एमपी में फिर बदलेगा मौसम, ग्वालियर-चंबल में आंधी-बारिश की संभावना; 18 अक्टूबर तक असर

एमपी में 18 अक्टूबर तक आंधी-बारिश की संभावना, ग्वालियर-चंबल पर रहेगा असर

भोपाल। मध्यप्रदेश में मानसून की विदाई के बाद एक बार फिर मौसम में बदलाव की संभावना जताई गई है। अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में दिन के समय तेज धूप और रात में हल्की ठंडक के बीच कुछ जिलों में बादल छाने, गरज-चमक और बारिश की स्थिति बन सकती है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, 15 से 18 अक्टूबर के बीच प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम प्रभावित हो सकता है। ग्वालियर-चंबल संभाग में इसका असर अधिक रहने की संभावना है, जबकि उज्जैन, सागर और रीवा संभाग के कुछ जिलों में भी बारिश हो सकती है।

पूर्वानुमान के मुताबिक, ग्वालियर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना और भिंड के साथ नीमच तथा मंदसौर में भी बारिश की संभावना जताई गई है। कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। हवाओं की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान बताया गया है। हालांकि, हर जिले में बारिश होना तय नहीं है और वास्तविक स्थिति स्थानीय मौसम परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

15 से 18 अक्टूबर तक मौसम में बदलाव की संभावना

प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद ज्यादातर क्षेत्रों में मौसम शुष्क बना हुआ था। दिन में तेज धूप के कारण गर्मी महसूस हो रही थी, जबकि रात के तापमान में अपेक्षाकृत ठंडक का अनुभव किया जा रहा था। अब नए मौसमी सिस्टम के प्रभाव से कुछ क्षेत्रों में बादल और बारिश की स्थिति बन सकती है।

मौसम पूर्वानुमान में 15 अक्टूबर से गतिविधियां शुरू होने और अगले कुछ दिनों में बारिश का दायरा बढ़ने की संभावना जताई गई है। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के जिलों पर विशेष नजर रहेगी। इसके अलावा प्रदेश के मध्य और पूर्वी हिस्सों के कुछ क्षेत्रों में भी स्थानीय स्तर पर बारिश हो सकती है।

ऐसी परिस्थितियों में एक ही संभाग के सभी जिलों में समान मौसम रहना जरूरी नहीं है। कहीं हल्की बूंदाबांदी हो सकती है, तो कहीं बादल छाने के बावजूद बारिश नहीं होगी। इसलिए लोगों को अपने जिले के ताजा पूर्वानुमान पर ध्यान देना चाहिए।

ग्वालियर-चंबल संभाग में ज्यादा असर की संभावना

मौसम में संभावित बदलाव के दौरान ग्वालियर-चंबल संभाग के जिलों को प्रमुखता से देखा जा रहा है। ग्वालियर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना और भिंड में बारिश की संभावना बताई गई है। इन क्षेत्रों में गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ मौसम बदल सकता है।

इसके साथ ही नीमच और मंदसौर में भी बारिश की संभावना जताई गई है। आगे के दिनों में उज्जैन, सागर और रीवा संभाग के कुछ जिलों में भी मौसम प्रभावित हो सकता है।

आंधी या तेज हवाओं के दौरान खुले स्थानों पर रहने वाले लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। बिजली चमकने और गरजने की स्थिति में पेड़ों के नीचे या खुले मैदान में रुकने से बचना चाहिए। किसानों और खुले में काम करने वाले लोगों के लिए भी स्थानीय मौसम की जानकारी उपयोगी रहेगी।

हालांकि, 15 अक्टूबर को जारी IMD के संभागीय चेतावनी पेज पर पूर्वी और पश्चिमी मध्यप्रदेश के लिए कोई चेतावनी दर्ज नहीं थी। इसलिए बारिश की संभावना और आधिकारिक मौसम चेतावनी को अलग-अलग समझना जरूरी है।

पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती सिस्टम से बदल सकता है मौसम

मौसम में इस बदलाव के पीछे उत्तरी भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती सिस्टम के प्रभाव को संभावित कारण बताया गया है। ऐसे मौसमी सिस्टम वातावरण में नमी और हवा की गतिविधियों को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे कुछ क्षेत्रों में बादल बनने, गरज-चमक और बारिश की परिस्थितियां बनती हैं।

मानसून की विदाई के बाद भी अक्टूबर में स्थानीय मौसमी सिस्टम के कारण बारिश हो सकती है। इसे मानसून की सामान्य बारिश से अलग, मानसून के बाद होने वाली बारिश के रूप में देखा जाता है।

हालांकि, किसी भी सिस्टम का असर किन जिलों में और कितनी तीव्रता से होगा, यह उसकी स्थिति, गति और वातावरण में उपलब्ध नमी पर निर्भर करता है। इसलिए आने वाले दिनों में मौसम के पूर्वानुमान में बदलाव भी संभव है।

इस साल सामान्य से कम हुई मानसूनी बारिश

मध्यप्रदेश में इस साल जून से सितंबर के मानसूनी सीजन के दौरान कुल 908.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। यह करीब 35.8 इंच के बराबर है। इसके मुकाबले प्रदेश में सामान्य बारिश का आंकड़ा 949.5 मिलीमीटर यानी लगभग 37.3 इंच है।

इस तरह पूरे मानसूनी सीजन में प्रदेश में सामान्य से लगभग 41 मिलीमीटर या करीब 1.5 इंच कम बारिश हुई। कुल बारिश सामान्य से लगभग चार प्रतिशत नीचे रही।

हालांकि, प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में बारिश का वितरण एक जैसा नहीं था। पूर्वी मध्यप्रदेश में सामान्य से करीब चार प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि पश्चिमी मध्यप्रदेश में सामान्य से लगभग 12 प्रतिशत कम बारिश हुई।

इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि राज्य का औसत बारिश का आंकड़ा हर जिले की वास्तविक स्थिति नहीं बताता। कुछ क्षेत्रों में बारिश पर्याप्त रही, जबकि कई जिलों में सामान्य से कम पानी गिरा।

पश्चिमी मध्यप्रदेश के कई जिलों में बारिश की कमी

पश्चिमी मध्यप्रदेश के कई जिलों में मानसूनी बारिश सामान्य से कम दर्ज की गई। इनमें आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा शामिल हैं।

इन जिलों में सामान्य की तुलना में बारिश की कमी अलग-अलग रही। कुछ जिलों में अंतर अपेक्षाकृत कम था, जबकि कुछ स्थानों पर यह काफी अधिक दर्ज किया गया।

दूसरी ओर, पूर्वी मध्यप्रदेश के संभागीय आंकड़ों में स्थिति कुछ बेहतर रही। जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग के कुल आंकड़े में सामान्य से लगभग चार प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। इसके बावजूद पूर्वी क्षेत्र के कुछ जिलों में भी बारिश की कमी बनी रही।

क्या अक्टूबर की बारिश से पूरी होगी कमी?

मानसून के दौरान जून में सामान्य से लगभग 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से स्थिति में कुछ सुधार आया, लेकिन बाद में मानसून की गतिविधियां कमजोर पड़ने से कई दिनों तक बारिश नहीं हुई। सीजन के अंतिम सप्ताह में सक्रिय हुए सिस्टम से बारिश बढ़ी, फिर भी पूरे मानसूनी सीजन का आंकड़ा सामान्य तक नहीं पहुंच सका।

अब अक्टूबर में कुछ क्षेत्रों में बारिश की संभावना से यह सवाल उठ रहा है कि क्या इससे मानसून के दौरान हुई कमी की भरपाई हो सकेगी। फिलहाल इसका निश्चित उत्तर देना संभव नहीं है। इसके लिए वास्तविक बारिश की मात्रा और अलग-अलग जिलों के आंकड़ों को देखना होगा।

अक्टूबर में होने वाली बारिश का प्रभाव भी हर क्षेत्र में अलग हो सकता है। जिन जिलों में मानसून के दौरान पर्याप्त बारिश हुई थी, वहां इसका असर अलग होगा, जबकि कम बारिश वाले इलाकों में स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर इसका महत्व बढ़ सकता है।

लोगों को ताजा पूर्वानुमान पर नजर रखने की सलाह

मध्यप्रदेश में 15 से 18 अक्टूबर के बीच कुछ जिलों में मौसम बदलने की संभावना के बीच लोगों को अपने क्षेत्र की ताजा जानकारी देखते रहना चाहिए। विशेष रूप से ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में रहने वाले लोगों को गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति में सतर्क रहना चाहिए।

बारिश की संभावना को पूरे प्रदेश के लिए एक समान स्थिति नहीं माना जाना चाहिए। मौसम का वास्तविक असर जिले और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसलिए किसी भी यात्रा, खुले में काम या कृषि गतिविधि की योजना बनाते समय नवीनतम आधिकारिक पूर्वानुमान देखना बेहतर होगा।

कुल मिलाकर, मानसून की विदाई के बाद मध्यप्रदेश के कुछ हिस्सों में एक बार फिर बारिश की संभावना बन रही है। ग्वालियर-चंबल संभाग पर विशेष नजर है, जबकि अन्य संभागों के कुछ जिलों में भी मौसम प्रभावित हो सकता है। आने वाले दिनों में वास्तविक बारिश और मौसम विभाग के अपडेट से ही स्थिति अधिक स्पष्ट होगी।

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