MP Lokayukta Raid: वाणिज्यिक कर अधिकारी की आय से 264% अधिक संपत्ति का खुलासा, जबलपुर-भोपाल-सागर में छापे

MP Lokayukta Raid: अधिकारी की आय से 264% अधिक संपत्ति
सागर/भोपाल: मध्य प्रदेश में आय से अधिक संपत्ति की शिकायत पर लोकायुक्त ने वाणिज्यिक कर अधिकारी मनीष कुमार जैन के ठिकानों पर छापेमारी की। मंगलवार, 27 अक्टूबर को सुबह करीब 6 बजे शुरू हुई कार्रवाई के दौरान जबलपुर, भोपाल और सागर जिले में अधिकारी और उनके परिवार से जुड़ी संपत्तियों की जांच की गई। शुरुआती जांच में लगभग 1.03 करोड़ रुपये की ज्ञात आय के मुकाबले 3.78 करोड़ रुपये का व्यय सामने आया है।
लोकायुक्त के मुताबिक, यह व्यय अधिकारी की ज्ञात आय का 364.64 प्रतिशत है, यानी आय से 264.64 प्रतिशत अधिक। टीम संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों और आय के स्रोतों की जांच कर रही है।
शिकायत के सत्यापन के बाद दर्ज हुआ मामला
मनीष कुमार जैन वाणिज्यिक कर विभाग में अधिकारी हैं और वर्तमान में दमोह में पदस्थ बताए गए हैं। लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक अंजूलता पटले को उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की शिकायत मिली थी। निरीक्षक बृजमोहन सिंह नरवरिया ने शिकायत का सत्यापन किया। प्रारंभिक जांच में आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया।
इसके बाद लोकायुक्त की टीमों ने अधिकारी के जबलपुर स्थित निवास सहित उनसे जुड़े अन्य ठिकानों पर तलाशी शुरू की।
परिवार के नाम पर भी मिली संपत्तियों की जानकारी
प्रारंभिक जांच में मनीष कुमार जैन के साथ उनकी पत्नी निधि जैन और माता-पिता के नाम पर भी जमीन, मकान और अन्य संपत्तियों की जानकारी सामने आई है।
लोकायुक्त के अनुसार, अधिकारी के नाम पर जबलपुर में करीब 278.74 वर्गमीटर का भूखंड मिला है, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 1.43 करोड़ रुपये बताई गई है। उनकी पत्नी के नाम पर जबलपुर में भूखंड, भोपाल में बंगला और एक फ्लैट होने की जानकारी भी सामने आई है।
इसके अलावा सागर जिले के बंडा में अधिकारी की मां शशि जैन और पिता कोमलचंद जैन के नाम पर मकान और भूखंड होने की बात जांच में सामने आई है। इन संपत्तियों के दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है।
कार, स्कूटर और बीमा पॉलिसियां भी जांच के दायरे में
लोकायुक्त की शुरुआती जांच में अधिकारी के परिवार के नाम पर मारुति स्विफ्ट कार और सुजुकी एक्सेस स्कूटर की जानकारी भी मिली है। दोनों वाहनों की अनुमानित कीमत करीब 5.10 लाख रुपये बताई गई है।
इसके अतिरिक्त अधिकारी और परिवार के सदस्यों के नाम पर बीमा पॉलिसियों के लिए लगभग 33.93 लाख रुपये खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी इन खर्चों और संपत्तियों के स्रोत का पता लगा रही है।
जांच जारी, दस्तावेजों की पड़ताल कर रही टीम
यह कार्रवाई भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की संशोधित धाराओं 13(1)(बी) और 13(2) के तहत दर्ज मामले के संबंध में की गई है। लोकायुक्त की टीमें संपत्ति, खर्च और आय से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं।
अभी सामने आए आंकड़े प्रारंभिक जांच पर आधारित हैं। संपत्तियों के वास्तविक मूल्य, आय के स्रोत और मामले से जुड़े अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।




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