धार में ₹120 करोड़ के ओवरब्रिज की सड़क 7 महीने में चौथी बार उखड़ी
धार। इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर धार जिले के नौगांव के पास बने रेलवे ओवरब्रिज की सड़क बार-बार क्षतिग्रस्त होने से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। करीब 120 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस ओवरब्रिज की सड़क यातायात के लिए खुलने के कुछ ही समय बाद उखड़ने लगी थी। अब तक क्षतिग्रस्त हिस्से की तीन से चार बार मरम्मत की जा चुकी है, लेकिन समस्या दोबारा सामने आ रही है।
सड़क फिर से खराब होने के बाद इंदौर की ओर जाने वाली लेन के एक हिस्से में बैरिकेडिंग लगाकर आवागमन सीमित किया गया है। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क पर बिखरी गिट्टी और उड़ती धूल के कारण दुर्घटना की आशंका भी बनी हुई है।
मार्च में यातायात के लिए खोला गया था ओवरब्रिज
नौगांव थाना क्षेत्र के पास इंदौर-अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर बने इस रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण वर्ष 2024 में शुरू हुआ था। लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबे इस पुल को 12 मार्च 2026 को यातायात के लिए खोला गया था।
ओवरब्रिज के शुरू होने से इस मार्ग पर रेल लाइन के कारण होने वाली आवाजाही की बाधा कम करने और वाहनों के आवागमन को सुविधाजनक बनाने की उम्मीद थी। लेकिन खुलने के बाद इसके एक हिस्से में डामर उखड़ने की शिकायतें सामने आने लगीं।
समस्या सामने आने पर संबंधित हिस्से की मरम्मत कराई गई। इसके बावजूद सड़क की सतह दोबारा खराब होने लगी। बार-बार मरम्मत की जरूरत पड़ने से यह सवाल उठ रहा है कि आखिर सड़क का एक ही हिस्सा लगातार क्यों क्षतिग्रस्त हो रहा है।
तीन से चार बार मरम्मत के बाद भी नहीं निकला स्थायी समाधान
जानकारी के अनुसार, ओवरब्रिज के क्षतिग्रस्त हिस्से पर तीन से चार बार डामरीकरण कराया जा चुका है। इसके बावजूद सड़क की सतह दोबारा उखड़ने लगी। इससे वाहन चालकों को न केवल धीमी गति से निकलना पड़ रहा है, बल्कि सड़क पर बिखरे कंकड़ और गिट्टी से भी परेशानी हो रही है।
बार-बार मरम्मत किए जाने के बावजूद समस्या का बने रहना निर्माण सामग्री, सड़क की परतों और मरम्मत की प्रक्रिया की तकनीकी जांच की जरूरत को सामने लाता है। हालांकि, सड़क खराब होने की वास्तविक वजह क्या है, इसका निष्कर्ष विशेषज्ञों की जांच के बाद ही निकाला जा सकता है।
धूल, गिट्टी और बैरिकेडिंग से वाहन चालकों की परेशानी
ओवरब्रिज के क्षतिग्रस्त हिस्से से गुजरने वाले वाहनों के कारण धूल-मिट्टी उड़ती रहती है। सड़क पर बिखरी गिट्टी और कंकड़ भी दोपहिया वाहन चालकों के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं। वहीं, इंदौर जाने वाली लेन के कुछ हिस्से में बैरिकेडिंग लगाए जाने से वाहन चालकों को सावधानीपूर्वक आगे बढ़ना पड़ता है।
यह मार्ग इंदौर और गुजरात की दिशा में आने-जाने वाले वाहनों के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में सड़क की खराब स्थिति का असर स्थानीय यात्रियों के साथ-साथ लंबी दूरी तय करने वाले वाहन चालकों पर भी पड़ता है।
क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत के साथ यातायात सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है, ताकि सड़क की खराब स्थिति के कारण कोई दुर्घटना न हो।
निर्माण की गुणवत्ता की जांच की जरूरत
करीब 120 करोड़ रुपये की लागत से बने ओवरब्रिज पर बार-बार सड़क उखड़ने की घटना ने निर्माण और रखरखाव की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े किए हैं। सामान्य तौर पर किसी सड़क की सतह के बार-बार खराब होने के पीछे निर्माण सामग्री, सतह की तैयारी, पानी की निकासी, भारी वाहनों का दबाव या अन्य तकनीकी कारण हो सकते हैं।
लेकिन इस मामले में इनमें से किसी एक वजह को जिम्मेदार ठहराने के लिए पर्याप्त तकनीकी जानकारी सामने नहीं आई है। इसके लिए क्षतिग्रस्त हिस्से का निरीक्षण, सड़क की परतों की जांच और निर्माण से जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण जरूरी होगा।
यदि जांच में निर्माण या मरम्मत के दौरान कोई तकनीकी कमी सामने आती है, तो उसके आधार पर जिम्मेदारी तय करने और स्थायी सुधार करने की आवश्यकता होगी।
स्थायी मरम्मत से ही दूर होगी समस्या
वाहन चालकों के लिए इस ओवरब्रिज पर सुरक्षित आवागमन बनाए रखना महत्वपूर्ण है। केवल डामर की ऊपरी परत को बार-बार ठीक करने के बजाय सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से की वजह की पहचान करना जरूरी है। यदि नीचे की परतों या पानी की निकासी में कोई समस्या है, तो उसका समाधान किए बिना मरम्मत लंबे समय तक प्रभावी नहीं हो पाएगी।
फिलहाल सड़क के एक हिस्से में दोबारा क्षति सामने आने से स्थानीय लोगों और वाहन चालकों की परेशानी बढ़ी है। अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग तकनीकी जांच कराए, मरम्मत की गुणवत्ता सुनिश्चित करे और ऐसी व्यवस्था बनाए जिससे सड़क बार-बार उखड़ने की समस्या का स्थायी समाधान निकल सके।













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