कान्हा टाइगर रिजर्व में मादा बाघ शावक की मौत, CDV संक्रमण से मरने वाले बाघों की संख्या नौ

कान्हा टाइगर रिजर्व में मादा बाघ शावक की मौत, CDV से जुड़ा आंकड़ा नौ

मंडला। मध्यप्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी एक और चिंताजनक घटना सामने आई है। मुक्की परिक्षेत्र स्थित वन्यजीव उपचार केंद्र में भर्ती एक मादा बाघ शावक की इलाज के दौरान मौत हो गई। इस घटना के बाद कान्हा में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) से जुड़ी बाघों की मौत का आंकड़ा नौ बताया जा रहा है। हालांकि, इस शावक की मौत के वास्तविक कारण की अंतिम पुष्टि प्रयोगशाला जांच के बाद ही हो सकेगी।

वन विभाग की टीम ने शावक को 8 अक्टूबर को वन विकास निगम के मोहगांव प्रोजेक्ट क्षेत्र के अंतर्गत अरौली गांव के पास से रेस्क्यू किया था। उस समय उसकी शारीरिक स्थिति कमजोर थी। इसके बाद उसे मुक्की स्थित वन्यजीव उपचार केंद्र में भर्ती कराकर विशेषज्ञ पशु चिकित्सकों की निगरानी में उपचार शुरू किया गया।

कमजोर हालत में मिला था शावक

वन विभाग के अनुसार, मादा बाघ शावक को अरौली गांव के आसपास तलाश अभियान के दौरान रेस्क्यू किया गया था। उसे खोजने के लिए वन विभाग की टीम ने हाथियों की भी मदद ली थी, ताकि घने जंगल और आसपास के क्षेत्र में उसकी स्थिति का पता लगाया जा सके।

शावक कमजोर अवस्था में मिला था। उसे सुरक्षित तरीके से उपचार केंद्र पहुंचाया गया, जहां वन्यजीव चिकित्सकों ने उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी। इलाज और देखरेख के बावजूद रविवार, 18 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई।

शावक की मौत के बाद वन विभाग ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत पोस्टमार्टम कराया। जांच के दौरान लिए गए जैविक नमूने आगे की फॉरेंसिक और पैथोलॉजिकल जांच के लिए जबलपुर की प्रयोगशाला भेजे गए हैं।

CDV संक्रमण की आशंका, रिपोर्ट का इंतजार

कैनाइन डिस्टेंपर वायरस मांसाहारी वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। इस संक्रमण की आशंका कान्हा टाइगर रिजर्व में पहले भी बाघों की मौत के मामलों में सामने आई है।

हालांकि, इस मादा शावक की मौत को सीधे तौर पर CDV संक्रमण से जोड़ने से पहले प्रयोगशाला रिपोर्ट का इंतजार करना जरूरी है। प्रारंभिक जानकारी में संक्रमण की आशंका जताई गई है, लेकिन मौत का सटीक कारण रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

कान्हा में पहले भी इस वायरस से जुड़े मामलों के सामने आने के कारण वन्यजीवों की सेहत पर नजर रखना और संक्रमण की संभावित वजहों की जांच करना महत्वपूर्ण हो गया है।

एक दिन पहले महिला पर हमले की घटना

शावक को रेस्क्यू किए जाने से एक दिन पहले, 7 अक्टूबर की रात अरौली गांव में एक महिला पर बाघ के हमले की घटना हुई थी। जानकारी के अनुसार, करीब 50 वर्षीय रमली बाई मरावी अपने घर के आंगन में खाट पर सो रही थीं। इसी दौरान एक बाघ ने उन पर हमला कर दिया, जिससे उनके सिर और चेहरे पर चोटें आईं।

महिला की आवाज सुनकर उनका बेटा बाहर आया और मदद के लिए शोर मचाया। लोगों की आवाज सुनकर बाघ वहां से जंगल की ओर चला गया। घायल महिला को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।

इसके अगले दिन वन विभाग ने इलाके में तलाश अभियान चलाया। इसी दौरान कमजोर हालत में मादा बाघ शावक मिला, जिसे रेस्क्यू कर मुक्की स्थित वन्यजीव उपचार केंद्र पहुंचाया गया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह मान लेना उचित नहीं होगा कि महिला पर हमला करने और बाद में मृत मिले शावक की पहचान या घटना का पूरा क्रम बिना जांच के अंतिम रूप से स्थापित हो गया है।

NTCA के प्रोटोकॉल के तहत पोस्टमार्टम

शावक की मौत के बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) की मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार पोस्टमार्टम किया गया। इस प्रक्रिया में कान्हा टाइगर रिजर्व के वन्यप्राणी चिकित्सा अधिकारी, मंडला के पशुपालन विभाग के अधिकारी और बैहर के पशु चिकित्सक शामिल रहे।

पोस्टमार्टम के दौरान आवश्यक जैविक नमूने एकत्र किए गए और उन्हें जांच के लिए जबलपुर भेजा गया। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत शव का अंतिम निस्तारण किया गया।

वन विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में हुई इस कार्रवाई का उद्देश्य मौत के कारणों से जुड़े तथ्यों का पता लगाना और नियमानुसार प्रक्रिया पूरी करना था।

कान्हा में बाघों की सुरक्षा के सामने चुनौती

कान्हा टाइगर रिजर्व बाघ संरक्षण के लिहाज से मध्यप्रदेश के प्रमुख संरक्षित क्षेत्रों में शामिल है। यहां CDV जैसे संक्रामक रोगों की आशंका वन्यजीव प्रबंधन के लिए चुनौती बन सकती है। ऐसे संक्रमणों की निगरानी, समय पर पहचान और संभावित प्रसार को रोकने के उपाय महत्वपूर्ण होते हैं।

वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए यह समझना भी जरूरी है कि संक्रमण का स्रोत क्या है, वह किन परिस्थितियों में फैल रहा है और जंगल में रहने वाले अन्य मांसाहारी वन्यजीवों को इससे कितना जोखिम है। इन सवालों के जवाब जांच, निगरानी और वैज्ञानिक अध्ययन से ही मिल सकते हैं।

फिलहाल मादा बाघ शावक की मौत के कारण की अंतिम पुष्टि के लिए प्रयोगशाला रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि इस मामले में CDV संक्रमण की क्या भूमिका रही।

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