इंदौर में अंडरग्राउंड मेट्रो टनल की खुदाई शुरू, एयरपोर्ट से बड़ा गणपति तक बनेगी सुरंग

इंदौर में अंडरग्राउंड मेट्रो की खुदाई शुरू, एयरपोर्ट से बड़ा गणपति तक बनेगी सुरंग

इंदौर। इंदौर मेट्रो परियोजना ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को एक नए चरण में प्रवेश किया। एयरपोर्ट क्षेत्र के पास टनल बोरिंग मशीन (TBM) के जरिए भूमिगत मेट्रो सुरंग की खुदाई शुरू कर दी गई है। यह शहर में भूमिगत मेट्रो कॉरिडोर के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक शुरुआती सुरंग एयरपोर्ट से बड़ा गणपति के बीच विकसित की जा रही है।

410 टन की TBM मशीन से होगी खुदाई

भूमिगत निर्माण के लिए इस्तेमाल की जा रही पहली TBM को ‘नर्मदा’ नाम दिया गया है। मशीन का वजन करीब 410 मीट्रिक टन है और इसे पहले एयरपोर्ट के पास बनाए गए गहरे शाफ्ट में नीचे उतारकर असेंबल किया गया था। मशीन के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने का काम कई सप्ताह तक चला।

TBM जमीन के भीतर निर्धारित गहराई पर लगातार खुदाई करते हुए सुरंग तैयार करेगी। खुदाई के दौरान निकलने वाली मिट्टी और पत्थरों को मशीन के अंदर मौजूद कन्वेयर सिस्टम की मदद से बाहर लाया जाएगा।

एयरपोर्ट से बड़ा गणपति तक बनेगा अंडरग्राउंड सेक्शन

इंदौर मेट्रो के भूमिगत हिस्से में एयरपोर्ट क्षेत्र से आगे शहर के घने इलाकों की ओर सुरंग विकसित की जा रही है। उपलब्ध परियोजना जानकारी के अनुसार एयरपोर्ट से बड़ा गणपति के बीच भूमिगत सुरंग का निर्माण TBM तकनीक से किया जाना है।

शहर के इस हिस्से में जमीन के ऊपर भारी यातायात और घनी आबादी होने के कारण भूमिगत निर्माण तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।

जमीन के नीचे कई मीटर गहराई पर होगा निर्माण

भूमिगत ट्रैक के लिए सुरंग निर्माण जमीन के नीचे किया जाएगा। परियोजना से जुड़ी पूर्व जानकारी के अनुसार कुछ हिस्सों में खुदाई करीब 20 से 30 मीटर नीचे तक की जानी है। इससे सड़क यातायात को कम प्रभावित करते हुए मेट्रो का मार्ग तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।

सुरंग की खुदाई पूरी होने के साथ-साथ उसके अंदर प्रीकास्ट कंक्रीट सेगमेंट लगाए जाएंगे। ये सेगमेंट सुरंग की दीवारों को मजबूती देने और निर्माण को सुरक्षित बनाए रखने में मदद करेंगे।

नर्मदा TBM की लॉन्चिंग पहले ही हो चुकी थी

भूमिगत काम शुरू होने से पहले सितंबर की शुरुआत में ‘नर्मदा’ TBM को एयरपोर्ट स्थित शाफ्ट में सफलतापूर्वक उतारा गया था। मशीन को जमीन के ऊपर असेंबल करने के बाद विशेष भारी-भरकम उपकरणों की मदद से शाफ्ट के अंदर पहुंचाया गया।

इससे पहले जुलाई में TBM के कई बड़े हिस्से थाईलैंड से इंदौर पहुंच चुके थे। परियोजना के भूमिगत हिस्से के लिए कुल चार TBM मशीनों के इस्तेमाल की योजना बताई गई है।

सुरक्षा और ट्रैफिक मैनेजमेंट पर भी फोकस

भूमिगत निर्माण शुरू होने से पहले मेट्रो अधिकारियों ने प्रस्तावित रूट का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था, निर्माण गुणवत्ता और ट्रैफिक प्रबंधन पर जोर दिया है। घनी आबादी वाले इलाकों में निर्माण के दौरान लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो, इसके लिए डायवर्जन और अन्य व्यवस्थाओं पर भी काम किया जा रहा है।

मेट्रो अधिकारियों के अनुसार निर्माण के दौरान आसपास की इमारतों, उपयोगिताओं और सड़क यातायात की लगातार निगरानी करना महत्वपूर्ण रहेगा।

इंदौर मेट्रो का नया चरण

इंदौर मेट्रो परियोजना में पहले से ही एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण चल रहा है। अब भूमिगत सेक्शन का काम शुरू होने से परियोजना का दायरा शहर के उन हिस्सों तक भी बढ़ रहा है जहां ऊपर से मेट्रो लाइन बनाना अधिक चुनौतीपूर्ण है।

भूमिगत सुरंगों के निर्माण के साथ एयरपोर्ट और शहर के प्रमुख हिस्सों के बीच मेट्रो कनेक्टिविटी को आगे बढ़ाने की योजना है। आगे निर्माण की प्रगति के साथ नए भूमिगत स्टेशनों और ट्रैक के अन्य हिस्सों पर भी काम बढ़ाया जाएगा।

नोट: भूमिगत ट्रैक की लंबाई, निर्माण समय और विभिन्न चरणों की समयसीमा परियोजना की प्रगति के अनुसार बदल सकती है। यहां दिए गए तकनीकी और परियोजना संबंधी आंकड़े उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित हैं।

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