आंगनवाड़ी सहायिका के बेटे चिमन भूरिया बने असिस्टेंट प्रोफेसर, पांच साल बाद मिली सफलता
धार। जिले के राजगढ़ निवासी चिमन भूरिया ने लगातार प्रयास और चुनौतियों के बीच एक अहम उपलब्धि हासिल की है। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) के जरिए उनका चयन असिस्टेंट प्रोफेसर (वाणिज्य) के पद पर हुआ है। उनकी सफलता की कहानी इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्होंने कई वर्षों तक राज्य सेवा परीक्षा में प्रयास किए और असफलताओं के बावजूद तैयारी जारी रखी।
राजगढ़ से शुरू हुई पढ़ाई और सरकारी सेवा का लक्ष्य
चिमन भूरिया ने अपनी स्कूली शिक्षा राजगढ़ के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय से पूरी की। इसके बाद उन्होंने श्री राजेन्द्रशूरी शासकीय महाविद्यालय, सरदारपुर से स्नातक और स्नातकोत्तर की पढ़ाई की।
वर्ष 2016 में स्नातक पूरा करने के बाद उन्होंने सरकारी सेवा में जाने का लक्ष्य तय किया और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू कर दी।
2020 से 2025 तक लगातार प्रयास
अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए चिमन ने 2020 से 2025 तक MPPSC राज्य सेवा मुख्य परीक्षा में लगातार प्रयास किए। कई कोशिशों के बाद भी उन्हें राज्य सेवा में सफलता नहीं मिली।
इसके बावजूद उन्होंने तैयारी बंद नहीं की। हर परीक्षा के बाद अपनी कमजोरियों को समझकर रणनीति में बदलाव किया और आगे की तैयारी जारी रखी। इसी दौरान उन्होंने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में सफलता हासिल की।
पिता के निधन के बाद बढ़ी जिम्मेदारी
चिमन के जीवन में वर्ष 2021 एक कठिन दौर लेकर आया, जब उनके पिता कालूसिंह भूरिया का निधन हो गया। इसके बाद परिवार को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
चिमन की मां आंगनवाड़ी सहायिका के रूप में काम करती हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने बेटे की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहयोग जारी रखा। चिमन ने अपनी सफलता में मां के संघर्ष और समर्थन को महत्वपूर्ण बताया है।
असफलताओं को बनाया तैयारी का हिस्सा
चिमन का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार सफलता न मिलने के बावजूद उन्होंने इसे रुकावट नहीं बनने दिया। हर प्रयास से मिली सीख को अगली तैयारी में शामिल किया और अपने लक्ष्य पर लगातार काम करते रहे।
आखिरकार MPPSC के माध्यम से उनका चयन असिस्टेंट प्रोफेसर (कॉमर्स), द्वितीय श्रेणी राजपत्रित अधिकारी के पद पर हुआ।
विद्यार्थियों के लिए शिक्षा को बनाना चाहते हैं उपयोगी
चयन के बाद चिमन भूरिया ने कहा कि वे शिक्षक के रूप में विद्यार्थियों को बेहतर और रोजगार से जुड़ी शिक्षा देने पर ध्यान देना चाहते हैं। खासकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले छात्रों को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना उनके लक्ष्यों में शामिल है।
परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल
चिमन की सफलता के बाद उनके परिवार, शिक्षकों, मित्रों और क्षेत्र के लोगों ने खुशी जाहिर की। स्थानीय स्तर पर उनकी उपलब्धि को युवाओं के लिए मेहनत और निरंतर प्रयास से जुड़ी प्रेरक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
नोट: यह खबर उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्वतंत्र रूप से लिखी गई है। चयन और परीक्षा से जुड़े तथ्य MPPSC तथा संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार अंतिम माने जाएंगे।












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