जबलपुर हाईकोर्ट ने गूगल पर देखा बस का वजन, बीमा कंपनी की अपील खारिज; 20 हजार रुपये मुकदमा खर्च देने के निर्देश

Jabalpur High Court: गूगल पर देखा बस का वजन, बीमा कंपनी की अपील खारिज
जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सड़क दुर्घटना से जुड़े मुआवजे के मामले में न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने घायल युवक को मिलने वाला 3.17 लाख रुपये का मुआवजा बरकरार रखा, जबकि बीमा कंपनी पर 20 हजार रुपये मुकदमा खर्च भी लगाया। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी दुर्घटनाग्रस्त बस का वास्तविक वजन साबित करने के लिए कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सकी। ऐसे में न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने स्वयं गूगल पर संबंधित बस मॉडल का वजन देखा।
अदालत के सामने बीमा कंपनी ने दलील दी थी कि दुर्घटना के समय बस चालक के पास केवल हल्के मोटर वाहन (LMV) का लाइसेंस था, जबकि बस चलाने के लिए भारी मोटर वाहन (HMV) का लाइसेंस जरूरी था। हाईकोर्ट ने पाया कि कंपनी वाहन के वजन और लाइसेंस श्रेणी से संबंधित अपनी दलील के समर्थन में पर्याप्त प्रमाण पेश नहीं कर सकी।
गूगल पर जांचा बस का वजन
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने बीमा कंपनी के अधिवक्ता से पूछा कि दुर्घटना में शामिल बस का वास्तविक वजन कितना था। कंपनी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया।
इसके बाद न्यायमूर्ति ने स्वयं इंटरनेट पर टाटा स्टारबस मार्कोपोलो मॉडल का वजन देखा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार बस का वजन लगभग 4,960 किलोग्राम बताया गया।
अदालत ने वाहन के वजन और मोटर वाहन कानून के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए बीमा कंपनी की दलील पर विचार किया। पीठ ने कहा कि केवल वाहन के बस होने के आधार पर चालक के पास भारी मोटर वाहन का लाइसेंस होना अनिवार्य नहीं माना जा सकता। संबंधित वाहन की श्रेणी और वजन का प्रमाण देना भी जरूरी है।
26 अगस्त 2022 को पनागर में हुआ था हादसा
यह मामला 26 अगस्त 2022 को जबलपुर जिले के पनागर क्षेत्र में हुई सड़क दुर्घटना से जुड़ा है। दुर्घटना में बस की टक्कर से शुभम पटेल घायल हो गए थे। हादसे के बाद पीड़ित पक्ष ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण के समक्ष मुआवजे के लिए आवेदन किया था।
मामले की सुनवाई के बाद दावा अधिकरण ने शुभम पटेल को 3.17 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। इस फैसले को चुनौती देते हुए न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की।
बीमा कंपनी का कहना था कि दुर्घटना के समय बस चालक के पास केवल LMV लाइसेंस था। कंपनी के अनुसार, बस चलाने के लिए HMV लाइसेंस की आवश्यकता थी और चालक के पास आवश्यक लाइसेंस नहीं होने के कारण बीमा कंपनी पर मुआवजे का दायित्व नहीं बनना चाहिए।
वाहन की श्रेणी साबित करने में नाकाम रही बीमा कंपनी
हाईकोर्ट ने मामले के रिकॉर्ड का परीक्षण करते हुए पाया कि बीमा कंपनी अपने दावे के समर्थन में वाहन के वास्तविक वजन का प्रमाण प्रस्तुत नहीं कर सकी। कंपनी ने दावा अधिकरण के समक्ष भी इस मुद्दे पर कोई गवाह पेश नहीं किया था।
अदालत ने स्पष्ट किया कि चालक के लाइसेंस को लेकर आपत्ति उठाने वाली बीमा कंपनी को यह साबित करना चाहिए कि संबंधित वाहन किस श्रेणी में आता है और उसके संचालन के लिए कौन-सा लाइसेंस आवश्यक था।
पीठ ने माना कि आवश्यक दस्तावेज और प्रमाण उपलब्ध कराए बिना केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि बस चालक के पास भारी मोटर वाहन का लाइसेंस नहीं था। इस आधार पर बीमा कंपनी की अपील को स्वीकार नहीं किया गया।
बिना पर्याप्त कानूनी शोध के अपील दायर करने पर नाराजगी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। अदालत के अनुसार, अपील दायर करने से पहले मामले के जरूरी तथ्यों और कानूनी पहलुओं का पर्याप्त अध्ययन किया जाना चाहिए था।
बीमा कंपनी वाहन के वजन से संबंधित दस्तावेज पेश नहीं कर सकी और न ही अपने दावे के समर्थन में आवश्यक साक्ष्य उपलब्ध करा पाई। अदालत ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कंपनी पर 20 हजार रुपये मुकदमा खर्च लगाने का आदेश दिया।
पीठ ने निर्देश दिया कि यह राशि दावेदारों को दी जाए और जिम्मेदार अधिकारियों से इसकी वसूली की जाए। इस आदेश का उद्देश्य बिना पर्याप्त आधार के मुकदमेबाजी करने पर जवाबदेही तय करना भी है।
3.17 लाख रुपये का मुआवजा बरकरार, 12 प्रतिशत दंडात्मक ब्याज हटाया
हाईकोर्ट ने दावा अधिकरण द्वारा निर्धारित 3.17 लाख रुपये के मूल मुआवजे को बरकरार रखा। हालांकि, अधिकरण ने मुआवजे पर जो 12 प्रतिशत दंडात्मक ब्याज लगाया था, उसे अदालत ने निरस्त कर दिया।
पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले में अतिरिक्त दंडात्मक ब्याज लगाने का औचित्य नहीं बनता। इस प्रकार अदालत ने मुआवजे की मूल राशि कायम रखी, लेकिन दंडात्मक ब्याज हटाने का आदेश दिया।
बीमा कंपनी की अपील खारिज
हाईकोर्ट के फैसले के बाद घायल युवक का मूल मुआवजा बरकरार रहेगा। बीमा कंपनी की चालक के लाइसेंस संबंधी दलील पर्याप्त प्रमाण के अभाव में स्वीकार नहीं की गई। साथ ही कंपनी को दावेदारों को 20 हजार रुपये मुकदमा खर्च देने के निर्देश दिए गए।
इस मामले में अदालत ने वाहन के वास्तविक वजन, चालक के लाइसेंस की श्रेणी और बीमा कंपनी द्वारा प्रस्तुत प्रमाणों को महत्वपूर्ण माना। फैसला यह भी दर्शाता है कि किसी कानूनी दावे के समर्थन में आवश्यक तथ्य और दस्तावेज पेश करना संबंधित पक्ष की जिम्मेदारी है।




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