कृषि क्षेत्र में अपरिमित संभावनाओं के द्वार खोलकर कैसे किसानों को अग्रणी और आत्म-निर्भर बनाया जा सकता है, इसका मध्यप्रदेश स्वर्णिम आदर्श प्रस्तुत कर रहा है। दरअसल कोरोना काल की अप्रत्याशित और अभूतपूर्व चुनौतियों के बीच मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने लोक-कल्याणकारी कार्यों से मिसाल कायम की है।
सदी की सबसे भयंकर प्राकृतिक आपदा - कोरोना महामारी, जिसने समूचे विश्व को हिला कर रख दिया, से जूझना तथा उससे प्रदेश को सफलतापूर्वक न्यूनतम हानि के साथ बाहर निकाल ले जाना किसी भागीरथ प्रयास से कम नहीं था। कोरोना महामारी ने जन-स्वास्थ्य को तो प्रतिकूल रूप से प्रभावित किया ही, प्रदेश की अर्थ-व्यवस्था की कमर तोड़ कर रख दी।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के संकल्प और साहसी निर्णयों ने आज मध्यप्रदेश को विकासशील राज्य की अग्रिम पंक्ति में लाकर खड़ा किया है। उनके प्रयासों और संकल्प से आज पर्यटन क्षेत्र आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश की संजीवनी के रूप में उभरा है। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और मध्यप्रदेश एक दूसरे के पूरक है।
मध्यप्रदेश के संसाधनों और कौशल से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों के सुनियोजित विकास की दिशा अब आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश की ओर तेजी से कदम बड़ा रही है। इसी साल 8 अप्रैल को लगभग 1891 उद्यमों की शुरूआत इसकी एक बानगी है। प्रदेश में आगामी एक–दो माह में ही 3000 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम शुरू किए जाने पर काम चल रहा है।
भरतचन्द्र नायक
यह एक शास्वत सत्य है कि भारत की जीवन प्रणाली लोकतंत्री है। जिस लोकतंत्र के उदय के इतिहास में भारत को पीछे बताया जाता है वह विवादित और बहस का मुद्दा है। सच्चाई यही है कि भारत के लोक जीवन में लोकतांत्रिक व्यवस्था अघोषित रूप से रची पची हैं यही राम राज्य की कल्पना है, जिसके पेरोकार इतिहास पुरूष के रूप में सराहे गये हैं। आजादी के बाद प्रशासनिक और संवैधानिक दृष्टि से लोकतंत्र की छाया में हमें अधिकार का कवच और कत्र्तव्य का नैतिक बोध कराया गया। ...
पिछले 11 वर्ष के दौरान पशु-पालन के क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय-स्तर पर अपनी सशक्त उन्नति दर्ज करवायी है। प्रदेश ने न केवल दुग्ध उत्पादन में ऐतिहासिक वृद्धि की है, बल्कि पशु-पालन, आहार, चिकित्सा, अनुसंधान, नस्ल-सुधार की अत्याधुनिक तकनीकों में भी अग्रणी बना है। प्रदेश में कुल 3 करोड़ 63 लाख पशु हैं। इनमें एक करोड़ 96 लाख गौ-वंशीय, 81 लाख भैंसवंशीय और 60 लाख बकरा-बकरी हैं। शासकीय प्रोत्साहन से ग्रामीण क्षेत्रों सहित शहरी क्षेत्रों में भी डेयरी उद्योग काफी उन्नति कर रहा है।...
मध्यप्रदेश में बीते ग्यारह वर्ष आमजनों के विकास के रहे हैं, ऐसा विकास जो जन अपेक्षाओं के अनुरूप हो। प्रदेश में ऐसा विकास हुआ जिसका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुँचा।...
सूचना-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करने के लिये राज्य शासन द्वारा पुरानी नीति का पुनरीक्षण कर नई आई.टी., आई.टी.ई.एस. एवं ई.एस.डी.एम. निवेश प्रोत्साहन नीति-2016 जारी की गयी है। पूँजी निवेश एवं ब्याज अनुदान जो अभी 10 करोड़ तक निवेश करने वाली लघु एवं मध्यम इकाइयों को ही दिया जाता था, उसे अब 10 करोड़ से ऊपर निवेश करने वाली इकाइयों को भी दिया जायेगा।...
मध्यप्रदेश की धरती का श्रंगार करने वाले वन उनके आस-पास रहने वाले गाँव वालों के आर्थिक एवं सामाजिक विकास का भी बहुत बड़ा साधन हैं।...
पूरे देश में 8 नवम्बर, 2016 को एक ऐतिहासिक फैसला हुआ। इस दिन ने सरकारों के कामकाज की शैली पर जन-मानस द्वारा जो प्रश्न उठाए जाते हैं उसे एक सार्थक उत्तर दिया है। अक्सर सरकारों पर ये आरोप लगते हैं कि वे कठोर निर्णय नहीं ले सकती और शक्तिशाली लोगों को नुकसान पहुँचाने वाले निर्णय लेने से डरती हैं। हमारे प्रधानमंत्री जी ने 8 दिसम्बर, 2016 से 500 और 1000 रूपये के नोटों को बन्द करने के साहसिक निर्णय से इस मिथक को तोड़ा है कि सरकारें दबाव में आकर कठोर निर्णय नहीं लेती हैं।...