उमरिया: संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र में कन्वेयर से गिरकर ठेका श्रमिक की मौत, सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल

Umaria News: संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र में ठेका श्रमिक की मौत
उमरिया। मध्यप्रदेश के उमरिया जिले के बिरसिंहपुर पाली स्थित संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र में काम के दौरान गंभीर रूप से घायल हुए एक ठेका श्रमिक की इलाज के दौरान मौत हो गई। प्लांट के ओल्ड सीएचपी क्षेत्र में नंबर-1 कन्वेयर पर काम करते समय श्रमिक नीचे गिर गया था। हादसे में उसे गंभीर चोटें आईं। अस्पताल में उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
मृतक की पहचान रामचरण कॉल (40 वर्ष) के रूप में हुई है। वह मालियागुड़ा का निवासी था और ताप विद्युत केंद्र में कार्यरत एक ठेका कंपनी के माध्यम से मजदूरी करता था। घटना के बाद प्लांट में श्रमिकों की सुरक्षा और कार्यस्थल पर जरूरी इंतजामों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
कन्वेयर पर काम करते समय हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक, रामचरण कॉल सोमवार को संजय गांधी ताप विद्युत केंद्र के ओल्ड सीएचपी क्षेत्र में नंबर-1 कन्वेयर पर काम कर रहा था। इसी दौरान वह अचानक नीचे गिर गया। गिरने से उसे गंभीर चोटें आईं।
हादसे के तुरंत बाद घायल श्रमिक को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाली ले जाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे शहडोल रेफर कर दिया। बाद में उसे श्रीराम अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक प्रतिष्ठानों में ऊंचाई पर काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान खींचा है।
परिजनों ने सुरक्षा उपकरण नहीं दिए जाने का लगाया आरोप
हादसे के बाद मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया कि काम के दौरान रामचरण ने आवश्यक सुरक्षा उपकरण नहीं पहने थे। परिजनों के मुताबिक, यदि श्रमिक को जरूरी सुरक्षा साधन उपलब्ध कराए गए होते और सुरक्षा नियमों का पालन कराया गया होता, तो हादसे की गंभीरता कम हो सकती थी।
ऊंचाई या जोखिम वाले स्थानों पर काम करने वाले श्रमिकों के लिए हेलमेट, सेफ्टी बेल्ट और अन्य सुरक्षा उपकरण महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में यह जांच का विषय है कि घटना के समय श्रमिक को कौन-कौन से सुरक्षा साधन उपलब्ध कराए गए थे और क्या कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन हो रहा था।
हालांकि, परिजनों के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
ठेका कंपनी और प्लांट प्रबंधन की जवाबदेही पर सवाल
घटना के बाद यह सवाल उठ रहा है कि कन्वेयर क्षेत्र में श्रमिकों से काम कराने के दौरान सुरक्षा की जिम्मेदारी किस स्तर पर निभाई जा रही थी। ठेका कंपनी के साथ-साथ प्लांट प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था भी जांच के दायरे में आ सकती है।
प्लांट में सेफ्टी ऑफिसर नवीन दुबे की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। सुरक्षा मानकों के पालन और श्रमिकों को आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने से संबंधित जिम्मेदारियों की जांच जरूरी है।
इसी तरह मुख्य अभियंता एचके त्रिपाठी के नेतृत्व वाले प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था की भी समीक्षा किए जाने की मांग उठ रही है। संबंधित अधिकारियों या कर्मचारियों की जिम्मेदारी जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय की जानी चाहिए।
जांच में इन बिंदुओं पर स्पष्टता जरूरी
इस घटना की निष्पक्ष जांच में कुछ अहम सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है।
- क्या श्रमिक को काम शुरू करने से पहले हेलमेट और सेफ्टी बेल्ट जैसे सुरक्षा उपकरण दिए गए थे?
- कन्वेयर क्षेत्र में काम के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन कराया जा रहा था या नहीं?
- ऊंचाई पर काम करने के लिए जरूरी सुरक्षा इंतजाम और निगरानी उपलब्ध थी या नहीं?
- हादसे के समय ठेका कंपनी और प्लांट के संबंधित जिम्मेदार अधिकारी कहां थे?
- घायल श्रमिक को समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाए गए?
इन बिंदुओं की जांच से हादसे की परिस्थितियों और संभावित चूक की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
मृतक के परिवार को सहायता देने की मांग
रामचरण कॉल की मौत से उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। घटना के बाद परिवार को नियमानुसार आर्थिक सहायता, बीमा और अन्य पात्र लाभ उपलब्ध कराने की मांग भी महत्वपूर्ण हो गई है।
ठेका श्रमिकों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर यह मामला फिर चर्चा में है। औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन और तकनीकी कामकाज के साथ श्रमिकों की जान की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।
फिलहाल इस हादसे में सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता, ठेका कंपनी की जिम्मेदारी और प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था से जुड़े सवालों के जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।




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