जबलपुर हाईकोर्ट की चिंता: पॉक्सो की 14,531 अपीलें लंबित, कम उम्र के आरोपियों को लेकर भी सवाल

जबलपुर हाईकोर्ट की चिंता: POCSO की 14,531 अपीलें लंबित, कम उम्र के आरोपी भी बड़ी संख्या में

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश में POCSO Act से जुड़े मामलों और लंबित अपीलों की संख्या पर चिंता जताई है। मुख्य न्यायाधीश अल्पेश वाई. कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक रूसिया की युगलपीठ के सामने बताया गया कि हाईकोर्ट की तीनों पीठों में पॉक्सो से संबंधित 14,531 आपराधिक अपीलें लंबित हैं। अदालत ने कानून के प्रावधानों को लेकर व्यापक जन-जागरूकता की जरूरत पर जोर दिया है।

14 हजार से ज्यादा अपीलें लंबित

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के सामने लंबित मामलों से जुड़े आंकड़े रखे गए। कोर्ट के अनुसार बड़ी संख्या में पॉक्सो मामलों की अपीलें अभी लंबित हैं।

युगलपीठ ने कहा कि मामलों के समयबद्ध निपटारे के साथ-साथ नए प्रकरणों की संख्या कम करने के लिए कानून के बारे में सही जानकारी लोगों तक पहुंचाना भी जरूरी है।

16 से 18 साल के किशोर और 19 से 22 साल के युवा कई मामलों में

अदालत के आदेश में बताया गया कि लंबित अपीलों वाले कई मामलों में पीड़ितों की उम्र 16 से 18 वर्ष के बीच है, जबकि आरोपियों में बड़ी संख्या 19 से 22 वर्ष आयु वर्ग की बताई गई है।

कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि कुछ आरोपी खुद भी कम उम्र के हैं और पॉक्सो कानून के तहत दर्ज मामलों में जेल में हैं।

जागरूकता की कमी को बताया अहम पहलू

हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि कई किशोर और युवा POCSO Act के कानूनी प्रभावों से पूरी तरह परिचित नहीं होते। अदालत के मुताबिक कुछ मामलों में दोस्ती, प्रेम संबंध या किसी नाबालिग के साथ घर से चले जाने जैसी परिस्थितियां भी गंभीर कानूनी कार्रवाई का आधार बन सकती हैं।

कोर्ट ने इस संदर्भ में कानून की जानकारी स्कूलों, परिवारों और युवाओं तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई।

सरकार ने गिनाए जागरूकता कार्यक्रम

राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि POCSO और किशोर न्याय कानून को लेकर अलग-अलग स्तरों पर प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं।

सरकार के अनुसार राज्यस्तरीय कार्यक्रम में करीब 52 हजार लोग शामिल हुए, जबकि जिला स्तर के कार्यक्रमों में लगभग 2,73,701 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया। इनमें पुलिसकर्मी, विद्यार्थी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, बाल संरक्षण इकाई से जुड़े लोग तथा ग्राम और ब्लॉक स्तर के प्रतिभागी शामिल थे।

लाखों लोगों तक पहुंचाने का दावा

अदालत के सामने यह भी बताया गया कि गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से लगातार बाल अधिकार और POCSO संबंधी जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। एक संगठन की ओर से छह जिलों में अभियान चलाकर लगभग 4.50 लाख लोगों तक जानकारी पहुंचाने का दावा किया गया।

हाईकोर्ट ने निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी

युगलपीठ ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार डीई को POCSO और संबंधित मामलों की प्रगति तथा कानून के प्रावधानों के क्रियान्वयन की निगरानी का दायित्व सौंपा है।

कोर्ट के अनुसार संबंधित समिति मामलों की स्थिति पर नजर रख सकेगी और समयबद्ध सुनवाई के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर सकेगी। जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार के संबंधित अधिकारियों को भी निर्देश दिए जा सकेंगे।

जागरूकता के साथ लंबित मामलों का निपटारा भी जरूरी

हाईकोर्ट ने संकेत दिया कि केवल लंबित मामलों का निपटारा करना पर्याप्त नहीं है। नए मामलों को रोकने के लिए कानून की सही जानकारी और प्रभावी जागरूकता भी आवश्यक है।

मामले में अदालत ने अधिवक्ता अमिताभ गुप्ता को न्याय मित्र नियुक्त किया है। आगे की सुनवाई में POCSO कानून के प्रावधानों के प्रचार-प्रसार और मामलों की प्रगति पर नजर रखी जाएगी।

नोट: लंबित मामलों और जागरूकता कार्यक्रमों से जुड़े आंकड़े अदालत में प्रस्तुत जानकारी के आधार पर हैं। POCSO मामलों में किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि या निर्दोषता अलग-अलग न्यायिक कार्यवाहियों के परिणाम पर निर्भर करती है।

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