इंदौर-देवास में प्रधान आरक्षक के ठिकानों पर लोकायुक्त की रेड, 33 संपत्तियों का खुलासा; बाजार मूल्य करीब ₹29.73 करोड़

इंदौर में प्रधान आरक्षक के 15 ठिकानों पर लोकायुक्त की रेड, 33 संपत्तियों का खुलासा

इंदौर/देवास। मध्यप्रदेश में आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इंदौर के पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय (पीटीसी) में पदस्थ प्रधान आरक्षक चालक फिरोज खान से जुड़े इंदौर और देवास के ठिकानों पर लोकायुक्त की संयुक्त टीमों ने छापेमारी की। तलाशी के दौरान मकान, फ्लैट, प्लॉट और कृषि भूमि समेत कई संपत्तियों के दस्तावेज सामने आए। अधिकारियों की ओर से जारी प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, अब तक 33 अचल संपत्तियों की पहचान की गई है, जिनका मौजूदा बाजार मूल्य लगभग 29.73 करोड़ रुपये आंका गया है।

जांच में प्रधान आरक्षक की ज्ञात वैध आय और संपत्तियों की खरीद पर किए गए कथित खर्च के बीच बड़ा अंतर सामने आने की बात कही गई है। लोकायुक्त की टीमें संपत्तियों के स्वामित्व, बैंक खातों, व्यावसायिक फर्मों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही हैं। मामले में एक परिचित महिला के नाम पर कृषि भूमि का पंजीकृत अनुबंध कराने और परिवार के सदस्यों के नाम पर फर्मों के जरिए लेनदेन किए जाने के आरोप भी जांच के दायरे में हैं।

इंदौर और देवास में 15 ठिकानों पर एक साथ तलाशी

लोकायुक्त इंदौर और उज्जैन की संयुक्त टीमों ने 14 अक्टूबर को सुबह करीब छह बजे से तलाशी अभियान शुरू किया। कार्रवाई के लिए इंदौर और देवास में कुल 15 ठिकानों को चिह्नित किया गया था। इनमें देवास के 11 और इंदौर के चार स्थान शामिल बताए गए।

कार्रवाई का केंद्र पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय, इंदौर में पदस्थ प्रधान आरक्षक चालक फिरोज खान से जुड़ी संपत्तियां और उनके कथित सहयोगियों के ठिकाने रहे। टीमों ने आवासीय परिसरों के साथ फ्लैट, जमीन और व्यावसायिक संपत्तियों से संबंधित दस्तावेजों की जांच की।

लोकायुक्त को मिली शिकायत में आरोप लगाया गया था कि प्रधान आरक्षक पुलिस विभाग में अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर देवास क्षेत्र में विवादित जमीनों तथा प्लॉटों से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप करता था। शिकायत में संपत्तियों की खरीद-फरोख्त और कथित रूप से अन्य लोगों के नाम पर निवेश किए जाने के आरोप भी शामिल थे। इन्हीं आरोपों और प्रारंभिक जांच के आधार पर तलाशी की कार्रवाई की गई।

वैध आय और संपत्ति खरीदने के खर्च में बड़ा अंतर

लोकायुक्त की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, फिरोज खान को वेतन से लगभग 75 लाख रुपये की आय होने का अनुमान है। अन्य स्रोतों से प्राप्त अनुमानित आय को शामिल करने के बाद उनकी कुल वैध आय करीब 1 करोड़ 93 लाख 84 हजार 440 रुपये आंकी गई है।

इसके विपरीत, जांच में अब तक चल और अचल संपत्तियों की खरीद पर लगभग 12 करोड़ 95 लाख 72 हजार 28 रुपये खर्च किए जाने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के प्रारंभिक आकलन में यह खर्च ज्ञात वैध आय से लगभग 11 करोड़ रुपये अधिक बताया गया है।

लोकायुक्त के मुताबिक, आय और खर्च के इस अंतर को लेकर अनुपातहीन संपत्ति के पहलू की जांच की जा रही है। हालांकि, किसी भी संपत्ति को आय से अधिक या बेनामी साबित करने के लिए उसके वास्तविक मालिकाना हक, खरीद में इस्तेमाल की गई रकम और आय के स्रोतों का दस्तावेजों के आधार पर सत्यापन जरूरी है।

33 अचल संपत्तियों की पहचान, बाजार मूल्य करीब ₹29.73 करोड़

तलाशी के दौरान अब तक 33 अचल संपत्तियों से संबंधित जानकारी सामने आने की बात कही गई है। इनमें मकान, प्लॉट, फ्लैट, कृषि भूमि और अन्य संपत्तियां शामिल हैं। अधिकारियों के प्रारंभिक आकलन के मुताबिक, इन संपत्तियों को खरीदने पर किए गए खर्च और इनके वर्तमान बाजार मूल्य में अंतर है।

जांच में इन संपत्तियों का मौजूदा बाजार मूल्य लगभग 29 करोड़ 73 लाख 18 हजार 768 रुपये आंका गया है। यह मूल्यांकन प्रारंभिक जानकारी पर आधारित है और संपत्तियों से संबंधित दस्तावेजों तथा स्वामित्व की जांच आगे भी जारी रह सकती है।

बताया गया है कि संपत्तियां अलग-अलग नामों पर दर्ज हैं। इनमें प्रधान आरक्षक के अपने नाम के अलावा उनकी पत्नी, मां, परिचित महिला और विभिन्न फर्मों से जुड़ी संपत्तियां शामिल होने का दावा किया गया है। कुछ संपत्तियों के बेनामी होने की आशंका भी जांच का हिस्सा है। इन आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद ही हो सकेगी।

परिचित महिला के नाम पर 21.75 बीघा जमीन का अनुबंध

जांच में रोशनी वर्मा नाम की एक परिचित महिला के नाम पर लगभग 21.75 बीघा कृषि भूमि का पंजीकृत अनुबंध कराए जाने का मामला भी सामने आया है। लोकायुक्त की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह जमीन इंदौर जिले की सांवेर तहसील के गूरन गांव से संबंधित बताई गई है।

शिकायत में जमीन के स्वामित्व और उससे जुड़े विवाद का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि प्रधान आरक्षक ने इस सौदे में अप्रत्यक्ष भूमिका निभाई। जांच एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि अनुबंध किस परिस्थिति में कराया गया, इसमें किसकी रकम लगी और संबंधित जमीन पर वास्तविक अधिकार किसका है।

रोशनी वर्मा से जुड़ी संपत्तियों और कारोबारी गतिविधियों को भी जांच के दायरे में लिया गया है। केवल किसी व्यक्ति के नाम पर संपत्ति दर्ज होने से उसका वास्तविक लाभार्थी या मालिकाना संबंध अपने आप साबित नहीं होता। इसके लिए दस्तावेज, भुगतान का स्रोत और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का सत्यापन किया जाना जरूरी है।

कई फर्मों और कंपनियों के लेनदेन की जांच

लोकायुक्त की प्रारंभिक पड़ताल में कुछ व्यावसायिक फर्मों और कंपनियों के नाम भी सामने आए हैं। इनमें साहिल ट्रेडिंग, रॉयल ग्रीन रियल एस्टेट, रोशनी सेल्स एंड सर्विस, महाराजा रियल एस्टेट और ब्लैक हॉरनेट शामिल बताए गए हैं।

अधिकारियों के अनुसार, साहिल ट्रेडिंग नाम की फर्म प्रधान आरक्षक की मां और पत्नी के नाम से संचालित होने की जानकारी मिली है। इस फर्म के बैंक खातों में करोड़ों रुपये के लेनदेन की बात कही गई है। वहीं, रोशनी वर्मा से जुड़ी रोशनी सेल्स एंड सर्विस तथा रियल एस्टेट से संबंधित निवेशों की भी जांच की जा रही है।

जांच एजेंसी का ध्यान इस बात पर है कि इन फर्मों में पैसा कहां से आया, किन खातों में भेजा गया और क्या इन लेनदेन का संबंध तलाशी में सामने आई संपत्तियों से है। कारोबार के दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और संपत्ति खरीद के भुगतान का मिलान करने के बाद ही वित्तीय लेनदेन की वास्तविक प्रकृति स्पष्ट हो सकेगी।

नौ वाहनों के दस्तावेज और 21 बैंक खातों की जानकारी

तलाशी के दौरान ट्रक, कार, स्कॉर्पियो, स्कूटी और मोटरसाइकिल समेत लगभग नौ वाहनों से संबंधित दस्तावेज मिलने की जानकारी दी गई है। इसके अतिरिक्त इंदौर, उज्जैन और देवास के विभिन्न बैंकों में संबंधित व्यक्तियों के नाम से लगभग 21 बैंक खातों का पता चलने की बात कही गई है।

लोकायुक्त की टीम इन खातों के विवरण, उनमें हुए लेनदेन और संबंधित फर्मों से उनके संबंध की जांच कर रही है। संपत्तियों की खरीद में इस्तेमाल की गई रकम के स्रोत का पता लगाने के लिए बैंक रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेज महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, संबंधित बैंक खातों से धन निकासी रोकने के लिए भी कदम उठाए गए हैं। इस प्रक्रिया का उद्देश्य जांच के दौरान वित्तीय लेनदेन की स्थिति को सुरक्षित रखना और संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल करना है।

जांच जारी, आरोपों की पुष्टि होना बाकी

लोकायुक्त की इस कार्रवाई में सामने आए आंकड़े मामले की गंभीरता को दर्शाते हैं, लेकिन इन्हें अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। जांच एजेंसी को संपत्तियों का वास्तविक स्वामित्व, धन के स्रोत, कंपनियों की भूमिका और कथित बेनामी निवेशों से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करनी होगी।

फिलहाल, प्रधान आरक्षक फिरोज खान और उनसे जुड़े लोगों की संपत्तियों तथा वित्तीय लेनदेन की जांच जारी है। आगे की कार्रवाई तलाशी में मिले दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के परीक्षण पर निर्भर करेगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन संपत्तियों को आय से अधिक माना जाएगा और किन व्यक्तियों की भूमिका के संबंध में कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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