कौन हैं IAS आदित्य सिंह? 32 बैगा बच्चों की मौत के बीच बालाघाट की कमान
भोपाल। मध्य प्रदेश में 23 आईएएस अधिकारियों के तबादलों के बीच 2014 बैच के आईएएस अधिकारी आदित्य सिंह को बालाघाट जिले का नया कलेक्टर बनाया गया है। जिले में 32 बैगा आदिवासी बच्चों की मौत का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे समय में बालाघाट की जिम्मेदारी आदित्य सिंह को सौंपी गई है। इससे पहले वह अशोकनगर के कलेक्टर थे, जहां जमीन नामांतरण से जुड़ी शिकायतों के कारण उनका नाम चर्चा में आया था।
कौन हैं आईएएस आदित्य सिंह?
आदित्य सिंह मध्य प्रदेश कैडर के 2014 बैच के आईएएस अधिकारी हैं। उनका जन्म 8 मार्च 1990 को रीवा में हुआ था। उन्होंने शुरुआती पढ़ाई रीवा में की और 11वीं-12वीं की शिक्षा राजस्थान के कोटा से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने आईआईटी रुड़की से पेपर टेक्नोलॉजी में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।
प्रशासनिक सेवा के दौरान वह हरदा और अशोकनगर जिले के कलेक्टर रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने गुना में अपर कलेक्टर और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग में उप सचिव के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई है। भोपाल स्मार्ट सिटी लिमिटेड के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के पद पर भी वह काम कर चुके हैं।
अशोकनगर में जमीन नामांतरण को लेकर आई थी शिकायत
अशोकनगर में कलेक्टर रहते हुए आदित्य सिंह का नाम आनंदपुर ट्रस्ट से संबंधित जमीन के नामांतरण के मामले में चर्चा में आया था। रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में शिकायतकर्ता की ओर से जमीन के नामांतरण के बदले करोड़ों रुपये मांगने का आरोप लगाया गया था। हालांकि, आदित्य सिंह ने इन आरोपों का खंडन किया था।
जनवरी 2026 में निर्वाचन कार्य में बेहतर प्रदर्शन के लिए उनके सम्मान की घोषणा के आसपास ही उनके तबादले की खबर भी सामने आई थी। बाद में उन्हें अशोकनगर कलेक्टर के पद से हटाकर भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग में उप सचिव बनाया गया था।
भोपाल स्मार्ट सिटी में भी उठे थे सवाल
आदित्य सिंह भोपाल स्मार्ट सिटी लिमिटेड के सीईओ रहते हुए वर्ष 2020-21 में टीटी नगर क्षेत्र के तीन भूखंडों की नीलामी से जुड़े विवाद के दौरान भी चर्चा में आए थे। इस प्रक्रिया को लेकर शिकायत की गई थी कि निविदाओं में नियमों का पालन नहीं हुआ और भूखंडों के बेस प्राइस निर्धारित करने में भी अनियमितताएं थीं।
शिकायत में प्लॉट नंबर 83 का बेस प्राइस 73.96 करोड़ रुपये, प्लॉट नंबर 79 का 63.80 करोड़ रुपये और प्लॉट नंबर 80 का 70.75 करोड़ रुपये बताए जाने का उल्लेख था। इस मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) में शिकायत की गई थी। इसके बाद आदित्य सिंह का भोपाल स्मार्ट सिटी के सीईओ पद से तबादला हो गया था। इन शिकायतों और आरोपों को किसी अंतिम न्यायिक निष्कर्ष के समान नहीं माना जाना चाहिए।
32 बैगा बच्चों की मौत के बीच मिली नई जिम्मेदारी
बालाघाट जिले के बैगा आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बच्चों की मौतों का मामला स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, प्रशासन ने अब तक 32 बच्चों की मौत की पुष्टि की है। प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं, पोषण, स्वच्छ पेयजल और बीमारियों की समय पर पहचान को लेकर सवाल उठे हैं।
इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी, चिकित्सा सेवाओं की उपलब्धता और बच्चों के उपचार से संबंधित व्यवस्थाओं पर भी चर्चा हो रही है। ऐसे में नए कलेक्टर के सामने प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक समन्वय मजबूत करने और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर निगरानी रखने जैसी चुनौतियां रहेंगी।
आदित्य सिंह को बालाघाट की जिम्मेदारी ऐसे समय में मिली है, जब जिले में बच्चों की मौतों के मामले को लेकर प्रशासन पर ध्यान केंद्रित है। अब उनकी नई नियुक्ति के बाद जिले में प्रशासनिक और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।













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