GIS 2027 से पहले निवेश जुटाने की तैयारी, मुंबई में उद्योगपतियों से मिलेंगे डॉ. मोहन यादव
भोपाल। मध्यप्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने और जनवरी 2027 में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) से पहले बड़े निवेशकों तक पहुंच बनाने की कवायद तेज हो गई है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी 8 अक्टूबर को मुंबई में देश के प्रमुख उद्योग समूहों और कारोबारी प्रतिनिधियों के साथ संवाद करेंगे।
मुंबई के लोअर परेल स्थित द सेंट रेजिस होटल में आयोजित होने वाले निवेश संवाद में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठकें करेंगे। इन बैठकों में मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं के साथ-साथ कंपनियों की जरूरतों, निवेश प्रस्तावों और संभावित अड़चनों पर सीधे चर्चा की जाएगी।
GIS से पहले निवेशकों से सीधा संपर्क
मध्यप्रदेश सरकार ने जनवरी 2027 में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट को लेकर निवेशकों से संपर्क बढ़ा दिया है। सरकार का प्रयास है कि समिट से पहले देश के बड़े औद्योगिक और कारोबारी समूहों को मध्यप्रदेश में उपलब्ध निवेश अवसरों की जानकारी दी जाए।
मुंबई इस अभियान के लिए महत्वपूर्ण केंद्र है, क्योंकि यहां देश के प्रमुख औद्योगिक, वित्तीय और कारोबारी समूहों का बड़ा आधार मौजूद है। ऐसे में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी का उद्योगपतियों के साथ सीधा संवाद निवेश आकर्षित करने की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
उद्योगपतियों के सामने रखा जाएगा मध्यप्रदेश का निवेश रोडमैप
निवेश संवाद के दौरान मध्यप्रदेश की औद्योगिक नीति, निवेश के अवसर, औद्योगिक अधोसंरचना और विभिन्न क्षेत्रों में विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर्स की जानकारी उद्योग समूहों के सामने रखी जाएगी।
सरकार की ओर से प्रदेश में उद्योगों के लिए उपलब्ध सुविधाओं और निवेश को बढ़ावा देने वाली नीतियों की जानकारी भी साझा की जाएगी। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई मध्यप्रदेश में उपलब्ध निवेश संभावनाओं को लेकर प्रस्तुतीकरण देंगे।
मध्यप्रदेश की भौगोलिक स्थिति और लॉजिस्टिक्स पर जोर
निवेशकों के सामने मध्यप्रदेश की भौगोलिक स्थिति को भी प्रमुखता से रखा जाएगा। देश के मध्य में स्थित होने के कारण प्रदेश को बड़े बाजारों तक पहुंच और लॉजिस्टिक्स के लिहाज से महत्वपूर्ण बताया जाएगा।
इसके साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों में विकसित हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर, अलग-अलग सेक्टर के क्लस्टर्स और उद्योगों की जरूरत के अनुसार निवेश सुविधा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी जाएगी।
सरकार का उद्देश्य निवेशकों को यह समझाना है कि मध्यप्रदेश में उद्योग स्थापित करने के लिए केवल भूमि और बाजार की उपलब्धता ही नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक आधार से जुड़ी सुविधाओं पर भी काम किया जा रहा है।
वन-टू-वन बैठक में कंपनियों की जरूरत समझेंगे सीएम
मुंबई कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी की उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन बैठकें होंगी। इन व्यक्तिगत बैठकों में कंपनियों के निवेश प्रस्ताव और उनकी व्यावसायिक जरूरतों को सीधे समझने का प्रयास किया जाएगा।
इसके अलावा निवेश के दौरान आने वाली संभावित समस्याओं और आवश्यक अनुमतियों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है। सरकार की ओर से निवेश प्रक्रिया को आसान बनाने और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी निवेशकों को दी जाएगी।
अलग-अलग सेक्टर में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा
संवाद के दौरान मध्यप्रदेश के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी। सरकार का प्रयास है कि निवेशकों की रुचि और उनकी व्यावसायिक जरूरतों के अनुरूप प्रदेश में उपलब्ध अवसरों को सामने रखा जाए।
इससे संभावित निवेश प्रस्तावों को शुरुआती स्तर पर ही समझने और उन्हें आगे बढ़ाने के लिए जरूरी संवाद स्थापित करने में मदद मिल सकती है।
जनवरी 2027 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट पर नजर
मध्यप्रदेश में जनवरी 2027 में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट प्रस्तावित है। इसके पहले राज्य सरकार देश और विदेश के प्रमुख उद्योग समूहों से संपर्क बढ़ा रही है।
मुंबई का कार्यक्रम इसी व्यापक निवेश संपर्क अभियान का हिस्सा है। सरकार की कोशिश है कि समिट से पहले निवेशकों के साथ संवाद मजबूत हो और उनकी निवेश योजनाओं को मध्यप्रदेश में उपलब्ध अवसरों से जोड़ा जा सके।
निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने की रणनीति
नए निवेश से औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में राज्य सरकार की निवेश नीति का एक प्रमुख उद्देश्य प्रदेश में नए उद्योग और कारोबारी गतिविधियां लाना है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के मुंबई दौरे के दौरान होने वाली बैठकों को इसी दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि वास्तविक निवेश और उसकी राशि का आकलन संबंधित कंपनियों के प्रस्ताव और आगे होने वाली प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल सरकार का जोर बड़े उद्योग समूहों के साथ सीधा संवाद स्थापित करने, उनकी जरूरतों को समझने और जनवरी 2027 की ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट से पहले निवेश का माहौल तैयार करने पर है।













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