धार भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से मांगे दस्तावेज, तीन याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई

Dhar Bhojshala Case: सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों से मांगे दस्तावेज, तीन याचिकाओं पर सुनवाई
धार। मध्यप्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट में आगे बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली तीन याचिकाओं पर शीर्ष अदालत ने एक साथ सुनवाई शुरू की है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सभी पक्षों को अपने दस्तावेज और रिकॉर्ड प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही भोजशाला से संबंधित रिकॉर्ड सभी पक्षों को उपलब्ध कराने के लिए भी कहा गया है।
इस मामले में हाईकोर्ट के फैसले के बाद हिंदू और मुस्लिम पक्ष दोनों अपनी-अपनी दलीलों और दस्तावेजों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रख रहे हैं। अब आगे की सुनवाई में उपलब्ध रिकॉर्ड और पक्षकारों की प्रस्तुतियों की अहम भूमिका रहेगी।
हाईकोर्ट ने 15 मई को सुनाया था फैसला
भोजशाला विवाद पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने 15 मई को फैसला सुनाया था। अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर माना था। फैसले में हिंदुओं को वर्ष के सभी 365 दिन पूजा का अधिकार दिए जाने की बात कही गई थी।
हाईकोर्ट के इस फैसले को चुनौती देते हुए मुस्लिम पक्ष की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिकाएं (SLP) दाखिल की गई हैं। इन याचिकाओं में हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए गए हैं। शीर्ष अदालत में अब तीनों याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की जा रही है।
मुस्लिम पक्ष की ओर से दाखिल की गईं याचिकाएं
हाईकोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष की ओर से अलग-अलग याचिकाएं दायर की गई हैं। इनमें शहर काजी, कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी और वक्फ बोर्ड की ओर से जिब्रान अंसारी की याचिकाएं शामिल हैं।
इन याचिकाओं के माध्यम से हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। सुनवाई के दौरान सभी पक्षों को अपने दस्तावेज और संबंधित रिकॉर्ड पेश करने के लिए कहा गया है, ताकि मामले से जुड़े तथ्यों और दलीलों को अदालत के सामने रखा जा सके।
हिंदू पक्ष ने भी दाखिल की कैविएट
दूसरी ओर, हिंदू पक्ष ने भी सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखने की तैयारी पहले से कर रखी है। इसके लिए अदालत में कैविएट दाखिल की गई है। कैविएट दाखिल करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मामले में कोई आदेश पारित करने से पहले संबंधित पक्ष को भी सुना जाए।
सुनवाई के दौरान धार के याचिकाकर्ता आशीष गोयल और उनके वकील विनय जोशी मौजूद रहे। आशीष गोयल ने भोजशाला को हिंदू मंदिर बताते हुए कहा कि इसका उल्लेख एएसआई की लगभग दो हजार पृष्ठों की सर्वे रिपोर्ट और प्राचीन दस्तावेजों में मिलता है।
उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू पक्ष भोजशाला में मां वाग्देवी की प्रतिमा स्थापित करना चाहता है, जो वर्तमान में लंदन के संग्रहालय में रखी हुई है। यह हिंदू पक्ष की ओर से अदालत में रखी गई दलील है।
भोजशाला में सरस्वती लोक बनाने का निर्णय
हाईकोर्ट के फैसले के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने भोजशाला परिसर में सरस्वती लोक विकसित करने का निर्णय लिया है। इस प्रस्ताव को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में भी मंजूरी दी जा चुकी है।
अब सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई पर सभी पक्षों की नजर है। अदालत के निर्देशों के अनुसार दस्तावेज और रिकॉर्ड प्रस्तुत किए जाने के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया बढ़ेगी। भोजशाला विवाद का अंतिम कानूनी निष्कर्ष सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई और आदेशों पर निर्भर करेगा।




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