MP Weather: मानसून की विदाई के बाद बदला मौसम, 7-8 अक्टूबर को बारिश
भोपाल, मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की पूरी तरह विदाई के बाद मौसम के मिजाज में बदलाव दिखाई देने लगा है। प्रदेश में अब रात के तापमान में गिरावट दर्ज की जा रही है, जबकि दिन के समय तेज धूप के कारण गर्मी और उमस का असर बना हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार, 5 और 6 अक्टूबर को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम साफ रहने की संभावना है। इसके बाद 7 और 8 अक्टूबर को पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिलों में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है।
मानसून की विदाई के साथ मौसम का यह बदलाव अक्टूबर के सामान्य मिजाज के अनुरूप माना जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक अक्टूबर में प्रदेश में एक साथ गर्मी, बारिश और ठंडक का असर देखने को मिल सकता है। यही वजह है कि दिन और रात के तापमान में अंतर बढ़ने लगा है।
तीन दिनों में कई शहरों का रात का तापमान गिरा
मानसून की विदाई के बाद प्रदेश के कई हिस्सों में रातें पहले की तुलना में ठंडी होने लगी हैं। पिछले तीन दिनों में कई शहरों के न्यूनतम तापमान में करीब चार डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है।
अनूपपुर के अमरकंटक में न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। वहीं इंदौर में रात का पारा 18 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया। भोपाल, उज्जैन और पचमढ़ी सहित अन्य क्षेत्रों में भी न्यूनतम तापमान में गिरावट देखी गई है।
रात के समय तापमान गिरने से सुबह और देर रात हल्की ठंडक महसूस होने लगी है। हालांकि दिन में तेज धूप निकलने के कारण दोपहर के समय गर्मी का असर अभी बना हुआ है।
5 और 6 अक्टूबर को साफ रहेगा मौसम
मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, 5 और 6 अक्टूबर को मध्य प्रदेश में बारिश की संभावना नहीं है। इन दोनों दिनों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मौसम साफ रहने और तेज धूप निकलने का अनुमान है।
इस दौरान दिन का तापमान बढ़ सकता है, जिससे दोपहर में गर्मी महसूस होगी। दूसरी ओर, रात के समय तापमान अपेक्षाकृत कम रहने से सुबह और देर रात मौसम सुहावना बना रह सकता है।
यानी फिलहाल प्रदेश में दिन में गर्मी और रात में ठंडक का मिला-जुला मौसम देखने को मिलेगा।
7 और 8 अक्टूबर को पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश
मौसम विभाग के अनुसार, 7 और 8 अक्टूबर को पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम फिर बदल सकता है। इस दौरान गरज-चमक के साथ हल्की बारिश और कहीं-कहीं तेज हवा चलने की संभावना जताई गई है।
जिन जिलों में बारिश के आसार बताए गए हैं, उनमें शामिल हैं:
- छतरपुर
- पन्ना
- सतना
- रीवा
- मऊगंज
- सीधी
- सिंगरौली
- मैहर
- उमरिया
- शहडोल
- अनूपपुर
- डिंडौरी
- मंडला
- बालाघाट
इन जिलों में स्थानीय स्तर पर मौसम में अचानक बदलाव हो सकता है। बारिश के साथ गरज-चमक और हवा की स्थिति भी बन सकती है।
हालांकि, 5 अक्टूबर को जारी IMD के उपखंडीय चेतावनी पेज पर पूर्वी मध्य प्रदेश के लिए 6 से 8 अक्टूबर तक कोई चेतावनी दर्ज नहीं थी, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश के लिए 6 से 8 अक्टूबर को आंधी-गरज-चमक संबंधी चेतावनी दिखाई गई है। इसलिए जिलेवार मौसम पूर्वानुमान में बदलाव संभव है और स्थानीय अपडेट देखना जरूरी रहेगा।
करीब 100 दिन सक्रिय रहा मानसून
मध्य प्रदेश में इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून का आगमन 24 जून को हुआ था और 3 अक्टूबर तक इसकी पूरी तरह विदाई हो गई। यानी प्रदेश में मानसून लगभग 100 दिन सक्रिय रहा।
इसके बावजूद पूरे मानसून सीजन में प्रदेश को सामान्य से थोड़ी कम बारिश मिली। मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश दर्ज हुई, जबकि सामान्य बारिश का आंकड़ा 949.5 मिलीमीटर यानी लगभग 37.3 इंच है।
इस हिसाब से प्रदेश में सीजन के दौरान बारिश सामान्य से करीब 4 प्रतिशत कम रही।
पूर्वी एमपी में ज्यादा बारिश, पश्चिमी हिस्से में कमी
इस बार बारिश के आंकड़ों में मध्य प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला।
पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से करीब 4 प्रतिशत अधिक बारिश हुई, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश सामान्य से करीब 12 प्रतिशत कम रही। जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभागों में कुल मिलाकर बारिश सामान्य से अधिक रही।
हालांकि पूर्वी क्षेत्र के कुछ जिलों में भी कमी दर्ज की गई। बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी जैसे जिलों में सामान्य की तुलना में 5 से 21 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज हुई।
वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश की कमी अधिक रही। आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई।
25 जिलों में पूरा हुआ बारिश का कोटा
प्रदेश के 25 जिलों में मानसून के दौरान सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा या उससे अधिक रहा। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं।
इसके विपरीत 30 जिले सामान्य बारिश के आंकड़े से पीछे रहे। इनमें सागर, इंदौर, उज्जैन, सीहोर, रायसेन, शिवपुरी, सिवनी, देवास, दमोह, जबलपुर, बालाघाट, छिंदवाड़ा सहित कई जिले शामिल हैं।
जून की बारिश की कमी नहीं हो सकी पूरी
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल प्रदेश में कुल बारिश सामान्य से कम रहने की एक बड़ी वजह जून में कम बारिश होना रही। जून में प्रदेश में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी।
इसके बाद जुलाई में अच्छी बारिश से स्थिति में सुधार हुआ, लेकिन मानसून में दो बार ब्रेक आने के कारण बारिश का क्रम प्रभावित हुआ। सितंबर के आखिरी दिनों में फिर कई क्षेत्रों में बारिश हुई, जिससे कुल आंकड़े में सुधार आया। इसके बावजूद शुरुआती कमी पूरी नहीं हो सकी और मानसून सीजन सामान्य से करीब चार प्रतिशत नीचे समाप्त हुआ।
दिन में गर्मी, रात में ठंडक का दौर
मानसून की विदाई के बाद मध्य प्रदेश में मौसम का यह बदलाव आने वाले दिनों में भी देखने को मिल सकता है। अक्टूबर में दिन के समय तेज धूप के कारण तापमान बढ़ सकता है, जबकि आसमान साफ रहने और रात के समय तापमान गिरने से सुबह-रात में ठंडक बढ़ती जाएगी।
इस मौसम में तापमान में तेजी से उतार-चढ़ाव होने के कारण लोगों को सुबह और रात के समय हल्के गर्म कपड़ों की जरूरत महसूस हो सकती है, जबकि दोपहर में गर्मी बनी रह सकती है।
फिलहाल 5-6 अक्टूबर को मौसम मुख्यतः साफ, जबकि 7-8 अक्टूबर को कुछ पूर्वी जिलों में बारिश की संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग के ताजा जिला-स्तरीय पूर्वानुमान के अनुसार स्थिति में बदलाव हो सकता है, इसलिए बारिश या आंधी वाले क्षेत्रों में स्थानीय अपडेट पर नजर रखना जरूरी होगा।












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