सागर: देहार नदी में तैरती मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की अनोखी झांकी
सागर। मध्यप्रदेश के सागर जिले के चतुर्भटा गांव में शारदीय नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की अनोखी जल-झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। देहार नदी के बीच तैरती इस झांकी में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को सजाया गया है। गांव के युवाओं ने अपनी रचनात्मक सोच से प्लास्टिक की टंकियों को नाव की तरह इस्तेमाल कर यह अनूठी व्यवस्था तैयार की है।
नवरात्रि के अवसर पर तैयार की गई इस झांकी को देखने और मां दुर्गा के दर्शन करने के लिए आसपास के क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। धार्मिक आस्था के साथ युवाओं की मेहनत और कुछ नया करने का प्रयास भी इस आयोजन को खास बना रहा है।
देहार नदी में सजी मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की झांकी
चतुर्भटा गांव में तैयार की गई जल-झांकी में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को स्थान दिया गया है। इसमें मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री के स्वरूप शामिल हैं।
इन स्वरूपों को आकर्षक तरीके से सजाकर नदी के बीच स्थापित किया गया है। पानी पर तैरती झांकी श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बन गई है। नवरात्रि के दौरान देवी के नौ स्वरूपों की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इसी धार्मिक भावना को ध्यान में रखते हुए ग्रामीणों ने इस बार झांकी को पारंपरिक सजावट से अलग रूप देने का प्रयास किया।
प्लास्टिक की टंकियों से तैयार किया नाव जैसा ढांचा
इस आयोजन की सबसे खास बात इसे तैयार करने का तरीका है। गांव के युवाओं ने प्लास्टिक की टंकियों को आपस में जोड़कर नाव जैसा ढांचा बनाया। इसी आधार पर नदी के बीच मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की झांकी सजाई गई।
युवाओं की इस पहल ने स्थानीय स्तर पर लोगों का ध्यान खींचा है। सीमित साधनों के बीच अलग तरह की धार्मिक सजावट तैयार करने का यह प्रयास ग्रामीणों की सामूहिक भागीदारी और रचनात्मकता को दर्शाता है।
समिति के सदस्य इंदर बजाज के अनुसार, गांव में पिछले नौ वर्षों से ग्रामीण मिलकर माता रानी की स्थापना करते आ रहे हैं। इस बार युवाओं ने आयोजन को नया स्वरूप देने का विचार किया और उसी के तहत नदी में तैरने वाली झांकी तैयार की।
नदी किनारे पीपल के पेड़ के पास स्थापित है मुख्य प्रतिमा
देहार नदी में सजाई गई जल-झांकी के अलावा नदी किनारे स्थित विशाल पीपल के पेड़ के पास मां दुर्गा की मुख्य प्रतिमा भी स्थापित की गई है। यहां श्रद्धालु पहुंचकर पूजा-अर्चना कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने झांकी के साथ एक कलात्मक गुफा भी तैयार की है, जो पूरे धार्मिक परिसर की सजावट को और आकर्षक बनाती है। देवी के विभिन्न स्वरूपों, गुफा और नदी के बीच सजी झांकी के कारण यहां नवरात्रि का विशेष माहौल दिखाई दे रहा है।
नौ वर्षों से जारी है ग्रामीणों की परंपरा
चतुर्भटा गांव में माता रानी की स्थापना की परंपरा पिछले नौ वर्षों से चली आ रही है। हर साल ग्रामीण सामूहिक रूप से आयोजन करते हैं। इस बार युवाओं ने परंपरा को बनाए रखते हुए उसमें एक नया प्रयोग जोड़ा है।
नवरात्रि के दौरान गांव में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों में ग्रामीणों की भागीदारी से पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में नजर आ रहा है।
चतुर्भटा की यह जल-झांकी दिखाती है कि धार्मिक आयोजनों में स्थानीय स्तर पर किए गए नए प्रयोग किस तरह लोगों के आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना और युवाओं की रचनात्मक पहल ने इस बार गांव के नवरात्रि उत्सव को एक अलग पहचान दी है।












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