दिग्विजय सिंह की यात्रा में बच्चों से नारे लगवाने की शिकायत, NHRC ने मांगी रिपोर्ट
भोपाल। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने शिकायत पर संज्ञान लिया है। यात्रा में बच्चों को शामिल करने और उनसे कथित तौर पर राजनीतिक नारे लगवाने के आरोपों की जांच के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) से दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है।
बच्चों को पैसे देकर शामिल कराने का भी आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि यात्रा के दौरान बच्चों से राजनीतिक नारे लगवाए गए। शिकायत में यह आशंका भी जताई गई कि बच्चों को आर्थिक प्रलोभन देकर यात्रा में शामिल कराया गया हो सकता है। शिकायतकर्ता के अनुसार, घटना से संबंधित वीडियो और तस्वीरें 22 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर साझा की गई थीं।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच कर तथ्य सामने लाने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव और DGP को जांच के निर्देश
NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत मामले पर संज्ञान लिया। आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव और DGP से शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कराने और निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई रिपोर्ट पेश करने को कहा है।
जांच में यह पता लगाने को कहा गया है कि क्या बच्चों को किसी तरह का आर्थिक प्रलोभन देकर यात्रा में शामिल किया गया था और क्या इस दौरान बाल संरक्षण से जुड़े कानूनों का उल्लंघन हुआ।
बच्चों के वीडियो और तस्वीरों की भी होगी जांच
आयोग ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव को भी मामले से जुड़े वीडियो और तस्वीरों के इस्तेमाल के पहलुओं की जांच करने के निर्देश दिए हैं। संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया है।
सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री और शिकायत में बताए गए तथ्यों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना में किन लोगों की क्या भूमिका रही।
उज्जैन से अयोध्या के लिए निकली है यात्रा
दिग्विजय सिंह ने दशहरे के अवसर पर उज्जैन से ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ शुरू की थी। यह यात्रा अयोध्या तक प्रस्तावित है। यात्रा से जुड़े बच्चों के कथित इस्तेमाल और नारेबाजी की शिकायत अब मानवाधिकार आयोग के संज्ञान में है।
फिलहाल आयोग ने शिकायत पर जांच और रिपोर्ट मांगी है। आयोग के संज्ञान लेने का अर्थ यह नहीं है कि आरोप साबित हो गए हैं। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।












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