, फिर भी काम अधूरा

गयाकोठा तीर्थ के विकास और कायाकल्प के लिए वर्ष 2018 में धर्मस्व विभाग ने करीब ₹10.63 करोड़ की योजना मंजूर की थी। शुरुआती चरण में शासन से लगभग ₹4 करोड़ की राशि मिलने के बाद घाट और कुछ बुनियादी सुविधाओं से जुड़े काम किए गए। बाद में शेष राशि नहीं मिलने के कारण निर्माण कार्य रुक गया।

अब अधूरे काम को पूरा करने के लिए शासन की ओर से करीब ₹6.7 करोड़ का अतिरिक्त बजट स्वीकृत किए जाने की जानकारी सामने आई है।

बारिश में कीचड़ और दलदल की स्थिति

तीर्थ परिसर में फ्लोरिंग का काम पूरा नहीं होने से बारिश के दौरान कई हिस्सों में कीचड़ और दलदल की स्थिति बन रही है। मुख्य प्रवेश द्वार, कुंड, छतरी और बाउंड्री वॉल समेत कई कार्य भी अधूरे बताए जा रहे हैं।

कुंड और तालाब में काई जमा होने तथा पानी से दुर्गंध आने की शिकायत भी सामने आई है। परिसर के आसपास झाड़ियां उगी हुई हैं, जबकि पिंडदान हॉल में लगी कुछ टाइल्स और पत्थरों के खराब होने की बात भी रिपोर्ट में कही गई है।

पितृपक्ष में पहुंचते हैं बड़ी संख्या में श्रद्धालु

गयाकोठा तीर्थ का धार्मिक महत्व काफी पुराना माना जाता है। पितृपक्ष के दौरान यहां श्रद्धालु अपने पूर्वजों के लिए तर्पण और पिंडदान करने पहुंचते हैं। ऐसे में बुनियादी सुविधाओं और साफ-सफाई की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

गयाकोठा से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं का उल्लेख स्कंद पुराण के अवंतिका खंड में भी मिलता है। यहां विष्णुपद और सप्तऋषि मंदिर सहित धार्मिक महत्व वाले अन्य स्थल मौजूद हैं।

नगर निगम ने सफाई व्यवस्था सुधारने का दावा किया

श्राद्ध पक्ष को देखते हुए नगर निगम प्रशासन ने सफाई व्यवस्था बेहतर करने का दावा किया है। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार मौके पर सीमित संख्या में ही कर्मचारी सफाई कार्य में लगे दिखाई दिए। ऐसे में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच व्यवस्था को लेकर चुनौतियां बनी हुई हैं।

श्रद्धालुओं को सुविधाओं का इंतजार

गयाकोठा तीर्थ के विकास के लिए करोड़ों रुपये की योजना और अतिरिक्त बजट के बावजूद निर्माण कार्य पूरी तरह पूरा नहीं होने से स्थानीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं। अब श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर है कि अधूरे कार्य कब पूरे होते हैं और तीर्थ स्थल पर आवश्यक सुविधाएं कब व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराई जाती हैं।

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