भोपाल में डंपर संचालकों का विरोध तेज, 4 लाख तक जुर्माने के खिलाफ थाने पहुंचे; 23 सितंबर से चक्का जाम की चेतावनी

भोपाल में 2 हजार डंपरों का चक्का जाम, 4 लाख तक जुर्माने के खिलाफ विरोध

भोपाल। भारी जुर्माने की कार्रवाई के विरोध में भोपाल के डंपर संचालकों का आंदोलन मंगलवार को और तेज हो गया। लोकल ट्रांसपोर्ट जागरूकता सहायता समिति और ट्रक एसोसिएशन से जुड़े लोगों ने कमला नगर थाने पहुंचकर प्रदर्शन किया। संगठन का दावा है कि भोपाल और आसपास के क्षेत्रों में करीब 2 हजार डंपरों के पहिए थम गए हैं, जबकि करीब 700 संचालक आंदोलन के समर्थन में हैं।

4 लाख रुपये तक की शास्ति का विरोध

डंपर संचालकों का कहना है कि खनिज परिवहन से जुड़ी कार्रवाई में कुछ वाहनों पर 4 लाख रुपये तक की शास्ति लगाई जा रही है। इसके अलावा 20 से 40 हजार रुपये तक की अतिरिक्त राशि वसूले जाने का भी संगठन ने दावा किया है।

प्रदर्शनकारियों के मुताबिक पिछले करीब तीन वर्षों से ऐसी कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी रकम के जुर्माने के कारण ट्रांसपोर्ट कारोबार चलाना मुश्किल हो रहा है।

चूनाभट्टी से कोलार तक सड़क किनारे खड़े डंपर

आंदोलन के तहत बड़ी संख्या में डंपरों को अलग-अलग स्थानों पर खड़ा किया गया है। संगठन के अनुसार चूनाभट्टी से सर्वधर्म ब्रिज तक कोलार रोड के दोनों ओर वाहन खड़े किए गए हैं।

इसके अलावा ईंटखेड़ी, रायसेन रोड और 11 मील क्षेत्र में भी डंपरों के खड़े होने की जानकारी संगठन ने दी है। इससे कुछ मार्गों पर यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की बात सामने आई है।

अवैध खनन पर भी उठाए सवाल

प्रदर्शन के दौरान रातीबड़ इलाके में कथित अवैध खनन का मुद्दा भी उठाया गया। समिति का आरोप है कि अवैध खनन से जुड़े मामलों में कार्रवाई का दायरा खनिज परिवहन करने वाले वाहन मालिकों और चालकों तक ज्यादा पहुंच रहा है।

प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि अवैध खनन, पर्यावरणीय नुकसान और खनिज परिवहन से जुड़े मामलों की अलग-अलग जांच हो तथा जिसकी जो भूमिका हो, उसी के अनुसार कार्रवाई की जाए।

कलेक्टर को सौंपा आवेदन

डंपर संचालकों के संगठन ने कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी को आवेदन देकर चार लाख रुपये तक की शास्ति से संबंधित कार्रवाई की समीक्षा करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि जिन मामलों में वाहन मालिक या चालक की प्रत्यक्ष जिम्मेदारी नहीं है, वहां राहत मिलनी चाहिए।

समिति ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और कथित उत्पीड़न रोकने की मांग भी रखी है।

मंत्रालय और अधिकारियों से संपर्क का दावा

संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि समस्या के समाधान के लिए मंत्रालय, संबंधित विभागों और स्थानीय प्रशासन के अधिकारियों से संपर्क किया गया, लेकिन उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली। इसके बाद आंदोलन का रास्ता अपनाया गया।

संचालकों ने अपनी मांगों को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने रखने की बात भी कही है।

23 सितंबर से चक्का जाम की चेतावनी

डंपर संचालकों ने आंदोलन को आगे बढ़ाने की चेतावनी दी है। संगठन के अनुसार यदि 22 सितंबर तक उनकी मांगों पर राहत नहीं मिलती है, तो 23 सितंबर 2026 से चूनाभट्टी चौराहे पर चक्का जाम किया जाएगा।

संचालकों ने कहा है कि मांगों पर निर्णय होने तक विरोध जारी रखा जाएगा।

रेत-गिट्टी की सप्लाई पर पड़ सकता है असर

डंपरों का संचालन लंबे समय तक प्रभावित रहा तो निर्माण कार्यों के लिए इस्तेमाल होने वाली रेत, गिट्टी और अन्य सामग्री की ढुलाई पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। डंपर संचालकों का कहना है कि इन वाहनों के जरिए बड़ी मात्रा में निर्माण सामग्री शहर तक पहुंचती है।

अब प्रशासन और संबंधित विभाग इस विवाद को किस तरह सुलझाते हैं, इस पर आंदोलन की अगली दिशा निर्भर करेगी।

नोट: 2 हजार डंपर, 700 संचालकों के समर्थन और जुर्माने से जुड़े आंकड़े प्रदर्शनकारी संगठन के दावों पर आधारित हैं। प्रशासन या संबंधित विभाग की ओर से इन दावों पर अलग आधिकारिक आंकड़े उपलब्ध होने पर खबर अपडेट की जा सकती है।

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