MP News: दिन में सौर ऊर्जा से बिजली, रात में ग्रिड का वोल्टेज संभालेंगे सोलर प्लांट; तकनीक देखने भोपाल पहुंचा ओडिशा का दल

MP News: रात में भी ग्रिड वोल्टेज संभालेंगे सोलर प्लांट
भोपाल: मध्य प्रदेश में सौर ऊर्जा संयंत्रों की मदद से बिजली ग्रिड का वोल्टेज रात में भी नियंत्रित करने की तकनीक विकसित की जा रही है। इस तकनीक का अध्ययन करने के लिए ओडिशा सरकार का 16 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भोपाल पहुंचा है। यह दल भोपाल के मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MANIT) और विदिशा जिले के शामशाबाद में स्थापित सौर ऊर्जा परियोजनाओं का तकनीकी निरीक्षण करेगा।
प्रतिनिधिमंडल 27 और 28 अक्टूबर को इन परियोजनाओं का अध्ययन करेगा। इसका उद्देश्य सौर संयंत्रों से बिजली उत्पादन के साथ-साथ बिजली ग्रिड की स्थिरता और आपूर्ति की गुणवत्ता बेहतर बनाने के तरीकों को समझना है।
रात में भी वोल्टेज नियंत्रित करने में मदद करेंगे इन्वर्टर
आमतौर पर सूर्यास्त के बाद सौर ऊर्जा संयंत्र बिजली उत्पादन बंद कर देते हैं। लेकिन उपयुक्त इन्वर्टर, प्लांट कंट्रोलर और सहायक विद्युत व्यवस्था की मदद से इन संयंत्रों का इस्तेमाल रात में भी ग्रिड के वोल्टेज प्रबंधन के लिए किया जा सकता है।
इस तकनीक में इन्वर्टर जरूरत के अनुसार ग्रिड में प्रतिक्रियाशील विद्युत शक्ति भेजने या उससे अवशोषित करने में मदद करते हैं। इससे वोल्टेज में होने वाले उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में सहायता मिल सकती है।
यह व्यवस्था खास तौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोगी हो सकती है, जहां लंबी बिजली लाइनों, सौर ऊर्जा के अधिक उत्पादन और मांग में बदलाव के कारण वोल्टेज की समस्या पैदा होती है।
भोपाल और विदिशा की परियोजनाओं का होगा निरीक्षण
ओडिशा का प्रतिनिधिमंडल भोपाल स्थित MANIT में स्थापित 230 किलोवाट क्षमता के रूफटॉप सौर संयंत्र का अध्ययन करेगा। यहां गतिशील वोल्टेज नियंत्रण और वोल्टेज-वीएआर संचालन का प्रदर्शन किया जाएगा।
इसके बाद दल विदिशा जिले के शामशाबाद स्थित 2 मेगावाट क्षमता वाले पायलट सौर संयंत्र का निरीक्षण करेगा। यहां प्लांट कंट्रोलर आधारित वोल्टेज प्रबंधन, दूरस्थ निगरानी और रात में प्रतिक्रियाशील विद्युत शक्ति सहायता की व्यवस्था को समझा जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के साथ भी चर्चा करेगा। इसमें तकनीक के नियामकीय प्रावधानों और दूसरे राज्यों में इसे लागू करने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा।
नियामक आयोग ने वोल्टेज सहायता सेवाओं के लिए बनाया ढांचा
मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने 15 जुलाई 2026 के आदेश के जरिए विकेंद्रीकृत सौर परियोजनाओं से वोल्टेज सहायता सेवाएं लेने के लिए नियामकीय व्यवस्था को मंजूरी दी थी।
निर्धारित प्रावधानों के अनुसार, वोल्टेज तय सीमा से नीचे जाने पर ग्रिड में प्रतिक्रियाशील विद्युत शक्ति भेजने और निर्धारित सीमा से ऊपर जाने पर उसे अवशोषित करने के लिए प्रोत्साहन की व्यवस्था की गई है। इससे वोल्टेज प्रबंधन को एक मापने योग्य ग्रिड सेवा के रूप में विकसित करने में मदद मिल सकती है।
ऊर्जा भंडारण और बिजली नेटवर्क पर भी काम
MANIT में मध्य प्रदेश शासन के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग के सहयोग से स्थापित ऊर्जा रूपांतरण मिशन केंद्र इस तकनीक के अनुसंधान और व्यावहारिक उपयोग पर काम कर रहा है।
केंद्र की गतिविधियों में बैटरी आधारित ऊर्जा भंडारण, सौर-बैटरी संयुक्त प्रणाली, बिजली पारेषण लाइनों की योजना और नेटवर्क की क्षमता का आकलन भी शामिल है। इन प्रयासों का उद्देश्य सौर ऊर्जा को बिजली ग्रिड से बेहतर तरीके से जोड़ना और बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता में सुधार करना है।
ओडिशा के प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा मध्य प्रदेश में विकसित तकनीक को दूसरे राज्यों तक पहुंचाने और सौर संयंत्रों को बिजली उत्पादन के साथ ग्रिड की स्थिरता में भी उपयोगी बनाने की संभावनाओं को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।




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