इंदौर मेट्रो के अंडरग्राउंड रूट पर विरोध, 17 अक्टूबर को प्रदर्शन
इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में भूमिगत मेट्रो परियोजना को लेकर विरोध और तेज होता नजर आ रहा है। बंगाली चौराहे से बड़ा गणपति तक प्रस्तावित अंडरग्राउंड रूट को लेकर स्थानीय रहवासियों और विभिन्न संस्थाओं ने आपत्ति जताई है। प्रदर्शनकारियों को आशंका है कि सुरंग निर्माण के दौरान पुराने मकानों, भूजल स्रोतों और पर्यावरण को नुकसान पहुंच सकता है। इसी मुद्दे पर शनिवार, 17 अक्टूबर को सुबह 9:30 बजे रीगल चौराहे पर विरोध प्रदर्शन की तैयारी की गई है।
दूसरी ओर, मध्य प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPMRCL) ने भूमिगत सुरंग निर्माण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपना पक्ष रखा है। मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि आसपास की इमारतों की स्थिति का सर्वेक्षण किया जाता है और जमीन में होने वाले बदलावों पर नजर रखने के लिए सेंसर लगाए जाते हैं। इसी बीच, भूमिगत कॉरिडोर के निर्माण के लिए दूसरी टनल बोरिंग मशीन (TBM) ‘सरस्वती’ की लॉन्चिंग प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है।
बंगाली चौराहे से बड़ा गणपति तक के रूट पर आपत्ति
भूमिगत मेट्रो के प्रस्तावित मार्ग को लेकर तिलक नगर, गोयल नगर, साईनाथ कॉलोनी, पत्रकार कॉलोनी और आसपास के क्षेत्रों के रहवासी पहले भी विरोध दर्ज करा चुके हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे इंदौर में मेट्रो सुविधा के विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन घनी आबादी वाले इलाकों से भूमिगत रूट गुजरने को लेकर उन्हें कई तरह की चिंताएं हैं।
रहवासियों के मुताबिक, क्षेत्र में कई मकान पुराने हैं। ऐसे में सुरंग की खुदाई और निर्माण के दौरान कंपन होने से मकानों की नींव कमजोर पड़ने या दीवारों में दरारें आने की आशंका है। लोगों ने भूजल स्रोतों और बोरिंग पर संभावित प्रभाव को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि प्रस्तावित मार्ग की समीक्षा की जाए और घनी आबादी वाले क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक रूट पर विचार किया जाए। इससे पहले भी स्थानीय नागरिक बंगाली चौराहे के पास एकत्र होकर अपनी आपत्तियां अधिकारियों तक पहुंचा चुके हैं।
17 अक्टूबर को रीगल चौराहे पर प्रदर्शन की तैयारी
भूमिगत मेट्रो परियोजना के विरोध में शहर की विभिन्न संस्थाओं और स्थानीय रहवासियों ने शनिवार सुबह 9:30 बजे रीगल चौराहे पर प्रदर्शन करने की तैयारी की है। प्रदर्शन के जरिए पर्यावरण, पुराने भवनों और आसपास के रहवासी क्षेत्रों पर संभावित प्रभाव का मुद्दा उठाया जाएगा।
विरोध करने वाले समूहों का कहना है कि विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाते समय स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा और पर्यावरण से जुड़े सवालों पर भी पर्याप्त ध्यान दिया जाना चाहिए। उनकी मांग है कि निर्माण से पहले आशंकाओं का समाधान किया जाए और लोगों को सुरक्षा संबंधी जानकारी स्पष्ट रूप से दी जाए।
हालांकि, मकानों को वास्तविक नुकसान होने या भूजल स्रोत प्रभावित होने के संबंध में इन आशंकाओं की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है। इन मुद्दों पर तकनीकी सर्वेक्षण और विशेषज्ञों की रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।
मेट्रो प्रबंधन ने बताया सुरक्षा का इंतजाम
MPMRCL के प्रबंध संचालक एस. कृष्ण चैतन्य के अनुसार, भूमिगत सुरंग निर्माण के दौरान आम लोगों और आसपास की इमारतों की सुरक्षा के लिए कई स्तरों पर निगरानी की व्यवस्था की गई है।
मेट्रो प्रबंधन के मुताबिक, सुरंग के आसपास लगभग 30 मीटर के दायरे में आने वाले भवनों की स्थिति का सर्वेक्षण किया जाता है। इसके अलावा, जमीन और इमारतों में होने वाले बदलावों की निगरानी के लिए उपकरण और सेंसर लगाए जाते हैं।
इन सेंसरों से जमीन या भवनों में होने वाले मामूली बदलावों की जानकारी विशेषज्ञों को मिल सकती है। जरूरत पड़ने पर इसके आधार पर समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं। प्रबंधन का कहना है कि सुरंग निर्माण के दौरान भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा और जमीन की स्थिरता पर लगातार नजर रखी जाएगी।
मेट्रो प्रबंधन ने यह भी बताया कि टनल बोरिंग मशीन (TBM) के जरिए सतह से काफी नीचे सुरंग बनाई जाती है। दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु और लखनऊ जैसे शहरों में भी घनी आबादी वाले क्षेत्रों में भूमिगत मेट्रो का निर्माण किया गया है या किया जा रहा है।
‘नर्मदा’ के बाद अब ‘सरस्वती’ से होगी सुरंग की खुदाई
इंदौर मेट्रो के भूमिगत कॉरिडोर के निर्माण को आगे बढ़ाने के लिए दूसरी टनल बोरिंग मशीन ‘सरस्वती’ भी तैयार हो गई है। मेट्रो प्रबंधन के अनुसार, एयरपोर्ट स्थित निर्माण शाफ्ट में इस मशीन की लॉन्चिंग प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। इससे भूमिगत हिस्से में सुरंग निर्माण के काम को गति मिलने की उम्मीद है।
इससे पहले पहली मशीन ‘नर्मदा’ को भी भूमिगत सुरंग निर्माण के लिए लॉन्च किया गया था। अब ‘सरस्वती’ के तैयार होने से परियोजना में एक और मशीन का उपयोग किया जा सकेगा। दोनों मशीनों का इस्तेमाल एयरपोर्ट से बड़ा गणपति तक भूमिगत कॉरिडोर के निर्माण में किया जाना है।
मेट्रो प्रबंधन के मुताबिक, ‘सरस्वती’ का वजन लगभग 410 मीट्रिक टन है। मशीन के भारी वजन और बड़े आकार को देखते हुए इसे एयरपोर्ट स्थित शाफ्ट में उतारने के लिए विशेष इंजीनियरिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया।
पहले मशीन के विभिन्न हिस्सों को जमीन के स्तर पर असेंबल किया गया। इसके बाद मेगालिफ्ट सिस्टम और स्ट्रैंड जैक असेंबली की मदद से इसे नियंत्रित तरीके से शाफ्ट में उतारा गया। इस प्रक्रिया में इस्तेमाल की गई तकनीकी प्रणाली एक हजार मीट्रिक टन से अधिक भार उठाने में सक्षम है। मशीन की लॉन्चिंग के दौरान इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों ने प्रत्येक चरण की निगरानी की।
अब सुरक्षा और रूट को लेकर चर्चा पर रहेगी नजर
इंदौर मेट्रो परियोजना के सामने अब भूमिगत निर्माण को आगे बढ़ाने के साथ स्थानीय नागरिकों की चिंताओं का समाधान करने की चुनौती भी है। एक ओर मेट्रो प्रबंधन तकनीकी निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था का हवाला दे रहा है, तो दूसरी ओर रहवासी संभावित नुकसान की आशंका के कारण रूट की समीक्षा की मांग कर रहे हैं।
17 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन के दौरान नागरिक अपनी आपत्तियां और मांगें सामने रखेंगे। इसके बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मेट्रो प्रबंधन और संबंधित अधिकारी इन चिंताओं पर क्या कदम उठाते हैं।
फिलहाल ‘सरस्वती’ TBM की लॉन्चिंग प्रक्रिया पूरी होने के साथ भूमिगत मेट्रो निर्माण का तकनीकी काम आगे बढ़ रहा है, जबकि प्रस्तावित रूट को लेकर स्थानीय विरोध भी जारी है।












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