पन्ना में रिश्वत पर बयान देने वाले कार्यपालन यंत्री सीबी अहिरवार निलंबित, भोपाल मुख्यालय अटैच

Panna Engineer Suspended: रिश्वत पर बयान देने वाले सीबी अहिरवार निलंबित
पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले में रिश्वत को लेकर दिए गए बयान के बाद जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री सीबी अहिरवार पर राज्य सरकार ने कार्रवाई की है। शासन ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उनका मुख्यालय भोपाल स्थित जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय में निर्धारित किया गया है।
अहिरवार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वे कहते सुनाई दे रहे थे कि रिश्वत मांगते नहीं हैं, लेकिन कोई खुशी से दे तो लेने से इनकार भी नहीं करते। इस बयान को शासन ने शासकीय सेवक के आचरण के विपरीत माना और निलंबन का आदेश जारी किया।
30 अक्टूबर को जारी हुआ निलंबन आदेश
मध्यप्रदेश शासन के जल संसाधन विभाग ने 30 अक्टूबर 2026 को सीबी अहिरवार के निलंबन का आदेश जारी किया। आदेश में उनके सार्वजनिक बयान को कदाचरण की स्वीकारोक्ति मानते हुए मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम, 1965 के नियम 3(1)(एफ) और 3(1)(तीन) के उल्लंघन का आधार बताया गया है।
शासन ने मध्यप्रदेश सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत उन्हें निलंबित किया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय भोपाल स्थित प्रमुख अभियंता, जल संसाधन विभाग का कार्यालय रहेगा। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
वीडियो में क्या बोले थे कार्यपालन यंत्री?
सीबी अहिरवार का बयान उस समय सामने आया, जब उनसे विभाग के दो कर्मचारियों के लोकायुक्त की कार्रवाई में पकड़े जाने के संबंध में सवाल किए गए थे।
मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था कि उन्होंने अपनी नौकरी में कभी किसी से रिश्वत की मांग नहीं की, लेकिन यदि कोई व्यक्ति अपनी खुशी से पैसे देता है तो वे उसे लेने से मना भी नहीं करते। उन्होंने ठेकेदार की ओर से पैसे देने को उसका सद्भाव बताया था।
उनका यह बयान सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद चर्चा का विषय बन गया। इसके बाद विभागीय स्तर पर उनके आचरण को लेकर कार्रवाई की गई।
45 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़े गए थे विभाग के दो कर्मचारी
इस पूरे मामले की शुरुआत पन्ना के जल संसाधन विभाग में रिश्वत मांगने की शिकायत से हुई थी। ग्वालियर के ठेकेदार गौरव तोमर मझगांय मध्यम परियोजना की नहर में कैनाल स्लूस निर्माण का काम कर रहे थे। आरोप था कि काम के अंतिम भुगतान से संबंधित बिल को मंजूरी देने के बदले विभाग के कर्मचारियों ने रिश्वत मांगी थी।
ठेकेदार की शिकायत पर सागर लोकायुक्त पुलिस ने 28 अक्टूबर को कार्रवाई की। इस दौरान विभाग के संभागीय लेखा अधिकारी दीपक सिंह परमार को 15 हजार रुपये और सहायक ग्रेड-2 कर्मचारी अरविंद कुमार पाठक को 30 हजार रुपये लेते पकड़ा गया। दोनों के पास से कुल 45 हजार रुपये बरामद किए गए।
कार्यपालन यंत्री को लोकायुक्त ने रिश्वत लेते नहीं पकड़ा था
इस मामले में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई में सीबी अहिरवार को सीधे रिश्वत लेते हुए नहीं पकड़ा गया था। लोकायुक्त की कार्रवाई विभाग के दो कर्मचारियों के खिलाफ हुई थी। अहिरवार पर कार्रवाई उनके सार्वजनिक बयान और शासन द्वारा उसे सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन के रूप में देखे जाने के आधार पर हुई है।
अब निलंबन आदेश के बाद विभागीय स्तर पर आगे की प्रक्रिया की जाएगी। इस घटनाक्रम ने सरकारी विभागों में पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचार के मामलों में अधिकारियों की जिम्मेदारी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े किए हैं।




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