अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0: भोपाल-इंदौर के बीच ₹1 लाख करोड़ का औद्योगिक रोडमैप बनाने की तैयारी

अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव: भोपाल-इंदौर के बीच ₹1 लाख करोड़ का रोडमैप
इंदौर। मध्यप्रदेश में शहरी विकास, औद्योगिक विस्तार और आधुनिक बुनियादी ढांचे को गति देने के उद्देश्य से आयोजित अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव 2.0 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल से इंदौर के बीच बड़े औद्योगिक विकास रोडमैप की बात कही। उन्होंने इस क्षेत्र को देश के प्रमुख आर्थिक केंद्रों में विकसित करने की योजना का उल्लेख किया। कार्यक्रम में सौर ऊर्जा, शहरी निकायों की वित्तीय व्यवस्था और भविष्य की विकास परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई।
भोपाल-इंदौर क्षेत्र में औद्योगिक विकास पर जोर
कॉन्क्लेव के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि भोपाल और इंदौर के बीच लगभग एक लाख करोड़ रुपये के औद्योगिक रोडमैप की दिशा में काम किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि मध्यप्रदेश में अंतरराष्ट्रीय संपर्क और पर्यटन की संभावनाओं को बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। धार्मिक पर्यटन के विस्तार के साथ होटल उद्योग की बड़ी कंपनियों की राज्य में बढ़ती मौजूदगी का भी उल्लेख किया गया।
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्तियों के दस्तावेजों से जुड़ी समस्या का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे लोगों को संपत्ति के दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने निःशुल्क रजिस्ट्री की व्यवस्था की है। इससे संपत्ति के आधार पर ऋण लेने और आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने में सहायता मिलने की बात कही गई।
बिरसिंहपुर में 200 मेगावाट की फ्लोटिंग सोलर परियोजना का प्रस्ताव
कॉन्क्लेव में सौर ऊर्जा क्षेत्र के 20 से अधिक निवेशकों ने हिस्सा लिया। बैठक में नगरीय निकायों की बिजली लागत घटाने, स्वच्छ ऊर्जा के इस्तेमाल और शहरी विकास के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने के नए तरीकों पर विचार किया गया।
मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक मंजीत सिंह ने बिरसिंहपुर जलाशय में प्रस्तावित 200 मेगावाट क्षमता की फ्लोटिंग सोलर परियोजना का प्रस्तुतिकरण दिया। इसके साथ 50 मेगावाट क्षमता और 100 मेगावाट-घंटा भंडारण वाली बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) का प्रस्ताव भी सामने रखा गया।
प्रस्तावित परियोजना की अनुमानित लागत करीब 1,564 करोड़ रुपये बताई गई। इसका उद्देश्य नगरीय निकायों को सौर ऊर्जा उपलब्ध कराना और बैटरी भंडारण के जरिए शाम के समय बिजली की अधिक मांग के दौरान आपूर्ति में सहायता करना है। परियोजना को लागू करने के लिए निवेशक, ऋण, नगरीय निकायों की भागीदारी और वायबिलिटी गैप फंडिंग जैसे वित्तीय विकल्पों पर विचार किया गया।
लगभग 200 नगरीय निकायों के लिए वित्तीय मॉडल पर चर्चा
बैठक में करीब 200 नगरीय निकायों की बिजली संबंधी जरूरतों के लिए पूल्ड म्युनिसिपल बॉन्ड मॉडल पर भी चर्चा हुई। इस व्यवस्था के तहत कई निकायों की वित्तीय जरूरतों को एक साथ जोड़कर संसाधन जुटाने की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है।
इस मॉडल का उद्देश्य स्थानीय निकायों की वित्तीय क्षमता को मजबूत करना और शहरी बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं के लिए वैकल्पिक वित्तीय रास्ते तलाशना है। सौर ऊर्जा उत्पादन और बैटरी भंडारण को एकीकृत करने से दिन में उत्पादित बिजली का उपयोग शाम के समय भी करने में मदद मिल सकती है।
डिजिटल तकनीक से दिखाई गई शहरी विकास की पहल
कॉन्क्लेव के अंतर्गत आयोजित अर्बन इनोवेशन गैलरी में नगरीय विकास एवं आवास विभाग की योजनाओं, उपलब्धियों और नवाचारों को डिजिटल माध्यमों से प्रदर्शित किया गया। एलईडी स्क्रीन और कियोस्क के माध्यम से विभागीय ई-बुक प्रस्तुत की गई।
इस दौरान मुख्यमंत्री और अन्य जनप्रतिनिधियों ने 6D वर्चुअल रियलिटी तकनीक के जरिए महाकालेश्वर मंदिर की भस्म आरती के वर्चुअल दर्शन किए। मंदिर की प्रतिकृति भी प्रदर्शित की गई।
कार्यक्रम में शहरी विकास, निवेश, ऊर्जा दक्षता और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श हुआ। इन प्रस्तावों का वास्तविक प्रभाव संबंधित परियोजनाओं की मंजूरी, वित्तीय व्यवस्था और समयबद्ध क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।




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