भोपाल में CISF जवान और पुलिस अफसर बनकर साइबर ठगी, दो मामलों में ₹96 हजार की ठगी
भोपाल। राजधानी भोपाल में साइबर ठगी के दो अलग-अलग मामले सामने आए हैं। जालसाजों ने कहीं खुद को CISF जवान बताकर मकान किराए पर लेने का झांसा दिया, तो दूसरे मामले में खुद को पुलिस अधिकारी बताकर ड्रग्स केस में फंसाने की धमकी दी। दोनों घटनाओं में पीड़ितों से कुल करीब ₹96 हजार की रकम ठगने का आरोप है। पुलिस ने दोनों मामलों में प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मकान किराए पर लेने के नाम पर 36 हजार की ठगी
पहला मामला बागसेवनिया थाना क्षेत्र का है। कुंजन नगर निवासी 51 वर्षीय महिला ने अपने मकान का एक हिस्सा किराए पर देने के लिए ऑनलाइन विज्ञापन लगाया था।
इसके बाद एक व्यक्ति ने संपर्क कर खुद को CISF का जवान बताया। आरोपी ने मकान किराए पर लेने की इच्छा जताते हुए करीब 15 हजार रुपये मासिक किराया और इतनी ही राशि सिक्योरिटी के रूप में देने की बात कही।
मकान का वीडियो देखने के बाद आरोपी ने महिला को एक कथित विभागीय प्रक्रिया का हवाला दिया और एडवांस राशि जारी करने के नाम पर पहले पैसे जमा करने को कहा। महिला ने उसके बताए खाते में अलग-अलग भुगतान करते हुए कुल ₹36 हजार ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद भी जब और पैसों की मांग की गई, तो उन्हें ठगी का शक हुआ।
ड्रग्स केस में फंसाने की धमकी देकर 60 हजार ऐंठे
दूसरी घटना बजरिया थाना क्षेत्र में सामने आई। यहां एक विधवा महिला की एक युवक से शादी की बातचीत चल रही थी। 12 सितंबर को युवक महिला से मिलने आ रहा था, तभी महिला के पास एक अनजान नंबर से फोन आया।
कॉलर ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए दावा किया कि महिला से मिलने वाला युवक कथित तौर पर ड्रग्स के साथ पकड़ा गया है और उसके खिलाफ मामला दर्ज होने वाला है।
आरोपी ने गिरफ्तारी और ड्रग्स केस में फंसने का डर दिखाकर महिला से अलग-अलग चरणों में रकम ट्रांसफर कराई। इस तरह करीब ₹60 हजार की ठगी की गई। लगातार पैसों की मांग बढ़ने पर महिला ने पुलिस से संपर्क किया।
मोबाइल नंबर और बैंक खातों की जांच
दोनों शिकायतों के बाद पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी से संबंधित धाराओं में मामले दर्ज किए हैं।
साइबर सेल की मदद से आरोपियों के इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, बैंक खातों, कॉल डिटेल और लेनदेन की जानकारी की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दोनों मामलों के पीछे अलग-अलग लोग हैं या किसी एक साइबर नेटवर्क से इनका संबंध है।
CISF और पुलिस की पहचान का गलत इस्तेमाल
इन मामलों में ठगी के लिए जालसाजों ने सरकारी सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस की पहचान का इस्तेमाल करने की कोशिश की। ऐसे मामलों में पीड़ितों को भरोसे में लेने के लिए सरकारी पद और विभाग का नाम इस्तेमाल किया जाता है।
पुलिस की जांच पूरी होने के बाद आरोपियों की पहचान और उनके नेटवर्क के बारे में अधिक जानकारी सामने आने की संभावना है।
लोगों को सतर्क रहने की जरूरत
ऑनलाइन मकान किराए पर देने, नौकरी, सरकारी प्रक्रिया, बैंक सत्यापन या किसी कानूनी कार्रवाई के नाम पर रकम मांगने वाले अनजान लोगों से सावधान रहने की जरूरत है। कोई व्यक्ति खुद को पुलिस या किसी सुरक्षा बल का अधिकारी बताए तो उसकी पहचान स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए बिना पैसे ट्रांसफर नहीं करने चाहिए।
किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत बैंक और संबंधित साइबर अपराध हेल्पलाइन को सूचना देना महत्वपूर्ण है।
नोट: दोनों मामलों में लगाए गए आरोप पुलिस में दर्ज शिकायतों पर आधारित हैं। आरोपियों की पहचान और उनकी भूमिका पुलिस जांच पूरी होने के बाद स्पष्ट होगी।












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