इटारसी में केंद्रीय विद्यालय की प्राचार्य 3 लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार
भोपाल/इटारसी। मध्यप्रदेश में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने इटारसी स्थित केंद्रीय विद्यालय की प्राचार्य श्रद्धा पाठक और एक कथित बिचौलिये किरत सिंह सराठे को तीन लाख रुपये की रिश्वत के मामले में गिरफ्तार किया है। आरोप है कि स्कूल में नवीनीकरण का काम करने वाली भोपाल की फर्मों के करीब आठ लाख रुपये के लंबित बिलों का भुगतान जारी करने के बदले तीन लाख रुपये की अनुचित राशि मांगी गई थी।
सीबीआई ने शिकायत का सत्यापन करने के बाद मामले में कार्रवाई की और कथित रिश्वत राशि स्वीकार किए जाने के दौरान दोनों को पकड़ लिया। इसके बाद जांच एजेंसी ने इटारसी और आगरा स्थित आरोपियों के आवासीय एवं कार्यालय परिसरों में तलाशी ली। इस दौरान संपत्ति से संबंधित दस्तावेज जब्त किए गए हैं। एजेंसी मामले के वित्तीय लेनदेन और अन्य तथ्यों की जांच कर रही है। citeturn923377search2turn923377search4
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, इटारसी के ऑर्डिनेंस फैक्ट्री क्षेत्र स्थित केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-1 की प्राचार्य श्रद्धा पाठक के खिलाफ सीबीआई की भोपाल शाखा ने रिश्वत मांगने के आरोप में मामला दर्ज किया था। शिकायत भोपाल के व्यवसायी ऋषि जैन की ओर से दी गई थी।
शिकायत के मुताबिक, व्यवसायी और उनके परिवार से जुड़ी फर्मों को सितंबर 2026 में सरकारी ई-मार्केटप्लेस यानी GeM पोर्टल के माध्यम से स्कूल के तीन कमरों के नवीनीकरण का काम मिला था। यह कार्य पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-2, सीपीई इटारसी से संबंधित बताया गया है।
शिकायतकर्ता का दावा था कि नवीनीकरण का लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका था, लेकिन करीब आठ लाख रुपये के बिलों का भुगतान लंबित था। आरोप है कि इन बिलों का भुगतान स्वीकृत कराने के बदले प्राचार्य ने तीन लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। citeturn923377search3
बिलों के भुगतान के बदले रिश्वत मांगने का आरोप
सरकारी विभागों और संस्थानों में ठेके के माध्यम से काम करने वाली एजेंसियों को कार्यादेश की शर्तों के अनुसार भुगतान किया जाता है। इस मामले में भी शिकायतकर्ता की फर्मों को स्कूल के नवीनीकरण का काम मिला था और काम पूरा होने के बाद बकाया राशि जारी होनी थी।
शिकायत के अनुसार, तीन अक्तूबर को व्यवसायी लंबित भुगतान के संबंध में प्राचार्य के कक्ष में पहुंचे थे। इसी दौरान बिलों का भुगतान स्वीकृत करने के बदले तीन लाख रुपये की मांग किए जाने का आरोप लगाया गया।
शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया कि इससे पहले भुगतान से जुड़े एक अन्य मामले में भी उनसे अनुचित राशि मांगी गई थी। उन्होंने इस संबंध में सीबीआई को साक्ष्य उपलब्ध कराने की बात कही थी। हालांकि, इन पुराने आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और उनकी कानूनी स्थिति जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी। citeturn923377search3
शिकायत का सत्यापन कर सीबीआई ने बिछाया जाल
सीबीआई ने शिकायत मिलने के बाद पहले आरोपों का सत्यापन किया। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, छह अक्तूबर को स्वतंत्र गवाह की मौजूदगी में शिकायत की जांच की गई। एजेंसी के अनुसार, सत्यापन के दौरान लंबित बिलों के भुगतान के बदले तीन लाख रुपये मांगने की बात सामने आई।
इसके बाद सीबीआई ने सात अक्तूबर को मामला दर्ज किया और कथित रिश्वत लेने की कार्रवाई के लिए जाल बिछाया। आठ अक्तूबर को जारी जानकारी के अनुसार, प्राचार्य श्रद्धा पाठक और कथित बिचौलिये किरत सिंह सराठे को तीन लाख रुपये की राशि स्वीकार करते हुए पकड़ा गया।
सीबीआई की कार्रवाई के बाद दोनों को गिरफ्तार किया गया। मामले में उनकी भूमिका, कथित लेनदेन और भुगतान प्रक्रिया से संबंधित तथ्यों की जांच जारी है। citeturn923377search2turn923377search4
इटारसी और आगरा में तलाशी, संपत्ति से जुड़े दस्तावेज जब्त
गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी ने आरोपियों के इटारसी और आगरा स्थित आवासीय एवं कार्यालय परिसरों में तलाशी ली। इस दौरान संपत्ति से जुड़े दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
ऐसी तलाशी का उद्देश्य जांच के दौरान सामने आए लेनदेन, संपत्ति और अन्य संभावित साक्ष्यों से संबंधित जानकारी जुटाना होता है। जब्त दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि उनका मामले से क्या संबंध है।
सीबीआई ने मामले की जांच जारी रहने की जानकारी दी है। फिलहाल तलाशी में मिले दस्तावेजों के आधार पर किसी अतिरिक्त आरोप या निष्कर्ष को अंतिम रूप से स्थापित नहीं माना जा सकता। citeturn923377search4
GeM पोर्टल से मिले थे नवीनीकरण के कार्यादेश
इस मामले में सरकारी ई-मार्केटप्लेस यानी GeM पोर्टल भी महत्वपूर्ण है। सरकारी संस्थान विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं की खरीद तथा निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत कार्यादेश जारी करने के लिए इस मंच का इस्तेमाल करते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित फर्मों को स्कूल के नवीनीकरण का काम इसी पोर्टल के माध्यम से मिला था। शिकायतकर्ता का कहना था कि काम का बड़ा हिस्सा पूरा होने के बाद भी भुगतान लंबित था।
अब जांच में कार्यादेश, काम की वास्तविक प्रगति, बिलों की स्थिति, भुगतान स्वीकृत करने की प्रक्रिया और कथित रिश्वत की मांग से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। इससे मामले के सभी संबंधित तथ्यों को समझने में मदद मिलेगी।
भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच जारी
सीबीआई की इस कार्रवाई ने सरकारी संस्थानों में ठेकेदारों के भुगतान और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता का मुद्दा फिर सामने ला दिया है। यदि किसी कार्य का भुगतान स्वीकृत करने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप साबित होता है, तो यह सरकारी व्यवस्था में जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मामला होगा।
हालांकि, गिरफ्तारी अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। प्राचार्य श्रद्धा पाठक और किरत सिंह सराठे के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।
फिलहाल सीबीआई लंबित बिलों, कथित रिश्वत की राशि, संबंधित कार्यादेशों और तलाशी में मिले दस्तावेजों की जांच कर रही है। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर होगी।












Leave a Reply