उज्जैन में पितृपक्ष शुरू, पिंडदान-तर्पण के लिए उमड़े श्रद्धालु; 20 साल बाद खास संयोग
उज्जैन। पितृपक्ष की शुरुआत के साथ ही उज्जैन में धार्मिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। शनिवार, 26 सितंबर 2026 से श्राद्ध पक्ष शुरू हुआ और देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए शहर पहुंच रहे हैं। गया कोठा, रामघाट और सिद्धवट क्षेत्र में सुबह से ही श्रद्धालुओं की आवाजाही देखने को मिली।
उज्जैन को पितृ कर्म के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है। यही वजह है कि पितृपक्ष के दौरान यहां आसपास के जिलों के अलावा दूसरे राज्यों से भी लोग पहुंचते हैं।
तीन प्रमुख स्थानों पर किए जा रहे हैं पितृ कर्म
पितृपक्ष के दौरान उज्जैन के कई धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। गया कोठा में पिंडदान से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं हैं। वहीं रामघाट पर शिप्रा नदी के तट पर तर्पण किया जाता है।
इसी तरह सिद्धवट पर भी पूर्वजों के निमित्त पिंडदान और जल अर्पित करने की परंपरा है। इन तीनों स्थानों पर पितृपक्ष के दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है।
इस बार तारीखों में खास बदलाव
2026 के पितृपक्ष में तिथियों के क्रम के कारण एक दिन कम रहेगा। ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस बार श्राद्ध पक्ष 15 दिनों में पूरा होगा, जबकि सामान्य तौर पर इसे 16 दिनों से जोड़ा जाता है।
सबसे खास स्थिति 1 अक्टूबर को रहेगी, जब पंचमी और षष्ठी दोनों तिथियों का श्राद्ध एक ही दिन किया जाएगा। पंचमी दोपहर 12:36 बजे तक रहेगी और उसके बाद षष्ठी शुरू होगी।
20 साल बाद ऐसा संयोग होने का दावा
ज्योतिषाचार्य पं. चंदन श्यामनारायण व्यास के अनुसार इस बार करीब दो दशक बाद ऐसा संयोग बना है, जिसमें पितृपक्ष की शुरुआत शनिवार से हो रही है और इसका समापन भी शनिवार को ही होगा।
पितृपक्ष का अंतिम दिन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के रूप में आएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार जिन लोगों को अपने पूर्वज की मृत्यु तिथि मालूम नहीं होती, वे इस दिन पिंडदान और तर्पण कर सकते हैं।
अलग-अलग तिथियों पर अलग श्राद्ध
इस बार की श्राद्ध तिथियों में भी कई महत्वपूर्ण दिन हैं। 4 अक्टूबर को मातृ नवमी पर माता, दादी और नानी के निमित्त श्राद्ध किया जाएगा। 7 अक्टूबर को साधु-संतों और संन्यासियों के लिए श्राद्ध का दिन बताया गया है।
इसी तरह 8 अक्टूबर को अल्पायु या बच्चों के लिए तथा 9 अक्टूबर को दुर्घटना, अकाल मृत्यु या शस्त्र से मृत्यु से जुड़े लोगों के लिए श्राद्ध किए जाने की परंपरा बताई गई है।
सर्वपितृ अमावस्या पर होगा समापन
पितृपक्ष का समापन 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। इस दिन उन पूर्वजों के लिए भी धार्मिक कर्म करने की मान्यता है, जिनकी मृत्यु की तिथि परिवार को ज्ञात नहीं होती।
पितृपक्ष शुरू होने के साथ ही उज्जैन के प्रमुख घाटों और धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी है। आने वाले दिनों में अलग-अलग श्राद्ध तिथियों के अनुसार इन स्थानों पर धार्मिक गतिविधियां जारी रहेंगी।








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