भोपाल की रियाज मंजिल पर बेदखली रोकी, केंद्र को 60 दिन में फैसला लेने के निर्देश
भोपाल। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल की ऐतिहासिक रियाज मंजिल और उससे जुड़ी संपत्तियों को लेकर चल रहे विवाद में प्रभावित पक्षों को राहत दी है। करीब 95 करोड़ रुपये मूल्य की बताई जा रही इन संपत्तियों पर बेदखली की कार्रवाई फिलहाल स्थगित रहेगी। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को केंद्र सरकार के सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर देते हुए निर्देश दिया है कि आवेदन मिलने के बाद संबंधित अधिकारी 60 दिन के भीतर मामले पर तर्कसंगत निर्णय लें।
यह विवाद संपत्तियों को ‘शत्रु संपत्ति’ घोषित किए जाने और उनके आधार पर जारी बेदखली नोटिसों से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सक्षम प्राधिकारी के निर्णय तक याचिकाकर्ताओं के खिलाफ बेदखली संबंधी कार्रवाई और दंडात्मक कदम नहीं उठाए जाएंगे।
15 दिन में केंद्र के सामने रखना होगा पक्ष
हाईकोर्ट की एकलपीठ ने याचिकाकर्ताओं को शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968 की धारा 18 के तहत केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव अथवा सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करने के लिए 15 दिन का समय दिया है।
निर्देश के अनुसार, संबंधित प्राधिकारी को दोनों पक्षों की बात सुननी होगी और उपलब्ध दस्तावेजों तथा साक्ष्यों का परीक्षण करना होगा। इसके बाद 60 दिन के भीतर तर्कसंगत निर्णय लिया जाना है।
जब तक सक्षम प्राधिकारी इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं ले लेता, तब तक उप-विभागीय अधिकारी की ओर से जारी बेदखली संबंधी कार्रवाई और याचिकाकर्ताओं के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लागू रहेगी।
क्या है रियाज मंजिल से जुड़ा विवाद?
भोपाल के कोहेफिजा क्षेत्र के ग्राम कोहेफिजा में स्थित रियाज मंजिल और उससे जुड़ी जमीनों को शत्रु संपत्ति के रूप में चिह्नित किए जाने को लेकर विवाद चल रहा है। संबंधित संपत्तियां तहसील हुजूर के अंतर्गत आती हैं और मामला खसरा नंबर 42 से जुड़ा हुआ है।
इस प्रकरण में याचिकाकर्ता आजम हसन खान ने बेदखली के लिए जारी नोटिसों को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में खसरा नंबर 42/19/1, जिसका क्षेत्रफल 0.5240 हेक्टेयर है, और खसरा नंबर 42/19/2, जिसका क्षेत्रफल 0.0830 हेक्टेयर है, से संबंधित कार्रवाई पर सवाल उठाए गए थे।
याचिकाकर्ता ने 29 अप्रैल 2024 को शत्रु संपत्ति अधिनियम की धारा 12 के तहत जारी वेस्टिंग सर्टिफिकेट को भी चुनौती दी थी।
नोटिस और सुनवाई का अवसर नहीं मिलने का आरोप
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में तर्क दिया गया कि वेस्टिंग सर्टिफिकेट जारी करने की प्रक्रिया में शत्रु संपत्ति नियम, 2015 के नियम 3 और 4 का पालन नहीं किया गया। उनका कहना था कि प्रमाणपत्र जारी करने से पहले उन्हें नोटिस नहीं दिया गया और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर मिला।
याचिकाकर्ता ने प्रशासनिक हस्तक्षेप और संभावित बेदखली की कार्रवाई से सुरक्षा देने की मांग की थी।
हालांकि, इन दलीलों के आधार पर संपत्ति के मालिकाना हक पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। अब संबंधित पक्षों के दस्तावेजों और दावों की जांच केंद्र के सक्षम प्राधिकारी के स्तर पर की जाएगी।
फैसला खिलाफ आने पर भी सात दिन की राहत
हाईकोर्ट ने आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए भी समय दिया है। यदि सक्षम प्राधिकारी का निर्णय याचिकाकर्ताओं के खिलाफ आता है, तो उस आदेश की सूचना मिलने के सात दिन तक उसे लागू नहीं किया जाएगा।
इस अवधि से प्रभावित पक्षों को आगे उपलब्ध कानूनी उपाय अपनाने का अवसर मिल सकेगा। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि निर्धारित समय के भीतर प्रस्तुत अभ्यावेदन को केवल समय-सीमा के आधार पर खारिज नहीं किया जाए।
आगे क्या होगा?
अब मामले में केंद्र सरकार के सक्षम प्राधिकारी को दोनों पक्षों की दलीलें सुनकर और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर निर्णय लेना होगा। यदि निर्णय प्रभावित पक्षों के विरुद्ध आता है, तो वे उपलब्ध कानूनी विकल्पों का सहारा ले सकते हैं।
यदि आगे न्यायिक स्तर पर राहत नहीं मिलती और संबंधित कानूनी प्रक्रिया इसकी अनुमति देती है, तो संपत्तियों को नियमों के अनुसार नीलामी की प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।
फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश से बेदखली की कार्रवाई रुकी रहेगी। रियाज मंजिल और उससे जुड़ी संपत्तियों की कानूनी स्थिति पर अंतिम निर्णय केंद्र के सक्षम प्राधिकारी की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।













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