सतना में धर्मांतरण के आरोप में तीन पर केस, महिला समेत आरोपी हिरासत में
सतना, मध्य प्रदेश। सतना के टिकुरिया टोला क्षेत्र में धर्म परिवर्तन के लिए कथित तौर पर प्रलोभन देने का मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले में एक महिला समेत तीन लोगों के खिलाफ मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने तीनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
पुलिस के मुताबिक, शिकायतकर्ता युवक ने आरोप लगाया है कि उसे उसकी बीमारी, बेरोजगारी और आर्थिक परेशानियों का फायदा उठाकर पहले बेहतर इलाज, रहने के लिए घर और नौकरी दिलाने का भरोसा दिया गया। आरोप है कि इसके बाद उसे ईसाई धर्म अपनाने और प्रार्थना सभा में शामिल होने के लिए कहा गया। युवक का दावा है कि जब उसने धर्म परिवर्तन को लेकर दबाव का विरोध किया तो उसे कथित तौर पर कहा गया कि धर्म बदले बिना उसे घर, नौकरी और स्वास्थ्य लाभ नहीं मिलेगा।
मामले की जानकारी सामने आने के बाद क्षेत्र में हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता भी थाने पहुंचे और कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने शिकायत, उपलब्ध बयानों और साक्ष्यों के आधार पर तीन नामजद लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
बीमारी और बेरोजगारी से परेशान युवक से संपर्क का आरोप
पुलिस के अनुसार, टिकुरिया टोला निवासी 25 वर्षीय जगविजय उर्फ जग्गी वर्मा पिछले कुछ समय से बीमारी, बेरोजगारी और आर्थिक-पारिवारिक परेशानियों से जूझ रहा था। इसी दौरान उसकी मुलाकात कंचन महतो नामक व्यक्ति से हुई।
आरोप है कि कंचन महतो युवक को रेनु समुद्रे के घर लेकर गया। शिकायत के अनुसार, वहां युवक को प्रार्थना में शामिल होने और ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
युवक का आरोप है कि उसे बेहतर स्वास्थ्य, रहने के लिए घर और नौकरी उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया था। अपनी परेशानियों के कारण वह शुरुआती दौर में आरोपियों की बातों पर विश्वास करता रहा।
हालांकि, शिकायतकर्ता के अनुसार, उसे जिन सुविधाओं और मदद का भरोसा दिया गया था, वह पूरी नहीं हुई। इसके बाद जब उस पर धर्म परिवर्तन के लिए कथित तौर पर दबाव बढ़ा तो उसने इसका विरोध किया।
धर्म बदले बिना घर और नौकरी नहीं मिलने का आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि युवक को कथित तौर पर कहा गया कि धर्म परिवर्तन किए बिना उसे न तो स्वास्थ्य लाभ मिलेगा, न रहने के लिए घर और न ही नौकरी।
पुलिस के अनुसार, रविवार को युवक दोबारा संबंधित स्थान पर पहुंचा था। इसी दौरान कथित तौर पर उसके सामने धर्म परिवर्तन की शर्त रखे जाने की बात सामने आई। इसके बाद युवक ने विरोध किया और कोलगवां थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपों की जांच शुरू की। पुलिस ने कंचन महतो, रेनु समुद्रे और ईशू समुद्रे को हिरासत में लिया है।
हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल पुलिस शिकायतकर्ता के बयान, उपलब्ध वीडियो और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है।
पुलिस ने धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत दर्ज किया केस
पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2021 की धारा 3 और 5 के तहत मामला दर्ज किया है। कानून में गलत प्रस्तुतीकरण, प्रलोभन, धमकी, बल, अनुचित प्रभाव, विवाह या अन्य धोखाधड़ीपूर्ण माध्यमों से धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने का प्रावधान है। कानून में ‘allurement’ में रोजगार, आर्थिक या भौतिक लाभ जैसे प्रलोभनों को भी शामिल किया गया है।
इस मामले में पुलिस अब यह जांच करेगी कि शिकायत में लगाए गए आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य उपलब्ध हैं और आरोपित लोगों की भूमिका क्या रही। जांच के दौरान शिकायतकर्ता और आरोपियों के बयान के साथ-साथ मौके से जुड़े अन्य साक्ष्यों को भी देखा जाएगा।
यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज होना अपने आप में आरोप सिद्ध होने के बराबर नहीं है। अंतिम कानूनी स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता थाने पहुंचे
मामले की जानकारी मिलने के बाद बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता भी कोलगवां थाने पहुंचे। कार्यकर्ताओं ने मामले में सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए थाने के बाहर नारेबाजी की।
संगठनों की ओर से आरोप लगाया गया कि लोगों को उनकी आर्थिक और व्यक्तिगत परेशानियों का फायदा उठाकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित किया जा रहा था। पुलिस ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई का भरोसा दिया।
पुलिस ने फिलहाल तीन लोगों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है। पूछताछ में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि कथित गतिविधि कितने समय से चल रही थी और इसमें अन्य कोई व्यक्ति शामिल था या नहीं।
प्रार्थना सभा और धर्म परिवर्तन के आरोप को लेकर पुलिस जांच
मामले में प्रार्थना सभा में शामिल होने और धर्म परिवर्तन के लिए कथित तौर पर दबाव बनाए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, केवल किसी प्रार्थना सभा में शामिल होना अपने आप में धर्म परिवर्तन का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इस मामले में पुलिस की जांच का मुख्य सवाल यह है कि क्या शिकायतकर्ता को किसी प्रलोभन, दबाव या अन्य माध्यम से धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित या बाध्य किया गया था।
मध्यप्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम में धर्म परिवर्तन के लिए प्रलोभन और दबाव जैसे माध्यमों को लेकर स्पष्ट प्रावधान हैं। इसलिए जांच एजेंसियां शिकायत में बताए गए घर, नौकरी और स्वास्थ्य संबंधी कथित प्रलोभनों की भी पड़ताल करेंगी।
पुलिस ने शुरू की मामले की विस्तृत जांच
सतना पुलिस अब पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। शिकायतकर्ता के बयान के अलावा पुलिस उपलब्ध वीडियो, अन्य बयानों और मौके से जुड़े साक्ष्यों की जांच कर रही है।
जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कथित तौर पर युवक को किस प्रकार का आश्वासन दिया गया था, क्या उसके समर्थन में कोई रिकॉर्ड या अन्य साक्ष्य मौजूद हैं और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाए जाने की शिकायत कितनी प्रमाणित होती है।
फिलहाल तीनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस जांच पूरी होने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तय करेगी।
नोट: इस रिपोर्ट में धर्म परिवर्तन और प्रलोभन से संबंधित सभी बातें पुलिस में दर्ज शिकायत और पुलिस की प्रारंभिक कार्रवाई के आधार पर हैं। आरोपों की स्वतंत्र न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।












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