कूनो में चीते की मौत के मामले में STF की जांच तेज, तीन संदिग्ध हिरासत में; हथियार की तलाश जारी

Kuno Cheetah Death: चीते की मौत के मामले में STF ने तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया
भोपाल। मध्यप्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से जुड़े 19 महीने के नर चीते की गोली लगने से हुई मौत के मामले में विशेष जांच दल (STF) ने जांच तेज कर दी है। मामले में तीन संदिग्धों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। हालांकि, चीते पर फायरिंग में इस्तेमाल किया गया हथियार अब तक बरामद नहीं हुआ है। जांच एजेंसियां आसपास के गांवों में संदिग्धों की तलाश के साथ घटना से जुड़े सुराग जुटा रही हैं।
वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम यह पता लगाने में जुटी है कि संरक्षित वन्यजीव तक हथियार लेकर पहुंचने वाले लोग कौन थे और चीते को गोली मारने के पीछे क्या वजह थी। फिलहाल किसी संदिग्ध की भूमिका आधिकारिक रूप से साबित नहीं हुई है।
25 अक्टूबर को घायल मिला था चीता
19 महीने का नर चीता KNG22, मादा चीता निर्वा की संतानों में से एक था। वह 25 अक्टूबर को मध्यप्रदेश के श्योपुर क्षेत्र के वन इलाके में घायल अवस्था में मिला था। निगरानी दल ने उसे रेस्क्यू कर उपचार के लिए जबलपुर स्थित नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय पहुंचाया था।
जांच के दौरान एक्स-रे और सीटी स्कैन में उसके शरीर में कई बाहरी धातु के टुकड़े पाए गए। डॉक्टरों ने आपातकालीन सर्जरी कर उसके शरीर से बंदूक के पांच छर्रे निकाले। छर्रों से उसके आंतरिक अंगों, मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा था। तमाम प्रयासों के बावजूद 27 अक्टूबर की सुबह चीते की मौत हो गई।
रेडियो कॉलर के सिग्नल से तलाशे जा रहे सुराग
STF की जांच में चीते के रेडियो कॉलर से मिले सिग्नल अहम माने जा रहे हैं। इनके माध्यम से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि घायल होने से पहले चीता किन रास्तों से गुजरा था और उसकी गतिविधियां किन इलाकों में थीं।
जांच से जुड़े वन अधिकारी के अनुसार, चीता कम समय में तीन से चार किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकता है। रेडियो कॉलर की लगभग 500 मीटर की सिग्नल रेंज से बाहर जाने पर निगरानी दल को सैटेलाइट सिग्नल का इंतजार करना पड़ता है। इस कारण उसकी लोकेशन ट्रैक करने में कुछ समय का अंतर आ सकता है।
जांच एजेंसियां इसी तकनीकी जानकारी और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर घटना के समय चीते की संभावित गतिविधियों का पता लगाने में जुटी हैं।
केंद्र की टीम ने भी किया घटनास्थल का निरीक्षण
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने भी उच्चस्तरीय टीम मध्यप्रदेश भेजी है। इस टीम में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
केंद्रीय टीम ने मुरैना पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों से जानकारी जुटाई। टीम घटना की परिस्थितियों, उपलब्ध साक्ष्यों और वन्यजीवों की सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था की समीक्षा कर रही है। केंद्र सरकार के अनुसार, टीम अपनी जांच और सुझाव पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को सौंपेगी।
हथियार की बरामदगी बनी अहम चुनौती
जांच में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण चुनौती उस बंदूक का पता लगाना है, जिससे चीते पर गोली चलाई गई थी। तीन संदिग्धों से पूछताछ की जा रही है, लेकिन हथियार की बरामदगी और घटना में शामिल लोगों की पहचान को लेकर जांच जारी है।
कूनो और आसपास के वन क्षेत्रों में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर भी इस घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि चीते को गोली किन परिस्थितियों में मारी गई और निगरानी व्यवस्था के बावजूद यह घटना कैसे हुई। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों और जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर होगी।




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