Indore Kesarbagh Bridge: टू लेन निर्माण पर हाईकोर्ट में सुनवाई
इंदौर समाचार: इंदौर के केसरबाग रेलवे क्रॉसिंग पर बन रहे ब्रिज की चौड़ाई को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 40 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस ब्रिज को केवल दो लेन का बनाए जाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता की मांग है कि भविष्य में बढ़ने वाले यातायात को ध्यान में रखते हुए ब्रिज कम से कम चार लेन का बनाया जाए। मामले में रेलवे को अपना पक्ष अदालत के सामने रखना होगा।
फोरलेन सड़क पर टू लेन ब्रिज बनाने पर उठे सवाल
केसरबाग क्षेत्र में रेलवे क्रॉसिंग पर ब्रिज का निर्माण शुरू हो चुका है। इस परियोजना को लेकर दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि जिस सड़क पर ब्रिज बनाया जा रहा है, वह पहले से ही चार लेन की है। यह मार्ग शहर के बाहरी क्षेत्रों को जोड़ने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है।
याचिकाकर्ता डॉ. संजय कांबले का तर्क है कि सड़क की मौजूदा चौड़ाई और भविष्य में बढ़ने वाले वाहनों की संख्या को देखते हुए ब्रिज का निर्माण भी कम से कम चार लेन में किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि अभी दो लेन का ब्रिज बनने से आने वाले वर्षों में यातायात का दबाव बढ़ सकता है और जाम की समस्या पैदा हो सकती है।
भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखने की मांग
याचिका में बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की योजना बनाते समय लंबी अवधि की जरूरतों को ध्यान में रखने पर जोर दिया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, यदि शुरुआत से ही पर्याप्त चौड़ाई का निर्माण किया जाए तो भविष्य में विस्तार की जरूरत और उससे जुड़ी परेशानियों को कम किया जा सकता है।
इस संबंध में बाणगंगा ब्रिज का उदाहरण भी दिया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि वहां पहले दो लेन का ब्रिज बनाया गया था और बाद में उसे चार लेन में विस्तारित करना पड़ा। इसी तरह की स्थिति से बचने के लिए केसरबाग ब्रिज में शुरुआत से ही अतिरिक्त लेन का प्रावधान करने की मांग की गई है।
16 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
ब्रिज की चौड़ाई बढ़ाने की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किए हैं। मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर 2026 को निर्धारित बताई गई है।
अदालत में रेलवे को यह स्पष्ट करना होगा कि संबंधित सड़क की चौड़ाई और भविष्य में संभावित यातायात वृद्धि के बावजूद ब्रिज को दो लेन में बनाने का निर्णय क्यों लिया गया। मामले में अंतिम फैसला अदालत की आगे की सुनवाई और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद स्पष्ट होगा।
दिन में 20 से अधिक बार बंद होता था रेलवे क्रॉसिंग का गेट
केसरबाग रेलवे क्रॉसिंग उन स्थानों में शामिल थी, जहां लंबे समय से ब्रिज की जरूरत महसूस की जा रही थी। यहां रेलवे फाटक दिनभर में 20 से अधिक बार बंद होने के कारण वाहन चालकों को रुकना पड़ता था। इससे आवागमन प्रभावित होता था।
रिपोर्ट के अनुसार, लगभग दो महीने पहले क्रॉसिंग को बंद करके ब्रिज का निर्माण शुरू किया गया था। परियोजना को पूरा करने के लिए 15 महीने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
अब इस परियोजना की चौड़ाई को लेकर उठे सवालों पर रेलवे का पक्ष और हाईकोर्ट की आगे की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण की मौजूदा योजना में कोई बदलाव होगा या परियोजना निर्धारित डिजाइन के अनुसार ही आगे बढ़ेगी।












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