सीहोर में आदिवासियों का भोपाल कूच स्थगित, CM के आश्वासन के बाद लौटे
सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने और फसलों को नुकसान पहुंचने के विरोध में चल रहा आंदोलन फिलहाल स्थगित हो गया है। अपनी मांगों को लेकर भोपाल की ओर पैदल कूच कर रहे आदिवासी प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी से मिले आश्वासन के बाद घर लौटने का फैसला किया। बुधनी विधायक रमाकांत भार्गव ने गुरुवार देर रात प्रदर्शनकारियों को सरकार की ओर से मिले भरोसे की जानकारी दी। इसके बाद प्रशासन ने उनकी सुरक्षित वापसी के लिए बसों की व्यवस्था की।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी ने प्रभावित परिवारों को जमीन के पट्टे देने और वन विकास निगम की कार्रवाई की उच्चस्तरीय जांच कराने का आश्वासन दिया है। हालांकि, मकानों और फसलों के नुकसान के मुआवजे तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई जैसे मुद्दों पर अभी आगे के फैसलों का इंतजार है।
शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में मुख्यमंत्री से मिला प्रतिनिधिमंडल
आदिवासी परिवारों की मांगों को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में 16 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी से मुलाकात की। मुख्यमंत्री निवास पर हुई इस बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और आदिवासी वित्त विकास निगम की अध्यक्ष निर्मला बरेला भी मौजूद थीं।
प्रतिनिधिमंडल में भिलाला, बरेला, कोरकू और गोंड सहित विभिन्न आदिवासी समुदायों के प्रतिनिधि शामिल थे। उन्होंने कोसमी गांव में मकान तोड़े जाने, फसलों को हुए नुकसान और कार्रवाई के दौरान वन विकास निगम के अधिकारियों के कथित व्यवहार का मुद्दा उठाया।
बैठक में प्रभावित परिवारों की समस्याओं और उनकी मांगों पर चर्चा हुई। इसके बाद मुख्यमंत्री की ओर से जमीन के पट्टे देने और कार्रवाई की उच्चस्तरीय जांच का भरोसा मिलने की जानकारी सामने आई। विधायक रमाकांत भार्गव ने प्रदर्शनकारियों को इस आश्वासन से अवगत कराया।
12 परिवारों के मकान टूटने के बाद शुरू हुआ था आंदोलन
कोसमी गांव में 11 अक्टूबर को वन विभाग की कार्रवाई के दौरान 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला सामने आया था। प्रभावित परिवारों ने मकानों और फसलों को हुए नुकसान का मुद्दा उठाते हुए विरोध शुरू किया। उनकी मांग थी कि नुकसान की भरपाई की जाए, जमीन से जुड़े मामलों का समाधान किया जाए और कार्रवाई के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच कर उचित कदम उठाए जाएं।
स्थानीय स्तर पर बातचीत से समाधान नहीं निकलने के बाद विरोध प्रदर्शन ने व्यापक रूप ले लिया। आंदोलनकारियों ने धरना दिया और फिर अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाने के लिए भोपाल की ओर पैदल मार्च शुरू किया।
रिपोर्टों के मुताबिक, इस आंदोलन में खिवनी अभयारण्य क्षेत्र के 35 से अधिक गांवों के लोगों के शामिल होने की बात कही गई। प्रदर्शनकारियों की संख्या पांच हजार से अधिक बताई गई थी। हालांकि, यह संख्या आंदोलन से जुड़ी रिपोर्टों में सामने आई जानकारी पर आधारित है।
करीब 40 किलोमीटर पैदल चलने के बाद स्थगित हुई पदयात्रा
आंदोलन से जुड़े लोगों के अनुसार, प्रदर्शनकारी लगभग 40 से 42 किलोमीटर तक पैदल चल चुके थे। करीब पांच दिन तक चले धरने और भोपाल कूच के बाद मुख्यमंत्री स्तर पर हुई बातचीत से समाधान की उम्मीद बनी।
विधायक रमाकांत भार्गव ने सरकार से मिले आश्वासन की जानकारी देते हुए प्रदर्शनकारियों को वापस लौटने के लिए कहा। इसके बाद पदयात्रा को सर्वसम्मति से स्थगित करने का निर्णय लिया गया। प्रशासन ने लोगों को उनके गांवों तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए बसों की व्यवस्था की।
फिलहाल पदयात्रा और धरना स्थगित हो गया है, लेकिन इससे प्रभावित परिवारों की सभी समस्याओं का समाधान हो गया है, ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। जमीन के पट्टे, नुकसान के मुआवजे और कार्रवाई में जिम्मेदारी तय करने जैसे विषयों पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण रहेगी।
वन विकास निगम की रिपोर्ट में अतिक्रमण और पौधों को नुकसान का दावा
इस मामले में वन विकास निगम और सीहोर जिला प्रशासन की रिपोर्ट का पक्ष भी सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित क्षेत्र आरक्षित वन भूमि है और वहां अतिक्रमण तथा सागौन के पौधों को नुकसान पहुंचाए जाने का दावा किया गया है।
रिपोर्ट में उल्लेख है कि वर्ष 2021 में 135 हेक्टेयर क्षेत्र में 3.37 लाख से अधिक सागौन के पौधे लगाए गए थे। इसमें करीब 78,700 पौधे काटे जाने और कंपार्टमेंट 426 में 31.48 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण का दावा किया गया है।
दूसरी ओर, प्रभावित परिवारों ने मकान और फसलें नष्ट होने तथा कार्रवाई को लेकर अपनी शिकायतें उठाई हैं। ऐसे में प्रस्तावित उच्चस्तरीय जांच में वन भूमि की स्थिति, संबंधित परिवारों के दावे, कार्रवाई की प्रक्रिया और नुकसान से जुड़े सभी तथ्यों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही विवाद से जुड़े पहलुओं पर अधिक स्पष्ट स्थिति बन सकेगी।
14 अक्टूबर को अधिकारियों ने भी की थी चर्चा
इससे पहले 14 अक्टूबर को संभागायुक्त कर्मवीर शर्मा, सीहोर कलेक्टर बालागुरु के. और पुलिस अधीक्षक सोनाक्षी सक्सेना सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने कोसमी पहुंचकर प्रभावित परिवारों से चर्चा की थी। हालांकि, उस समय कोई अंतिम समाधान नहीं निकल पाया था।
अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी से मुलाकात और सरकार के आश्वासन के बाद आंदोलनकारियों ने फिलहाल भोपाल कूच रोक दिया है। प्रशासन की ओर से उनकी घर वापसी की व्यवस्था भी की गई।
अब जमीन के पट्टे और मुआवजे पर रहेगी नजर
आदिवासी परिवारों की पदयात्रा स्थगित होने के बाद अब सरकार की ओर से किए गए आश्वासनों पर अमल का इंतजार है। प्रभावित परिवारों को जमीन के पट्टे कब मिलेंगे, मकानों और फसलों को हुए नुकसान का मुआवजा किस आधार पर तय होगा और जांच में यदि किसी अधिकारी की जिम्मेदारी सामने आती है तो क्या कार्रवाई की जाएगी—ये प्रमुख सवाल बने हुए हैं।
फिलहाल आंदोलन स्थगित है, लेकिन प्रभावित परिवारों की मांगों का अंतिम समाधान जमीन पर होने वाली कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।












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