भोपाल में आर्मी डे परेड 2027 की तैयारी, 3.5 किमी सड़क होगी मजबूत
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में 15 जनवरी 2027 को होने वाली आर्मी डे परेड के लिए तैयारियों की रूपरेखा बनाई जा रही है। भारतीय सेना के शौर्य, अनुशासन और आधुनिक सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करने वाले इस आयोजन को देखते हुए बीएचईएल क्षेत्र के कालीबाड़ी मार्ग को विशेष रूप से तैयार करने की योजना है। करीब 3.5 किलोमीटर लंबे सड़क हिस्से को मजबूत करने के साथ इसकी चौड़ाई लगभग 15 मीटर तक करने का प्रस्ताव है, ताकि भारी सैन्य वाहन और 60 टन तक के टैंक आसानी से गुजर सकें।
आयोजन में लगभग 50 हजार दर्शकों के पहुंचने का अनुमान है। इसी को ध्यान में रखते हुए सड़क, बैठने की व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था और सैनिकों के ठहरने से जुड़ी तैयारियां की जा रही हैं। योजना के तहत परेड मार्ग के डिवाइडर हटाने, कुछ चौराहों में बदलाव करने और जरूरत के अनुसार बिजली के खंभों व स्ट्रीट लाइट को स्थानांतरित करने जैसे काम भी किए जा सकते हैं।
बीएचईएल के कालीबाड़ी मार्ग पर होगी मुख्य परेड
आर्मी डे परेड के लिए बीएचईएल क्षेत्र का कालीबाड़ी मार्ग मुख्य स्थल के रूप में प्रस्तावित है। इस मार्ग पर भारी सैन्य वाहनों की आवाजाही को ध्यान में रखकर सड़क की मजबूती और चौड़ाई बढ़ाने की योजना बनाई गई है।
प्रस्तावित योजना के अनुसार, सड़क के लगभग 3.5 किलोमीटर हिस्से को मजबूत किया जाएगा। मार्ग की चौड़ाई करीब 15 मीटर करने के साथ बीच के डिवाइडर को हटाने की भी तैयारी है। सड़क पर वाहनों की लेन और परेड की निर्धारित लाइन की मार्किंग की जाएगी, जिससे सैन्य टुकड़ियों और भारी उपकरणों की आवाजाही व्यवस्थित ढंग से हो सके।
टैंक और बख्तरबंद वाहन सामान्य यातायात में इस्तेमाल होने वाले वाहनों से काफी भारी होते हैं। इसलिए ऐसे वाहनों की आवाजाही के लिए सड़क की सतह, मजबूती और उपलब्ध चौड़ाई का विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है। परेड के लिए प्रस्तावित सड़क सुधार इसी आवश्यकता को ध्यान में रखकर किए जाने हैं।
50 हजार दर्शकों के लिए बैठने की व्यवस्था
परेड को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना है। इसके लिए दर्शकों को अलग-अलग श्रेणियों में बैठाने की योजना बनाई गई है।
प्रस्तावित व्यवस्था के मुताबिक, वीवीआईपी दर्शकों के लिए करीब 500, वीआईपी के लिए 2,500 और आम दर्शकों के लिए लगभग 38 हजार सीटों की व्यवस्था की जा सकती है। इसके अतिरिक्त सैन्य प्रदर्शन और अन्य कार्यक्रमों के दौरान भी दर्शकों के लिए अलग-अलग स्थान निर्धारित किए जाने हैं।
इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी को देखते हुए प्रवेश और निकास मार्ग, बैठने की क्षमता, बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण होगी। यातायात का दबाव कम रखने तथा दर्शकों को आयोजन स्थल तक पहुंचाने के लिए भी समन्वित योजना की जरूरत होगी।
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना भी जताई गई है, हालांकि उनकी उपस्थिति की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
जनवरी में होगी फाइनल रिहर्सल
आर्मी डे परेड की अंतिम तैयारियों के लिए जनवरी में रिहर्सल का कार्यक्रम प्रस्तावित है। उपलब्ध योजना के अनुसार, 10, 12 और 13 जनवरी को फाइनल रिहर्सल की जा सकती है। जवानों की प्रैक्टिस 15 दिसंबर से शुरू करने की तैयारी है।
परेड स्थल को 7 जनवरी तक पूरी तरह तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके बाद निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अभ्यास और अंतिम व्यवस्थाओं की समीक्षा की जाएगी। 15 जनवरी को मुख्य परेड आयोजित होगी, जिसमें सेना के जवान अपनी प्रस्तुति देंगे।
इसके अलावा शौर्य संध्या के लिए 10 और 13 जनवरी को रिहर्सल प्रस्तावित है। अपर लेक क्षेत्र में प्रस्तावित इंटीग्रेटेड कॉम्बेट डेमो की तैयारियां 5 जनवरी तक पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। सैन्य उपकरणों के स्थिर और गतिशील प्रदर्शन की व्यवस्थाएं 2 जनवरी तक तैयार करने तथा 6 और 8 जनवरी को अभ्यास करने की योजना है।
इन कार्यक्रमों की अंतिम रूपरेखा और समय-सारणी के संबंध में संबंधित विभागों की ओर से जारी निर्देशों को ही अंतिम माना जाएगा।
जंबूरी मैदान और हेमा स्कूल रोड पर लगेंगे टेंट
दूसरे शहरों और राज्यों से आने वाले सैनिकों के ठहरने के लिए भी व्यापक इंतजाम प्रस्तावित हैं। योजना के तहत जंबूरी मैदान में लगभग 700 और हेमा स्कूल रोड पर 300 टेंट लगाए जा सकते हैं। इस तरह कुल करीब एक हजार टेंट में लगभग 4,500 सैनिकों के ठहरने की व्यवस्था करने का लक्ष्य है।
इन शिविरों में पेयजल, स्वच्छता, फर्नीचर, मोबाइल शौचालय, सीसीटीवी कैमरे और बैरिकेडिंग जैसी सुविधाएं जुटाई जानी हैं। इसके अलावा लगभग 10 वीवीआईपी अतिथि कक्ष तैयार करने की योजना भी सामने आई है।
जंबूरी मैदान में सैन्य उपकरणों के प्रदर्शन के लिए लगभग 360 मीटर लंबा और 250 मीटर चौड़ा क्षेत्र तैयार करने की योजना है। यहां स्थिर और गतिशील प्रदर्शन के साथ अन्य जरूरी व्यवस्थाओं के लिए अलग-अलग हिस्से निर्धारित किए जाएंगे। भोजन, धुलाई, प्रशासनिक गतिविधियों और सुरक्षा से जुड़े क्षेत्रों की व्यवस्था भी इसी योजना का हिस्सा है।
अपर लेक में सैन्य क्षमता का प्रदर्शन
आर्मी डे आयोजन के दौरान अपर लेक क्षेत्र में इंटीग्रेटेड कॉम्बेट डेमो प्रस्तावित है। इस तरह के प्रदर्शन में सेना की परिचालन क्षमता, विभिन्न सैन्य संसाधनों के समन्वय और सामरिक गतिविधियों को दर्शाया जा सकता है।
आयोजन की रूपरेखा में सैन्य उपकरणों के स्थिर और गतिशील प्रदर्शन को भी शामिल किया गया है। इससे दर्शकों को सेना के उपकरणों और उनकी कार्यप्रणाली को करीब से देखने का अवसर मिल सकता है।
इस तरह के कार्यक्रमों के लिए केवल प्रदर्शन स्थल तैयार करना पर्याप्त नहीं होता। सुरक्षा घेरा, दर्शकों की आवाजाही, उपकरणों के संचालन के लिए पर्याप्त जगह और संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय भी महत्वपूर्ण होता है। इसलिए इन सभी व्यवस्थाओं को तय समयसीमा में पूरा करने पर ध्यान दिया जा रहा है।
सड़क के साथ चौराहों और नागरिक सुविधाओं में भी सुधार
परेड मार्ग को व्यवस्थित करने के लिए तीन से चार चौराहों में बदलाव की योजना है। जरूरत के अनुसार डिवाइडर हटाने, स्ट्रीट लाइट स्थानांतरित करने, सड़क सुधारने और अतिक्रमण हटाने जैसे काम किए जा सकते हैं। सड़क किनारे लगे डिस्प्ले और बिजली के खंभों को भी आवश्यकतानुसार दूसरी जगह शिफ्ट करने का प्रस्ताव है।
ड्रेनेज व्यवस्था को व्यवस्थित करने और सड़क किनारे की नागरिक सुविधाओं में सुधार करने की योजना भी शामिल है। इन कामों का उद्देश्य सैन्य वाहनों की आवाजाही के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध कराने के साथ आयोजन स्थल को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना है।
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार संबंधित विभागों को काम का औपचारिक आवंटन किया जाना बाकी था। इसलिए कार्यों की वास्तविक शुरुआत, लागत और पूर्णता की समयसीमा को लेकर आधिकारिक आदेशों और आगे जारी होने वाली जानकारी पर नजर रहेगी।
भोपाल के लिए राष्ट्रीय स्तर का महत्वपूर्ण आयोजन
भोपाल में आर्मी डे परेड आयोजित होना राजधानी के लिए महत्वपूर्ण अवसर होगा। इससे भारतीय सेना की उपलब्धियों और सैन्य क्षमता को आम नागरिकों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। आयोजन के लिए बड़ी संख्या में सैनिकों, अधिकारियों और दर्शकों की मौजूदगी को देखते हुए शहर की व्यवस्थाओं पर भी विशेष ध्यान देना होगा।
सड़क सुधार से लेकर टेंट, दर्शक दीर्घा, सैन्य प्रदर्शन और यातायात प्रबंधन तक कई विभागों को मिलकर काम करना होगा। तय समयसीमा में तैयारियां पूरी होना इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि परेड से पहले अभ्यास और अंतिम निरीक्षण के लिए पर्याप्त समय चाहिए।
फिलहाल तैयारियां प्रस्तावित कार्यक्रम और लक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही हैं। आने वाले महीनों में सड़क निर्माण, आयोजन स्थलों और दर्शकों की सुविधा से जुड़े कामों की प्रगति पर नजर रहेगी। 15 जनवरी 2027 को होने वाली परेड के लिए इन व्यवस्थाओं का समय पर पूरा होना आयोजन की सफलता में अहम भूमिका निभाएगा।












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