शहडोल पुलिस का अनोखा ऑपरेशन, सीधी में किराए का कमरा लेकर दो फरार आरोपी गिरफ्तार
शहडोल। शहडोल जिले की खैरहा पुलिस ने फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एक अलग रणनीति अपनाते हुए सीधी में उनके ठिकाने के पास किराए का कमरा लिया। पुलिसकर्मी सामान्य नागरिकों की तरह वहां रहे और करीब दो दिनों तक संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखते रहे। आरोपी जैसे ही वापस अपने ठिकाने पर पहुंचे, पुलिस टीम ने मौके पर कार्रवाई कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया।
सीधी में छिपे होने की मिली थी सूचना
पुलिस को जानकारी मिली थी कि खैरहा थाना क्षेत्र की एक लूट के मामले में फरार शनि दीवान अपने साथी के साथ सीधी में रह रहा है। इस सूचना के बाद खैरहा थाना प्रभारी उमाशंकर चतुर्वेदी ने वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी दी और पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष टीम तैयार की गई।
टीम जब बताए गए पते पर पहुंची तो दोनों संदिग्ध उस समय वहां मौजूद नहीं थे। इसके बाद पुलिस ने तुरंत दबिश देने के बजाय उनकी वापसी का इंतजार करने की रणनीति बनाई।
पड़ोस में लेकर लिया किराए का कमरा
पुलिस टीम ने आरोपियों के मकान के बिल्कुल पास एक कमरा किराए पर लिया। स्थानीय लोगों के सामने पुलिसकर्मियों ने खुद को व्यापार के सिलसिले में सीधी आए व्यक्ति के रूप में बताया।
इसके बाद टीम ने सामान्य तरीके से रहकर लगातार निगरानी रखी। करीब दो दिन बाद दोनों आरोपी जब अपने कमरे पर लौटे तो पहले से तैयार पुलिस टीम ने उन्हें पकड़ लिया।
शनि दीवान पर लूट का मामला
पुलिस के अनुसार शनि दीवान 11 जुलाई 2026 को खैरहा थाना क्षेत्र में हुई एक लूट के मामले में फरार था। आरोप है कि बाइक सवार बदमाशों ने एक पिकअप चालक को रास्ते में रोककर नकदी और दस्तावेज छीन लिए थे।
इस मामले में एक आरोपी को घटना के कुछ समय बाद गिरफ्तार कर लिया गया था, जबकि शनि फरार बताया जा रहा था।
दूसरे आरोपी पर NDPS के मामले
गिरफ्तार दूसरे व्यक्ति की पहचान विकास जैसवाल के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक वह जैतपुर और अमलाई थाना क्षेत्रों में दर्ज NDPS एक्ट के मामलों में फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी पर पुलिस अधीक्षक स्तर से इनाम घोषित होने की भी जानकारी सामने आई है।
गिरफ्तारी के बाद शनि दीवान को खैरहा पुलिस और विकास जैसवाल को अमलाई पुलिस के हवाले किया गया। इसके बाद दोनों को शहडोल लाकर न्यायालय में पेश किया गया।
पुलिस टीम की रही अहम भूमिका
इस कार्रवाई में थाना प्रभारी उमाशंकर चतुर्वेदी के साथ प्रधान आरक्षक सतीश चौरसिया, सोनू सिंह और आरक्षक आलोक सिंह सहित पुलिस टीम के अन्य सदस्यों की भूमिका रही।
पुलिस के अनुसार, इस ऑपरेशन में धैर्य के साथ लगातार निगरानी रखना गिरफ्तारी की सफलता का प्रमुख हिस्सा रहा।
नोट: दोनों आरोपियों के खिलाफ दर्ज मामले और उनके संबंध में लगाए गए आरोप पुलिस रिकॉर्ड एवं जांच पर आधारित हैं। दोष सिद्धि का अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा।












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