गुना में 5 बीघा जमीन को लेकर जनसुनवाई में पहुंचा आदिवासी परिवार, प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार

गुना में 5 बीघा जमीन के लिए जनसुनवाई पहुंचा आदिवासी परिवार, प्रशासन से लगाई गुहार

गुना। मध्य प्रदेश के गुना कलेक्ट्रेट में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में एक आदिवासी परिवार अपनी कृषि भूमि से जुड़े विवाद को लेकर पहुंचा। फतेहगढ़ क्षेत्र के धनोरिया गांव की रहने वाली विधवा सुशीला बाई सहरिया अपने परिवार के सदस्यों के साथ अधिकारियों के सामने आवेदन लेकर पहुंचीं। परिवार ने करीब 5 बीघा जमीन वापस दिलाने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की।

गले में तख्तियां लेकर पहुंचा परिवार

अपनी शिकायत की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए परिवार के सदस्यों ने गले में तख्तियां लगा रखी थीं। उनके हाथों में जमीन विवाद से जुड़े आवेदन भी थे। परिवार ने जनसुनवाई में अधिकारियों से मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग रखी।

पति के नाम दर्ज होने का दावा

सुशीला बाई के अनुसार धनोरिया गांव में करीब पांच बीघा कृषि भूमि उनके दिवंगत पति घासीलाल सहरिया के नाम दर्ज है। उनका कहना है कि परिवार लंबे समय से इसी जमीन पर खेती करता रहा है और इससे मिलने वाली आय से घर का खर्च चलता था।

महिला के मुताबिक खेत में सिंचाई के लिए बोरिंग और बिजली की डीपी भी लगी हुई है। ऐसे में जमीन उनके परिवार की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है।

पांच साल से कब्जे का आरोप

जनसुनवाई में दिए गए आवेदन में सुशीला बाई ने गांव के ही सरवन धाकड़ पर करीब पांच वर्षों से जमीन पर कथित रूप से कब्जा किए जाने का आरोप लगाया। महिला के अनुसार परिवार ने जब भी अपनी जमीन पर जाने या खेती करने की कोशिश की, तब विवाद की स्थिति बनी।

उन्होंने गाली-गलौज और धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है।

पहले भी शिकायत करने की बात

सुशीला बाई का कहना है कि जमीन से जुड़ी समस्या को लेकर उनके पति के जीवित रहते भी संबंधित अधिकारियों को शिकायतें दी गई थीं। उनके अनुसार फतेहगढ़ थाना और बमोरी तहसील स्तर पर भी आवेदन दिए गए, लेकिन विवाद का समाधान नहीं हो सका।

जमीन परिवार की आजीविका का आधार

महिला ने प्रशासन को बताया कि पति की मृत्यु के बाद परिवार की जिम्मेदारी अब उनके ऊपर है। ऐसे में कृषि भूमि उनके लिए केवल संपत्ति नहीं बल्कि परिवार के भरण-पोषण का प्रमुख साधन है।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यदि जमीन का विवाद हल नहीं हुआ तो बच्चों की देखभाल और परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो सकता है।

राजस्व रिकॉर्ड और मौके की जांच की मांग

जनसुनवाई में परिवार ने प्रशासन से जमीन के राजस्व रिकॉर्ड की जांच, मौके की स्थिति का सत्यापन और शिकायत सही पाए जाने पर कथित कब्जे से जमीन मुक्त कराने की मांग की।

अब मामले में प्रशासन द्वारा की जाने वाली जांच और राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

नोट: जमीन पर कब्जे, धमकी और अन्य आरोप शिकायतकर्ता परिवार द्वारा लगाए गए हैं। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि संबंधित प्रशासनिक या कानूनी जांच के बाद ही होगी।

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