उज्जैन में 151 स्थानों पर होगा 35 हजार कन्याओं का पूजन, 17 अक्टूबर को एक साथ होगा महाआयोजन

उज्जैन में 151 स्थानों पर 35 हजार कन्याओं का पूजन, 17 अक्टूबर को महाआयोजन

उज्जैन। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में शारदीय नवरात्रि के अवसर पर नारी शक्ति के सम्मान और सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से एक भव्य धार्मिक आयोजन किया जाएगा। 17 अक्टूबर को शहर के 151 स्थानों पर एक ही शुभ मुहूर्त में करीब 35 हजार कन्याओं का पूजन किया जाएगा। आयोजकों को उम्मीद है कि यह सामूहिक आयोजन एक नया रिकॉर्ड बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

सुबह 9:30 से 11:30 बजे तक होगा आयोजन

लोकमान्य तिलक महाआयोजन समिति की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम के लिए तैयारियां कई महीनों से चल रही हैं। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 17 अक्टूबर को सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक विभिन्न स्थानों पर कन्या पूजन किया जाएगा। इस दौरान शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में धार्मिक अनुष्ठान और माता रानी के जयकारे सुनाई देंगे।

आयोजन से जुड़ी जानकारी के अनुसार, 13 वर्ष से कम उम्र की कन्याओं का पंजीयन कराया गया है। प्रत्येक पंजीकृत कन्या को प्रवेशिका और आमंत्रण पत्र देने की व्यवस्था भी की जा रही है।

पांच हजार से अधिक स्वयंसेवक जुटे तैयारियों में

कार्यक्रम को व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने के लिए शहर के विभिन्न क्षेत्रों में व्यवस्थाएं की जा रही हैं। आयोजकों के मुताबिक, पांच हजार से अधिक स्वयंसेवक आयोजन की तैयारियों में सहयोग कर रहे हैं। कन्या पूजन के लिए धर्मशालाओं, बड़े हॉल और खुले परिसरों में मंडप तैयार किए जा रहे हैं।

इस आयोजन की अगुवाई विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा कर रहे हैं। समिति का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं के माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और नारी सम्मान के विचार से जोड़ना है।

कन्या पूजन का क्या है धार्मिक महत्व?

हिंदू परंपरा में नवरात्रि के दौरान कन्या पूजन को विशेष महत्व दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, छोटी कन्याओं को देवी शक्ति का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है। इस परंपरा में श्रद्धा, भक्ति और मां दुर्गा के प्रति समर्पण का भाव जुड़ा हुआ है।

उज्जैन में आयोजित होने वाला यह सामूहिक कार्यक्रम धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक सहभागिता का भी उदाहरण बनने की तैयारी में है। आयोजकों का लक्ष्य 151 स्थानों पर एक साथ 35 हजार कन्याओं का पूजन कर इस आयोजन को विशेष पहचान दिलाना है।

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