कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) का न्यासी बोर्ड अपनी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में अनिवार्य अंशदान को घटाकर 10 प्रतिशत करने के प्रस्ताव को कल मंजूरी दे सकता है। मौजूदा व्यवस्था के तहत कर्मचारी व नियोक्ता कर्मचारी भविष्य निधि योजना (ईपीएफ), कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) तथा कर्मचारी जमा सम्बद्ध बीमा योजना (ईडीएलआई) में कुल मिला कर मूल वेतन की 12-12 प्रतिशत राशि का योगदान (प्रत्येक) करते हैं।
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने पर चीनी, चाय एवं कॉफी (इंस्टेंट कॉफी को छोड़कर) और दूध पाउडर पर कर का बोझ कम होगा क्योंकि चीनी पर वर्तमान कर की दर 8 फीसदी है जबकि जीएसटी कर की दर 5 फीसदी होगी।
इसी प्रकार से दूध पाउडर, चाय एवं कॉफी (इंस्टेंट कॉफी को छोड़कर) पर वर्तमान कर की दर 7 फीसदी है, जबकि प्रस्तावित जीएसटी में इसके लिए 5 फीसदी कर की दर तय की गई है।
नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की टेलिकॉम कंपनी बीएसएनएल ने इनमारसैट के जरिये सैटेलाइट फोन सर्विस शुरू की है। अभी कंपनी सरकारी एजेंसियों को यह सर्विस देगी। बाद में चरणबद्ध तरीके से यह सेवा दूसरे नागरिकों के लिए खोली जाएगी। फिलहाल टाटा कम्युनिकेशंस सरकारी एजेंसियों को सैटेलाइट फोन सर्विस प्रदान कर रही है।
लखनऊ: केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा सस्ते मकान उपलब्ध कराने के लिये शुरू की गई कर्ज से जुड़ी ब्याज सब्सिडी योजना (सीएलएसएस) से आम गरीबों के साथ-साथ मध्यम आय वर्ग के लोगों के भी घर के सपने को पंख लग सकते हैं. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत इस महत्वपूर्ण पहल के तहत निजी बिल्डरों को भी काम करने की छूट से यह काम और आसान हो गया है.
नई दिल्ली: जीएसटी काउंसिल ने कई वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी टैक्स की दरें पिछले हफ्ते तय कर दी हैं. अब सरकार की ओर से कहा गया है कि वे स्मार्टफोन खरीदने वालों, विभिन्न प्रकार के चिकित्सकीय उपकरणों और सीमेंट की कीमतें टैक्स के लागू होने के चलते कम हो जाएंगी. यानी, 1 जुलाई को जीएसटी पूरे देश में लागू होने के बाद आपको ये चीजें अपेक्षाकृत सस्ती पड़ेंगी. इसके अलावा पूजा सामग्री को जीएसटी की 'nil' कैटिगरी में रखा गया है.
नई दिल्ली. जीएसटी में कई चीजों पर बढ़ी टैक्स दरों से आने वाले समय में घर बनाना महंगा हो जाएगा। घर बनाने में इस्तेमाल सामान पर 8.75% तक टैक्स बढ़ रहा है। प्लाईबोर्ड, पार्टिकल बोर्ड पर 19.25% की जगह जीएसटी में 28% यानी 8.75% ज्यादा टैक्स लगेगा। टाइल्स पर भी 28% टैक्स लगेगा, जो कि मौजूदा दरों से 8.25% ज्यादा बनता है। हालांकि घर सजाने के सामान पर 12.5% तक कम टैक्स लगेगा। एक्सपर्ट्स से जानें जीएसटी का आप पर असर...
जीएसटी परिषद की श्रीनगर में गुरुवार को हुई बैठक में दूध और अनाज को इसके दायरे में नहीं लाने का फैसला लिया गया। इसके साथ ही तेल और साबुन की कर दरों में कटौती को मंजूरी दी गई है। केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता वाली परिषद ने बैठक के पहले सत्र में नए नियमों को मंजूरी दी।
तेल-साबुन पर दर घटी : जीएसटी के तहत बालों के तेल, साबुन, टूथपेस्ट पर 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगेगा। जबकि अभी इस पर कर की दर 22 से 24 फीसदी है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने पीएफ निकासी, पेंशन और बीमा जैसे विभिन्न दावों के निपटान के लिए निर्धारित समयसीमा को मौजूदा 20 दिन से घटाकर 10 दिन कर दिया है। जुलाई 2015 में, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने विभिन्न दावों को निपटाने की समयावधि को घटाकर 20 दिन किया था। अपने 4 करोड़ से अधिक सदस्यों को बेहतर सर्विस उपलब्ध कराने के लिए संगठन ने 1 मई 2017 को ऑनलाइन क्लेम सेटलमेंट सुविधा भी शुरू की थी। संगठन की योजना है कि आधार और बैंक एकाउंट से जुड़े सभी ईपीएफ खातों के दावों का निराकरण आवेदन मिलने के तीन घंटे के भीतर ही कर दिया जाए।
संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र ने 2017 में भारत के लिए अपने आर्थिक वृद्धि दर अनुमान में कमी की है हालांकि उसको उम्मीद है कि अगले साल यह बढ़कर 7.9 प्रतिशत हो जाएगी. संयुक्त राष्ट्र ने आगाह किया है कि देश के बैंकिंग क्षेत्र के खराब प्रदर्शन के चलते निकट भविष्य में निवेश में शायद ज्यादा मजबूती नहीं आए. यहां मंगलवार (16 मई) को जारी ‘संयुक्त राष्ट्र विश्व आर्थिक परिस्थिति व परिदृश्य’ रपट (मध्य 2017)में यह निष्कर्ष निकाला गया है. इसके अनुसार 2017 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहना अनुमानित है. संयुक्त राष्ट्र ने अपने अनुमान में कमी की है क्योंकि जनवरी 2017 में उसने वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था.
नई दिल्ली: नोटबंदी के बाद शायद सरकार को नोटबंदी के पक्ष में दलील देने के लिए सबसे अच्छे आकंड़े मिले हैं. सीबीडीटी यानी सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस के आंकड़ों को जारी करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि नोट बंदी के बाद 91 लाख लोगों को टैक्स के दायरे में लाया गया है.
पीएम मोदी द्वारा सितंबर में नोटबंदी का ऐलान किया गया था. इसके बाद से इसके आंकड़ों को लेकर सवाल किए जाते रहे. ये आंकड़ा इसलिए सरकार के पक्ष में जाता है क्योंकि अमूमन देश में हर साल करीब 60 लाख नए टैक्स पेयर्स जुड़ते हैं जबकि 10 लाख टैक्स पेयर्स के दायरे से बाहर चले जाते हैं.